ईरान पर ट्रंप के एक्शन के समर्थन में उतरे नाटो प्रमुख, बोले- दुनिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के महासचिव मार्क रूटे ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति और कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कदम ने ईरान को परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप नाटो और ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

वाशिंगटन। नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के महासचिव मार्क रूटे ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति और कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कदम ने ईरान को परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप नाटो और ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
व्हाइट हाउस में बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप के साथ संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए मार्क रूटे ने अगले महीने अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से पहले ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी नेतृत्व की सराहना की।
मार्क रूटे ने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ईरान के मुद्दे पर आप जो कर रहे हैं, वह बेहद महत्वपूर्ण है।" उन्होंने ईरान को ऐसा देश बताया जो 'अराजकता और आतंकवाद का निर्यात' करता है। मार्क रूटे के मुताबिक, ईरान परमाणु क्षमता हासिल करने के बेहद करीब पहुंच चुका था।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान के हाथ परमाणु हथियार लग जाता तो यह सिर्फ मध्य पूर्व या इजरायल के लिए ही नहीं बल्कि यूरोप और पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन जाता। मार्क रूटे ने कहा कि यह कार्रवाई किसी क्षेत्रीय राजनीति का हिस्सा नहीं थी, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा कदम था।
मार्क रूटे ने कहा, "यह सुरक्षा और लोगों की रक्षा का मामला है। यह मुक्त दुनिया के नेता की जिम्मेदारी है, जो केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है।"
वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कुछ यूरोपीय देशों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान अमेरिका को अपने सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। ट्रंप ने कहा, "हम निराश हुए। हमें किसी मदद की जरूरत नहीं थी। हमने पहले ही सप्ताह में उन्हें पूरी तरह कमजोर कर दिया था, लेकिन अच्छा होता अगर हमारे सहयोगी कहते कि हम मदद करना चाहते हैं।"
इस पर मार्क रूटे ने माना कि कुछ मामलों में निराशा की वजह रही, लेकिन उन्होंने इसे अलग-थलग घटनाएं बताईं। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय समझौतों के जरिए अमेरिकी अभियानों को सहयोग दिया। मार्क रूटे के अनुसार, अभियान के दौरान 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमान यूरोप के एयरबेस से उड़ान भर चुके थे, जिससे अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को महत्वपूर्ण समर्थन मिला।
बाद में वेस्ट विंग के बाहर पत्रकारों से बातचीत में रुटे ने दोहराया कि ट्रंप नाटो गठबंधन के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप लगातार सहयोगी देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग करते रहे हैं और 2035 तक जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा एवं सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य उनकी बड़ी विदेश नीति उपलब्धियों में से एक है।
मार्क रूटे ने बताया कि यूरोपीय देशों और कनाडा ने पिछले एक साल में अपने रक्षा खर्च में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी रक्षा कंपनियों से यूरोपीय देशों की खरीद और निवेश के कारण अमेरिका में करीब 2 लाख नौकरियों को समर्थन मिल रहा है।
नाटो महासचिव ने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच से छह महीनों में यूक्रेन की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है और इसमें अमेरिकी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
7 से 8 जुलाई को अंकारा में होने वाला नाटो शिखर सम्मेलन रक्षा खर्च बढ़ाने, रक्षा उत्पादन क्षमता का विस्तार करने और यूक्रेन को निरंतर समर्थन देने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। नाटो लगातार यह दोहराता रहा है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे, और मार्क रूटे ने वाशिंगटन दौरे के दौरान भी इस रुख को मजबूती से दोहराया।


