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- बांग्लादेश: अल्पसंख्यकों के संगठन ने हिंसक घटनाओं को लेकर जताई चिंता
- 'श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज' से वापस ली गई एमबीबीएस करवाने की अनुमति
- बांग्लादेश को जेएफ-17 फाइटर जेट बेचने के लिए बातचीत कर रहा पाकिस्तान
'श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज' से वापस ली गई एमबीबीएस करवाने की अनुमति
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने जम्मू-कश्मीर स्थित 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' से एमबीबीएस कोर्स करवाने की अनुमति वापस ले ली है. इसे बीते साल सितंबर में 50 सीटों के साथ एमबीबीएस कोर्स शुरू करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पात्रता के नियमों को पूरा ना कर पाने के चलते यह अनुमति 6 जनवरी, 2026 को वापस ले ली गई.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इस कॉलेज में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स को जम्मू-कश्मीर के अन्य चिकित्सा संस्थानों में दाखिला दिलवाया जाएगा. इससे वे अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर पाएंगे. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड ने कहा है कि इस कॉलेज में फैकल्टी की संख्या, मरीजों की संख्या और बुनियादी ढांचे में व्यापक कमियां पाई गई हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, मंगलवार, 6 जनवरी को जम्मू में हिंदू संगठनों ने इस कॉलेज को बंद करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था. उनका कहना था कि इसके 50 स्टूडेंट्स के पहले बैच में 40 से अधिक मुस्लिम स्टूडेंट्स को दाखिला दिया गया है. उनका तर्क था कि यह कॉलेज 'श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड' के द्वारा चलाया जाता है, इसलिए इसमें मुख्य तौर पर हिंदू स्टूडेंट्स को दाखिला मिलना चाहिए.
बांग्लादेश: अल्पसंख्यकों के संगठन ने हिंसक घटनाओं को लेकर जताई चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के एक संगठन ने चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई है. 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' ने मंगलवार, 6 जनवरी को एक बयान जारी कर कहा कि दिसंबर, 2025 में कम से कम 51 घटनाओं में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को निशाना बनाया गया, जिनमें हत्या के 10 मामले भी शामिल हैं.
परिषद के एक सदस्य काजल देबनाथ ने न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय उनके खिलाफ हुई घटनाओं से बेहद डरे हुए हैं. उन्होंने आगे कहा, "यह सरकार (अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसा के प्रति) बेहद उदासीन रही है." संगठन द्वारा जारी किए गए बयान में आगजनी, बलात्कार और लूट की घटनाओं का विवरण दिया गया है.
देबनाथ ने आशंका जताई कि हमलावर चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों को डराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने सरकार और चुनाव आयोग से कदम उठाने की अपील की. 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं. इन चुनावों में इस्लामी कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी, छात्र नेताओं द्वारा बनाई गई नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर लड़ रही है.



