रूस, चीन और चरम दक्षिणपंथी ताकतें: जर्मनी के सामने बढ़ती चुनौती
ऐसा क्या हुआ जो जर्मनी की खुफिया एजेंसियों ने रूस को देश का सबसे खतरनाक विरोधी बता दिया. जर्मनी के लिए और कौन बन रहा है बड़ी चुनौती, देखिए.

जर्मनी की खुफिया एजेंसियों के प्रमुख कभी विरले ही खुलकर कोई जानकारी देते हैं. बुंडेसटाग (जर्मन संसद) की संसदीय नियंत्रण समिति के सदस्य संघीय खुफिया सेवा यानी बीएनडी और संविधान संरक्षण के लिए बने संघीय कार्यालय (फेडरल ऑफिस फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन (बीएफवी)) के अध्यक्षों तथा सैन्य जवाबी खुफिया सेवा के अध्यक्ष के साथ अपने 'बग-प्रूफ' कमरे में जो चर्चा करते हैं, वह अत्यंत गोपनीय होती है.
लेकिन 2016 से साल में एक बार एक सार्वजनिक बैठक आयोजित की जाती है, जो पत्रकारों के साथ-साथ पहले से रजिस्ट्रेशन कराने वाले आम नागरिकों के लिए भी खुली होती है. इसी हफ्ते आयोजित हुई इस साल की बैठक में खुफिया अधिकारी बेहद चिंतित दिखाई दिए. उन्होंने एक ऐसे देश की तस्वीर पेश की जो रूस के साथ सीधे टकराव के दौर से गुजर रहा है.
बीएफवी के अध्यक्ष सिनान सेलेन ने नाटो विशेषज्ञों के हालिया आकलन का हवाला देते हुए कहा कि "वर्ष 2029 के लिए जैसे सैन्य परिदृश्य की कल्पना की गई थी, खुफिया दुनिया के अंधेरे में वो आज ही हकीकत बन चुके हैं." नाटो विशेषज्ञों ने उसमें चेतावनी दी थी कि कुछ परिस्थितियों में रूस कुछ ही सालों में नाटो गठबंधन पर हमला करने में सक्षम हो सकता है.
बीएनडी के अध्यक्ष मार्टिन येगर ने कहा कि अभी हाल ही में किसी सैन्य हमले के कोई संकेत नहीं हैं. इसके बजाय, मॉस्को तोड़फोड़, साइबर हमलों, दुष्प्रचार और जासूसी के जरिए "शैडो वॉर" यानी छद्म युद्ध लड़ रहा है. येगर ने स्पष्ट किया, "वर्तमान में कोई भी अन्य देश जर्मनी के लिए इतना सीधा, व्यापक और ठोस खतरा पैदा नहीं करता है." उन्होंने आगे कहा कि "जर्मनी रूस के साथ एक हिंसक संघर्ष में उलझने के खतरे का सामना कर रहा है."
रूस के निशाने पर
सैन्य, वित्तीय और मानवीय प्रयासों के माध्यम से यूक्रेन का समर्थन करने में जर्मनी एक अनिवार्य भूमिका निभाता है. येगर ने कहा कि इसके कारण रूस जर्मनी को "यूरोप में रूस के आधिपत्यपूर्ण शक्ति प्रदर्शन में एक बड़ी बाधा" के रूप में देखता है. येगर का निष्कर्ष है: "अगर जर्मनी डगमगाया, तो पूरा यूरोप, और यूक्रेन के लिए यूरोप का समर्थन, दोनों ही बिखरने शुरू हो जाएंगे."
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खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों ने यूक्रेन में युद्ध के रुख को लेकर चिंता जताई. आने वाली सर्दियों में रूस के यूक्रेन पर दबाव बढ़ाने की आशंका है. इसके साथ ही, मॉस्को पश्चिमी देशों से होने वाली हथियारों की आपूर्ति को बाधित करने की भी कोशिश कर रहा है. खुफिया सेवाओं का मानना है कि रूस यूरोपीय संघ और अन्य स्थानों पर जानबूझकर अनिश्चितता पैदा करने और सामाजिक जुझारूपन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है. सिनान सेलेन ने "ठंडे दिमाग से सोच-समझकर रचे गए अस्थिरता अभियानों" की बात कही.
