अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत पर राजा कृष्णमूर्ति चिंतित, FBI से मांगा जवाब
अमेरिका में नस्ली पूर्वाग्रह का मुद्दा उठाते हुए कृष्णमूर्ति ने टेक्सास के बो फ्रेंच का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, फ्रेंच ने फुटबॉल मैच देखने पहुंचे भारतीय मूल के बच्चों को विदेशी बताते हुए कहा था कि वे अमेरिकी नागरिकों की जगह ले रहे हैं।

वॉशिंगटन : अमेरिका में भारतीयों और एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत को लेकर भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक नेताओं की विभाजनकारी और नफरत भरी बयानबाजी समाज में हिंसा को बढ़ावा दे सकती है। शिकागो के पास एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश का जिक्र करते हुए उन्होंने संघीय जांच ब्यूरो (FBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कथित तौर पर लंबे समय से चल रही साजिश का समय रहते पता क्यों नहीं लगाया जा सका। एक विशेष साक्षात्कार में कृष्णमूर्ति ने कहा कि अमेरिका में धार्मिक और नस्ली समुदायों के खिलाफ नफरत को सामान्य राजनीतिक बयानबाजी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे ऐसी टिप्पणियों की स्पष्ट रूप से निंदा करें, क्योंकि इनका असर समाज और लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
बालाजी मंदिर पर हमले की साजिश से बढ़ी चिंता
राजा कृष्णमूर्ति ने 11 अक्टूबर को शिकागो के पास बालाजी मंदिर के बाहर हुई गोलीबारी की घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, घटना के दौरान संदिग्ध का हथियार जाम हो गया, जिससे संभावित रूप से बड़ी त्रासदी टल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह साजिश कथित तौर पर करीब दो साल से चल रही थी, तो जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। कृष्णमूर्ति ने इस मामले में FBI की भूमिका की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। FBI निदेशक काश पटेल की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में जवाब संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। किसी भी समुदाय के धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की कोशिश न केवल संबंधित समुदाय, बल्कि व्यापक समाज की सुरक्षा और आपसी विश्वास के लिए भी चिंता का विषय है।
नफरत के खिलाफ नेताओं को खुलकर बोलने की जरूरत
कृष्णमूर्ति ने उन अमेरिकी सांसदों की आलोचना की, जिन्होंने मंदिर पर हमले की कथित साजिश की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में राजनीतिक नेताओं की चुप्पी को गलत तरीके से समर्थन के रूप में समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि नफरत और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना सभी राजनीतिक प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, ईसाई और सिख समेत सभी धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाली नफरत की एक समान रूप से निंदा की जानी चाहिए। उनका मानना है कि राजनीतिक नेतृत्व की भाषा समाज में स्वीकार्य व्यवहार की सीमाएं तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि प्रभावशाली लोग किसी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक या भेदभावपूर्ण टिप्पणियां करते हैं, तो इससे दूसरे लोगों को भी वैसा व्यवहार करने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
भारतीय मूल के बच्चों को विदेशी बताने पर उठाए सवाल
अमेरिका में नस्ली पूर्वाग्रह का मुद्दा उठाते हुए कृष्णमूर्ति ने टेक्सास के बो फ्रेंच का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, फ्रेंच ने फुटबॉल मैच देखने पहुंचे भारतीय मूल के बच्चों को विदेशी बताते हुए कहा था कि वे अमेरिकी नागरिकों की जगह ले रहे हैं। कृष्णमूर्ति ने इन टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि संबंधित बच्चों में कई ऐसे थे, जिनका जन्म टेक्सास में हुआ था। ऐसे में उन्हें विदेशी बताना आव्रजन नीति पर चर्चा करने से अलग मामला है। उन्होंने इसे नस्ली पूर्वाग्रह और पहचान के आधार पर लोगों को अलग करने की प्रवृत्ति का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, अमेरिकी समाज में किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता या नागरिकता का आकलन उसके रंग, धर्म अथवा पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
शिक्षा विभाग की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी नाराजगी
कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी शिक्षा विभाग की एक सोशल मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की। उनके मुताबिक, पोस्ट में टेक्सास विश्वविद्यालय के फुटबॉल मैच के दौरान श्वेत दर्शकों की तस्वीर के साथ लिखा गया था, 'कॉलेज फुटबॉल को फिर से महान बनाएं।' उन्होंने ऐसी पोस्ट को लेकर चिंता जताई और कहा कि सार्वजनिक संस्थानों को ऐसे संदेशों से बचना चाहिए, जिन्हें नस्ली श्रेष्ठता या भेदभाव को बढ़ावा देने वाला समझा जा सकता है। कृष्णमूर्ति ने आगाह किया कि नफरत भरी बयानबाजी के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कई बार किसी हिंसक घटना को अंजाम देने के लिए एक व्यक्ति का उकसावे से प्रभावित होना भी पर्याप्त हो सकता है।
घरेलू उग्रवाद की जांच के लिए अधिक संसाधनों की मांग
मंदिर की घटना का जिक्र करते हुए कृष्णमूर्ति ने बताया कि संदिग्ध पर हथियारों और आतंकवाद से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने संघीय एजेंसियों से घरेलू हिंसक उग्रवाद की जांच के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।उन्होंने संदिग्ध की ऑनलाइन गतिविधियों, संपर्कों और कथित कट्टरपंथ की प्रक्रिया की गहराई से जांच करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल वारदात के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना भी जरूरी है। कृष्णमूर्ति की टिप्पणियों ने अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता, नस्ली भेदभाव और घरेलू उग्रवाद की रोकथाम को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है। अब इस मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका और मंदिर की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।


