Top
Begin typing your search above and press return to search.

इस्राएल में नेतन्याहू की परीक्षा, 7 अक्टूबर के हमले के बाद पहला मतदान

7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले के बाद इस्राएल में पहला चुनाव हो रहा है.

इस्राएल में नेतन्याहू की परीक्षा, 7 अक्टूबर के हमले के बाद पहला मतदान
X

माओ जेदोंग पर कथित टिप्पणी से विवाद में फंसे एम्बापे, चीन की तीन कंपनियों ने तोड़े करार

फ्रांस के फुटबॉल स्टार किलियन एम्बापे चीन में विवादों में घिर गए हैं. कम्युनिस्ट चीन के संस्थापक माओ जेदोंग को लेकर उनकी कथित टिप्पणी के बाद चीन की कम से कम तीन कंपनियों ने उनके साथ अपने करार खत्म करने का ऐलान किया है. इनमें पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनी डोंगपेंग, डेयरी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेंगनियू और चीज निर्माता मिल्कग्राउंड शामिल हैं. एम्बापे फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान हैं. चीन में मेट्रो स्टेशनों से लेकर लिफ्टों तक में उनके विज्ञापन दिखाई देते हैं. हालांकि, हालिया विवाद के बाद कंपनियों ने उनसे दूरी बना ली है.

तीनों कंपनियों ने मंगलवार को बयान जारी कर एम्बापे के साथ अपने समझौते खत्म करने की घोषणा की. कंपनियों ने कहा कि वे “राष्ट्रीय भावना को आहत करने वाले किसी भी शब्द और कृत्य” का विरोध करती हैं. हालांकि, कंपनियों ने अपने फैसले की वजह स्पष्ट रूप से नहीं बताई. उनके बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो क्लिप प्रसारित होने के बाद सामने आए.

फुटबॉल में कैसे फुस्स हुई दिग्गज जर्मन टीम

यह क्लिप एक इंटरव्यू की बताई जा रही है. वीडियो में उनसे पूछा जाता है कि उनका पसंदीदा मीम कौन-सा है? इस पर एम्बापे कहते हैं, “एक व्यक्ति का वीडियो जिसे किसी ने बनाया था... मुझे लगता है कि वह चीनी तानाशाह था.” इसके बाद वीडियो में एक बदली हुई तस्वीर दिखाई जाती है, जिसमें माओ जेदोंग के शरीर पर एम्बापे का चेहरा लगा हुआ है.

जर्मनी में लोगों के समूह से टकराई बीएमडब्ल्यू कार, 4 लोग घायल

जर्मनी के हनोवर के पास सोमवार देर रात एक कार ने लोगों के समूह को टक्कर मार दी. इस घटना में कम से कम चार लोग घायल हो गए. घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि यह घटना सोमवार आधी रात से कुछ समय पहले नाएश्टाट आम रॉयबेनबेर्गे इलाके में हुई. एक बीएमडब्ल्यू कार लोगों के समूह से टकरा गई.

भारत की सड़कों पर मर्दानगी से जूझती महिलाएं

घटना के दौरान पास में नियमित यातायात जांच कर रही पुलिस की एक गश्ती टीम ने हस्तक्षेप किया. पुलिस ने आगे किसी नुकसान को रोकने की कोशिश की. इस दौरान अधिकारियों ने वाहन पर गोलियां भी चलाईं. पुलिस के शुरुआती आकलन के अनुसार, घटना में शामिल लोग एक-दूसरे को पहले से जानते थे. बीएमडब्ल्यू में सवार लोग घटनास्थल से फरार हो गए.

निजता कानून की वजह से न्यूजरूमों के बंद होने का खतरा, मीडिया समूहों ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील

भारत के मीडिया समूहों ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार के निजता कानून की वजह से न्यूजरूम बंद हो सकते हैं. मीडिया समूहों ने इसे प्री-सेंसरशिप के समान बताया है. 21 समाचार प्रकाशकों के समूह डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) का कहना है कि इस कानून से खोजी पत्रकारिता करने में रुकावट आएगी और सरकार को पत्रकारों के सोर्स जानने का अधिकार मिल जाएगा.

डीएनपीए की ओर से पेश हुईं वकील माधवी दीवान ने कोर्ट से कहा कि यह समाचार की पूरी अवधारणा को बदल रहा है. उन्होंने आगे कहा, "अगर हमें अनुमति लेनी पड़ी तो न्यूजरूम बंद हो जाएंगे... तब तो पूरी तरह से पूर्व-सेंसरशिप का शासन लागू हो जाएगा." मीडिया आउटलेटों को आशंका है कि इस कानून की वजह से एक पत्रकार को उसी व्यक्ति से पूर्व सहमति लेनी पड़ सकती है, जिसकी वह जांच करना चाहता है.

डीएनपीए के मुताबिक, पत्रकार अगर एक व्यक्ति से उसकी जांच करने की अनुमति लेगा तो "इससे उस व्यक्ति को सबूत नष्ट करने और गवाहों को डराने-धमकाने का मौका मिल जाएगा." डीएनपीए का कहना है कि इससे मीडिया आउटलेटों को छपी हुई रिपोर्टें हटानी पड़ सकती हैं. मीडिया आउटलेटों को यह भी डर है कि इस कानून में दी गई शक्तियों की वजह से पत्रकारों को अपने स्रोत व सूत्र बताने पड़ सकते हैं.

जिन मीडिया समूहों ने इस कानून को चुनौती दी है, उनमें मुकेश अंबानी का नेटवर्क18 और गौतम अदाणी का एनडीटीवी भी शामिल है. इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स इंटरनेट जैसे मीडिया आउटलेट भी डीएनपीए का हिस्सा हैं. डीएनपीए ने अपनी 698 पन्नों की याचिका में मांग की है कि कानून के अधिकांश विवादास्पद प्रावधानों को, जो मई 2027 से लागू होंगे, रद्द कर दिया जाए.

