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जर्मनी में बड़े टैक्स, श्रम और पेंशन सुधारों को मिली मंजूरी

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में सरकार चला रही पार्टियों के बीच बड़े सुधारों को लेकर सहमति बन गई है. बीमार रहने पर ली जाने वाली छुट्टियां भी इन सुधारों की चपेट में आई हैं.

जर्मनी में बड़े टैक्स, श्रम और पेंशन सुधारों को मिली मंजूरी
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यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में सरकार चला रही पार्टियों के बीच बड़े सुधारों को लेकर सहमति बन गई है. बीमार रहने पर ली जाने वाली छुट्टियां भी इन सुधारों की चपेट में आई हैं.

जर्मनी में बॉस को फोन या ईमेल से यह कह देना कि "आज मैं बीमार हूं," तीन दिन की कैजु्अल सिक लीव लेने के लिए यह काफी था. लगातार चौथे दिन बीमारी की छुट्टी लेने पर डॉक्टर से मिला बीमार होने का सर्टिफिकेट दिखाना पड़ता था. 2025 में चांसलर बनने से पहले से ही फ्रीडरिष मैर्त्स इस छुट्टी के कड़े आलोचक रहे हैं. अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए वह कहते आए हैं कि जर्मनी, बीमारी की सबसे ज्यादा छु्ट्टी लेने वालों का देश बन गया है. मंगलवार शाम राजधानी बर्लिन में बड़े सुधारों का एलान करते हुए मैर्त्स ने साफ कर दिया कि अब बीमारी की छुट्टी लेने पर पहले दिन ही डॉक्टर का सर्टिफिकेट दिखाना होगा.

प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा, "हम अपने कामकाज में लचीलापन बढ़ाने पर काम कर रहे हैं." मध्यमार्गी रुढ़िवादी सीडीयू/सीएसयू और मध्यमार्गी समाजवादी पार्टी एसपीडी के नेताओं के बीच हुई लंबी बातचीत के बाद सीडीयू नेता मैर्त्स ने सुधारों का एलान किया. जर्मनी में यह गठबंधन पिछले वर्ष मई से सत्ता में है. लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति बनाने में उसे महीनों लग गए.

जर्मनी को फिर से तेज आर्थिक विकास की दौड़ में लाने वाला वादा कर सत्ता में आए मैर्त्स ने राजधानी बर्लिन में कहा, "हम लालफीताशाही कम करने पर काम कर रहे हैं. हम समाज कल्याण वाले अपने देश को बचाने पर काम कर रहे हैं, और हम टैक्स घटाकर कर्मचारियों और कंपनियों का बोझ कुछ कम कर रहे हैं."

किन क्षेत्रों में क्या क्या सुधार करेगी जर्मन सरकार

सुधार पैकेज में 10 अरब यूरो की आयकर राहत शामिल है. इसकी भरपाई सालाना 2.5 लाख यूरो से अधिक कमाने वालों पर और ज्यादा कर लगाकर की जाएगी. वित्त मंत्री, उप चांसलर और एसपीडी के नेता लार्स क्लिंगबाइल ने कहा, "इस देश के सबसे अधिक आय वाले लोग कर बोझ का बड़ा हिस्सा उठाएंगे. यह उचित है, ताकि देश आगे बढ़ सके."

गठबंधन का दावा है कि टैक्स राहत से एक औसत परिवार को सालाना करीब 600 यूरो का फायदा होगा.

जर्मन सरकार पेंशन व्यवस्था में भी बदलाव के प्रस्ताव पर भी सहमत हुई है. इसके तहत भविष्य में सेवानिवृत्ति की उम्र 67 वर्ष से आगे बढ़ेगी. रिटायरमेंट की उम्र में इजाफा औसत जीवन प्रत्याशा के अनुपात में किया जाएगा. 2024 से 2026 के बीच जर्मनी में पुरुषों की औसत जीवन प्रत्याशा 78.5 साल और महिलाओं की 83.2 साल दर्ज की गई है. अनुमान है कि 2050 तक यह चार साल और बढ़ जाएगी.

एक नजर जर्मनी में होने वाले सभी सुधारों पर

पेंशन

सरकार पेंशन आयोग की सिफारिशों को लागू करेगी. इसमें जर्मनी की मौजूदा पेंशन व्यवस्था में निवेश आधारित एक नया तत्व जोड़ना शामिल है. अभी यह व्यवस्था मुख्य रूप से कामकाजी लोगों व उनके न्योक्ता के वित्तीय योगदान पर आधारित है. अब इस पेंशन फंड का कुछ हिस्सा बाजार में निवेश किया जाएगा. इसके साथ ही आने वाले दशकों में रिटायरमेंट की उम्र भी धीरे धीरे बढ़ाई जाएगी.