यह पूछे जाने पर कि क्या यूक्रेन का कम समर्थन करने से जर्मनी अधिक सुरक्षित रहेगा, येगर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कीव को दी जाने वाली सहायता जर्मनी के राष्ट्रीय हित में है. जासूसी के अलावा, तोड़फोड़ की घटनाओं और यहां तक कि हत्या के अभियानों की संख्या भी बढ़ रही है. परिवहन मार्ग, सैन्य बुनियादी ढांचा और रक्षा उद्योग विशेष रूप से खतरे में हैं.
मिसाल के तौर पर हाल ही के महीनों में लाइपजिग/हाले हवाई अड्डे पर जो हमले के प्रयास किए गए, उसमें अधिकारियों के हिसाब से मुख्य संदिग्ध रूस ही है. इसी अगस्त में, वहां एक यूक्रेनी कार्गो विमान के पास विस्फोटकों से लैस एक ड्रोन पाया गया था. जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी, फेडरल ऑफिस फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन के प्रमुख सेलेन ने एक बार फिर रूसी संलिप्तता के स्पष्ट सबूतों की ओर इशारा किया.
'डिस्पोजेबल एजेंट' और संगठित अपराध
जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी तथाकथित ‚लो-लेवल एजेंट्स‘ के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर खास तौर पर चिंतित है. ये ऐसे लोग हैं जिन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए स्थानीय स्तर पर भर्ती किया जाता है. मिसाल के तौर पर, जासूसी, परिवहन सेवाओं या तोड़फोड़ की कार्रवाइयों को अंजाम देने के लिए. सेलेन ने जोर देकर कहा, "इसमें सोशल मीडिया की केंद्रीय भूमिका है."
खुफिया प्रमुखों ने यह भी कहा कि रूसी एजेंसियां संगठित आपराधिक गिरोहों के साथ सहयोग कर रही हैं. प्रमुखों के अनुसार, ऐसे मामले में बढ़ोतरी को देखते हुए भविष्य में इनसे निपटने की और पुख्ता तैयारी करने की जरूरत होगी. बीएनडी के अनुसार, टारगेटेड अटैक कर रूस धीरे-धीरे सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है. इन लक्षित हमलों में नाटो क्षेत्र के ऊपर ड्रोन उड़ाने और मोल्डोवा में हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने जैसी कार्रवाइयां शामिल हैं.
येगर ने कहा, "रूस यहां बहुत सोच-समझकर पूरे स्तर को एक तरह के 'न्यू नॉर्मल' की ओर खिसका रहा है." बीएनडी के अनुसार, ऐसे लक्षित हमले कर रूस धीरे-धीरे सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है. इन लक्षित हमलों में नाटो क्षेत्र के ऊपर ड्रोन उड़ाने और मोल्डोवा में हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने जैसी कार्रवाइयां शामिल हैं. येगर ने कहा, "रूस यहां बहुत सोच-समझकर पूरे स्तर को एक तरह के 'न्यू नॉर्मल' की ओर खिसका रहा है."
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येगर ने कहा कि कुछ नाटो देशों, खास तौर पर बाल्टिक राज्यों के खिलाफ गुप्त अभियानों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने 2014 में क्रीमिया की घटनाओं का जिक्र किया, जब रूसी सैनिक बिना किसी स्पष्ट पहचान को उजागर किए गुप्त दस्तों के रूप में वहां दिखाई दिए थे. ऐसे में एजेंसी प्रमुखों का मानना है कि अब एक बार फिर से नाटो की प्रतिक्रिया देने की क्षमता को टेस्ट करने के लिए उसके खिलाफ इसी तरह के अभियान चलाए जा सकते हैं.