सिंगापुर से शुरू हुआ जर्मन चांसलर मैर्त्स का एशिया दौरा, आर्थिक सहयोग और सुरक्षा पर होगी चर्चा

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स चार दिवसीय एशिया दौरे पर हैं. मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह सिंगापुर पहुंचने के साथ उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की. उनका मकसद सिंगापुर के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है. इस दौरान मैर्त्स देश के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा वे सिंगापुर में भाषण भी देंगे, जिसमें जर्मनी की हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़ी रणनीति की रूपरेखा पेश किए जाने की उम्मीद है.

दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत में आर्थिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे होंगे. इस क्षेत्र में चीन के पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय और समुद्री विवाद भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं. जर्मनी और सिंगापुर के बीच व्यापार, रक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में लंबे समय से करीबी संबंध हैं. जर्मन सरकार के अनुसार, सिंगापुर में करीब 2,400 जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग 45,000 लोग कार्यरत हैं. दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार करीब 13.2 अरब डॉलर का है.

सिंगापुर के बाद जर्मन चांसलर जापान और दक्षिण कोरिया का भी दौरा करेंगे. साल 2025 में चांसलर का पद संभालने के बाद यह मैर्त्स की तीसरी एशिया यात्रा है.

हरदीप पुरी बोले, रूसी तेल का आयात कम करने के लिए अमेरिका से कोई दबाव नहीं

भारत के प्राकृतिक गैस एवं तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा कि रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने के लिए भारत पर अमेरिका की तरफ से कोई दबाव नहीं डाला गया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पुरी से पूछा गया था कि क्या रूसी तेल का आयात कम करने के लिए कोई दबाव था. इस पर पुरी ने कहा, "मुझे कभी कुछ महसूस नहीं हुआ."

पुरी ने कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 0.20 फीसदी थी लेकिन युद्ध के बाद रूसी तेल पर छूट मिलने की वजह से इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई. उन्होंने आगे कहा कि अब रूसी तेल का आयात घटा है क्योंकि रिफाइनर खाड़ी देशों से रियायती दरों पर तेल अधिक मात्रा में खरीद रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोगों के फैसले उनके हितों पर आधारित होते हैं.

अमेरिका में एक बिल पास हुआ था, जिसके तहत रूसी तेल के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जा सकते थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अक्टूबर के मध्य में भारत को इन टैरिफों से छूट दे दी. इसके बाद भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के लिए हो रही कोशिशें भी टैरिफ माफ करने की एक वजह रही.

चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर भारत के साथ श्रीलंका और नेपाल ने भी जारी की चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, चक्रवात ‘अर्नब’ बुधवार, 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है. मौसम विभाग ने अपनी बुलेटिन में कहा कि यह "अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान" के तौर पर तट से टकराएगा और इस दौरान हवा की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. इससे पहले राज्य में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है, कई ट्रेन रद्द की गई हैं और स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी कर दी गई है.

पड़ोसी देश श्रीलंका में भी भारी बारिश की चेतावनी के साथ स्कूलों को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं. श्रीलंका के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तूफान के कारण अचानक बाढ़ आने या भूस्खलन होने की घटनाएं हो सकती हैं. नेपाल में पर्यटकों को ऊंचे स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी गई है क्योंकि चक्रवात अर्नब की वजह से हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश, हिमपात और हिमस्खलन होने की आशंका है.

आंध्रप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि राज्य में करीब 50 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने रॉयटर्स को बताया कि राज्य के पांच जिलों में दो दिन के लिए स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए गए हैं. दक्षिणी तट के किनारे स्थित 53 मार्गों पर रेल सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं हैं.

इस्राएल में नेतन्याहू की परीक्षा, 7 अक्टूबर के हमले के बाद पहला मतदान

इस्राएल में मंगलवार, 27 अक्टूबर को तनावपूर्ण माहौल के बीच राष्ट्रीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले और उसके बाद मध्य पूर्व में छिड़े युद्धों के बीच नेतन्याहू की राजनीतिक लोकप्रियता और नेतृत्व की यह बड़ी परीक्षा मानी जा रही है. इस्राएल में मतदाता राजनीतिक दलों के पक्ष में वोट करते हैं. इसके बाद विभिन्न दल गठबंधन बनाकर सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाते हैं. देश की 120 सदस्यीय संसद में किसी भी एक पार्टी को अब तक अकेले 61 सीटों का बहुमत नहीं मिला हैं.

देश में सर्वेक्षणों में मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है. इस्राएल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, देश में 73 लाख से अधिक मतदाता मतदान के पात्र हैं. इनमें करीब 3.30 लाख युवा मतदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने हाईस्कूल के वर्ष युद्ध के साये में बिताए हैं. देशभर में लगभग 12,000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. मतदान केंद्र रात 10 बजे बंद हो जाएंगे. मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद प्रत्येक केंद्र पर मतपत्रों की गिनती हाथ से की जाएगी.

नेतन्याहू करीब दो दशकों से इस्राएल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी इस महीने की शुरुआत में नेतन्याहू को दोबारा चुने जाने का समर्थन किया था. चुनाव में खराब प्रदर्शन उनके लंबे राजनीतिक करियर के अंत की शुरुआत कर सकता है और देश की राजनीति में नए दौर का रास्ता खोल सकता है. नेतन्याहू के सामने पूर्व सैन्य प्रमुख गाडी आइसनकाट, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और पूर्व कमांडो व नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी यायर लैपिड और पूर्व रक्षा मंत्री एविग्डोर लिबरमान मुकाबले में हैं.


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it