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भूटान में 4.9 तीव्रता का भूकंप: भारत के असम व पूर्वोत्तर राज्यों में भी हिली धरती, लोगों में मची अफरा-तफरी

भूटान में शनिवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र ग्येलपोजिंग बताया जा रहा है। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार शाम 4 बजकर 01 मिनट (भारतीय समयानुसार) पर धरती डोली और रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई।

भूटान में 4.9 तीव्रता का भूकंप: भारत के असम व पूर्वोत्तर राज्यों में भी हिली धरती, लोगों में मची अफरा-तफरी
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नई दिल्ली। भूटान में शनिवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र ग्येलपोजिंग बताया जा रहा है। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार शाम 4 बजकर 01 मिनट (भारतीय समयानुसार) पर धरती डोली और रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई।

इसकी गहराई जमीन से 5 किमी नीचे नापी गई। पूर्वोत्तर भारत में भी इसके झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया पर लोगों को संयम बरतने की सलाह दी। बताया कि किसी नुकसान की खबर नहीं मिली।

इसी साल 7 जून को भी भूटान में भूकंप आया था। तब तीव्रता 5.6 और गहराई 10 किलोमीटर बताई गई थी।

भूकंप का केंद्र भूटान के पुणखा में स्थित था, जो पश्चिम बंगाल के उत्तर में है। तब भी उत्तर बंगाल, पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों और बांग्लादेश में भी झटके महसूस किए गए थे।

भूकंप मुख्य रूप से पृथ्वी की बाहरी परत के टेक्टॉनिक प्लेट्स की रफ्तार के कारण आता है। धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उन्हें फॉल्ट लाइन जोन कहा जाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं। जब तनाव ज्यादा बनने लगता है, तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। इनके टूटने की वजह से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है और भूकंप आता है।

भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। 7.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप को आमतौर पर खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है, वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप माइक्रो भूकंप कहलाते हैं, जिन्हें अधिकांश लोग महसूस भी नहीं कर पाते। दूसरी ओर, 4.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

वहीं, भूटान की बात करें तो ये एक बेहद संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है और यहां भारतीय और यूरेशियन प्लेट्स लगातार धीमी गति से होने वाली टक्कर के चलते भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है।



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