Top
Begin typing your search above and press return to search.

पाकिस्तान: बलूच कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा के विरोध में बलूचिस्तान बंद

बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता माहरंग बलूच समेत कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा के विरोध में बुधवार को बलूचिस्तान के कई इलाकों को पूरी तरह बंद रखा गया

पाकिस्तान: बलूच कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा के विरोध में बलूचिस्तान बंद
X

क्वेटा। बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता माहरंग बलूच समेत कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा के विरोध में बुधवार को बलूचिस्तान के कई इलाकों को पूरी तरह बंद रखा गया। प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को 'अन्यायपूर्ण' बताया।

यह विरोध प्रदर्शन सोमवार को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत की ओर से चार कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद शुरू हुआ। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह मामला फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़ा था।

माहरंग बलूच के अलावा अदालत ने बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ) के अध्यक्ष बलाच कादिर, केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और बीवाईसी नेता सिबगतुल्लाह शाह को भी उम्रकैद की सजा सुनाई।

बीवाईसी ने अपने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' अकाउंट पर बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में पूरी तरह बंद की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, "यह हड़ताल दमन, राजनीतिक बदले की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल के खिलाफ लोगों की सामूहिक नाराजगी को दिखाती है। अलग-अलग वर्गों के लोगों ने अपनी एकजुटता दिखाई और साफ संदेश दिया कि बलूचिस्तान अन्याय और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के खिलाफ खड़ा रहेगा।"

बीवाईसी ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य पक्ष ने नेताओं पर 'झूठे और बेबुनियाद' आरोप लगाए और पूरी सुनवाई में जरूरी 'न्यायिक पारदर्शिता' नहीं थी।

संगठन ने कहा, "क्वेटा जेल के अंदर बंद कमरे में हुई सुनवाई, जिसे 'बिना चेहरे वाली सुनवाई' कहा जा रहा है, बलूचिस्तान की राजनीतिक आवाजों को दबाने की कोशिश मानी जा रही है। संविधान और कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष न्याय देने के बजाय राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए किया जा रहा है। बलूचिस्तान के लोग अपने नेताओं के साथ हुए इस अन्याय को स्वीकार नहीं करते और मजबूती से खड़े हैं।"

इस बीच, कई बड़े मानवाधिकार संगठनों ने भी इस फैसले की आलोचना की और इसे 'निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के खिलाफ' तथा 'न्याय का खुला उल्लंघन' बताया।

माहरंग बलूच समेत कार्यकर्ताओं को दी गई उम्रकैद की सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा, "यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के खिलाफ है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।"

उन्होंने कहा कि यह सजा जेल परिसर में हुई एक तेज गुप्त सुनवाई के बाद दी गई, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। उन्होंने यह भी कहा कि माहरंग और शाह को कथित हिंसा से जोड़ने वाला कोई सीधा सबूत पेश नहीं किया गया।

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की और कहा कि 'यह न्याय नहीं है, बल्कि राजनीतिक विरोध को दबाने और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने के लिए न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।'

संगठन ने कहा, "यह फैसला पाकिस्तान में कानून के शासन के लिए बड़ा झटका है। बीवाईसी की नेता डॉ. बलूच बलूच लोगों की आवाज उठाती रही हैं और जबरन गायब किए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं और राज्य के दमन के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। उनका एकमात्र 'अपराध' गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को सामने लाना है।"


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it