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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम, भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह पहुंचेगा वॉशिंगटन

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचने वाला है। राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्‍यापार समझौते को अंतिम रूप देने की द‍िशा में यह महत्‍वपूर्ण कदम है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम, भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह पहुंचेगा वॉशिंगटन
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नई द‍िल्‍ली। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचने वाला है। राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्‍यापार समझौते को अंतिम रूप देने की द‍िशा में यह महत्‍वपूर्ण कदम है।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीड‍िया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्ट कर कहा, ''भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचेगा। यह हमारे द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है।''

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार, अमेरिका पिछले एक साल से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि एक 'पारस्परिक व्यापार ढांचा' तैयार किया जा सके। इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर सामने आया है।

प‍िछले सप्‍ताह 17 मार्च को वित्त वर्ष 2027 के लिए बजट पर कांग्रेस सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा, “हम पिछले एक साल से भारतीयों के साथ काम कर रहे हैं। मैंने इस हफ्ते उनके राजदूत से भी मुलाकात की, ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।”

यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापक रणनीति के तहत टैरिफ का इस्तेमाल करके व्यापार समझौतों को अपने पक्ष में करने और व्यापार संबंधों को नए तरीके से बनाने की कोशिश कर रहा है।

ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है। अमेरिका कई देशों के साथ समझौते कर चुका है और अब अमेरिकी किसानों और उद्योगों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने पर काम कर रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी बड़ी समस्या हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की पकड़ कमजोर हुई है। उन्होंने कहा, “हमने सेब के बारे में कई बार बात की है। मैंने खुद यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है।”

अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत की ओर से सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो एक बड़ा उदाहरण है। इस वजह से अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी भारत के बाजार में काफी कम हो गई है। 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है। इस बीच ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

ग्रीर ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि एक ऐसा संतुलित समझौता हो, जिसमें अमेरिकी निर्यातकों को भी उन बाजारों में बराबर मौका मिले जहां भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।

उन्होंने कहा, “अगर भारत सेब आयात करता है तो हम चाहते हैं कि वह अमेरिका से भी सेब खरीदे।” साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका भारत के घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा है।


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