इनकम टैक्स

कम और मध्यम आय वाले परिवारों को सालाना करीब 10 अरब यूरो की टैक्स राहत दी जाएगी. बहुत अधिक आय वाले लोगों पर टैक्स बढ़ाया जाएगा. शीर्ष इनकम टैक्स दर 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 47 प्रतिशत की जाएगी.

श्रम

उद्योग

सरकार रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन देगी. इनमें ऑटोमोबाइल, रसायन, दवाएं, बैटरी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वच्छ तकनीक शामिल हैं.

कल्याणकारी योजनाएं

सरकार कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई तेज करेगी. इसके लिए कई विभागों के बीच डाटा साझा करने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी. नियमों के पालन को भी और सख्ती से लागू किया जाएगा.

आवास

एक संघीय आवास कंपनी बनाई जाएगी. किफायती आवास परियोजनाओं को मदद दी जाएगी. मकान खरीदने के लिए ऋण हासिल करना भी आसान बनाया जाएगा.

नौकरशाही

कंपनियों से जुड़ी कागजी औपचारिकताएं और रिपोर्टिंग संबंधी जिम्मेदारियां कम की जाएंगी. अगर अधिकारी चार महीने के भीतर किसी आवेदन पर फैसला नहीं लेते, तो कुछ मामलों में उसे स्वीकृत माना जाएगा.

ऊर्जा

बिजली ग्रिड के विस्तार की प्रक्रिया तेज की जाएगी. उद्योगों को अधिक स्पष्ट से ग्रिड से जुड़ने की समय सीमा की जानकारी दी जाएगी.

व्यापार

यूरोपीय संघ के एंटी डंपिंग और एंटी सब्सिडी उपायों को मजबूत किया जाएगा. रणनीतिक क्षेत्रों में गैर यूरोपीय निवेश की अधिक गहन जांच की जाएगी.

सुधारों पर किसकी कैसी प्रतिक्रिया

जर्मनी के सबसे बड़े और कई देशों में ऑपरेट करने वाले, डॉयचे बैंक की सीनियर अर्थशास्त्री मारियोन म्युलबेर्गर ने सुधारों का स्वागत किया है. उन्होंने इसे "दशकों में सुधारों का सबसे बड़ा पैकेज" करार दिया है. म्युलबेर्गर के मुताबिक, यह सुधार दिखआते हैं कि सरकार के भीतर अहम संरचनात्मक सुधारों पर सहमत होने की काबिलियत है.

जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च, DIW इंस्टीट्यूट के प्रमुख मार्सेल फ्रात्सषेर इन सुधारों से बहुत गदगद नहीं दिखे. जर्मन अखबार राइनिषे पोस्ट से फ्रात्सषेर ने कहा, सुधार "एक बड़ी सफलता नहीं दिखाते हैं बल्कि ये एक सांकेतिक पैकेज है."

अब जर्मनी में कोई किसान क्यों नहीं बनना चाहता

पिछली सरकार में शामिल और अब विपक्ष में बैठी ग्रीन पार्टी ने श्रम सुधारों की आलोचना की है. पार्टी ने इसे "कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला" करार दिया है.

डॉक्टरों ने भी सिक लीव के लिए पहले ही चिकित्सकीय प्रमाणपत्र की दरकार की आलोचना की है. जर्मन मेडिकल एसोसिएशन के चैयरमैन मार्कुस ब्लूमथाल-बायर के मुताबिक, गठबंधन का यह फैसला "हमारे डॉक्टरों की प्रैक्टिस को बोझ के तले दबा देगा."

लेबर यूनियन वेर्डी ने भी चिकित्सकीय प्रमाणपत्र के प्रस्ताव को कर्मचारी और नियोक्ता के बीच भरोसे को तोड़ने वाला बताया है.

दबाब में जर्मन सरकार

इन सुधारों के जरिए सरकार दिखाना चाहती है कि वह लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है. साथ ही वह धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) की बढ़ती लोकप्रियता को कम करना चाहती है. एएफडी कई महीनों से देशव्यापी जनमत सर्वेक्षणों में शीर्ष पर चल रही है.

सितंबर में जर्मनी के चार पूर्वी राज्यों में विधानसभा और म्युनिसिपल चुनाव होने हैं. इनमें बर्लिन जैसे 'सिटी-स्टेट' के अलावा दो ऐसे राज्य शामिल हैं, जिनमें से कम से कम एक में पहली बार एएफडी की सरकार बनने की संभावना चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में सामने आ रही है. 2027 में भी पांच प्रांतों में चुनाव हैं. इस साल एएफडी के अच्छे प्रदर्शन का असर उन चुनावों पर भी दिख सकता है. जर्मनी में कुल 16 प्रांत हैं और 2026-2027 में इनमें से पांच राज्य अपनी स्थानीय सरकार चुनेंगे.


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