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जर्मनी में जजों ने की न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने की मांग

जर्मनी में एएफडी के उभार के बीच न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठी है.

जर्मनी में जजों ने की न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने की मांग
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जर्मनी के जजों और सरकारी वकीलों ने चेतावनी दी है कि गठबंधन सरकार को सरकारी वकीलों से जुड़े कानूनों में सुधार करने की जरूरत है, ताकि ‘सरकार में मौजूद चरमपंथी’ कानूनी व्यवस्था का गलत इस्तेमाल न कर सकें.

जर्मन न्यायाधीशों के आधिकारिक संगठन ‘डॉयचर रिष्टरबुंड' (डीआरबी) ने केंद्र सरकार से कानून को और सख्त बनाने की अपील की है. उनका कहना है कि ऐसा करना जरूरी है, ताकि राज्य सरकारें आपराधिक मामलों को प्रभावित करने के लिए अभियोजन की शक्तियों का गलत इस्तेमाल न कर सकें.

डीआरबी के मुताबिक, इस बात की काफी संभावना है कि दक्षिणपंथी पार्टी ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) सैक्सनी-अनहाल्ट में सरकार बना लेगी, क्योंकि सितंबर की शुरुआत में पार्टी ने वहां शानदार जीत हासिल की. इससे यह डर पैदा हो गया है कि ‘सरकार में मौजूद चरमपंथी' ‘अपने निर्देशों के जरिए आपराधिक जांच को किसी खास दिशा में मोड़ सकते हैं.'

जर्मनी की खुफिया एजेंसियां खुद एएफडी के कई धड़ों को देश के लोकतंत्र के लिए खतरा मानती हैं. यह पार्टी पहली बार सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में सरकार बनाने जा रही है. इससे न्यायपालिका में यह चिंता बढ़ गई है कि पार्टी दक्षिणपंथी चरमपंथियों के खिलाफ मामलों की जांच कर रहे सरकारी वकीलों (अभियोजकों) पर दबाव बना सकती है.

डीआरबी के कार्यकारी निदेशक स्वेन रेबेन ने डीडब्ल्यू को ईमेल से भेजे अपने ब्यान में कहा, "अब सबसे पहली प्राथमिकता जर्मनी में सरकारी वकीलों के दफ्तरों को राजनीतिक फायदों के लिए इस्तेमाल होने से रोकना है. मौजूदा कानून के तहत, राज्य के कानून मंत्रालय व्यक्तिगत आपराधिक मामलों में भी दखल दे सकते हैं. हालांकि, सरकारी वकीलों को निर्देश देते समय संयम बरतने की एक राजनीतिक परंपरा रही है, लेकिन इस परंपरा को कभी भी तोड़ा जा सकता है और यह कोई ठोस सुरक्षा नहीं देती.”

स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते सरकारी वकील

कई अन्य देशों के विपरीत, जर्मनी में पुलिस और सरकारी वकील सरकार की कार्यपालिका यानी कार्यकारी शाखा का हिस्सा होते हैं. इस वजह से वे राज्य या केंद्र के गृह मंत्रालयों के अधीन आते हैं और उन पर संसद की निगरानी रहती है. कई संवैधानिक वकील इस निर्भरता को एक लोकतांत्रिक सिद्धांत मानते हैं, क्योंकि इसका मतलब है कि वकीलों के कामकाज की जांच एक चुनी हुई संसद कर सकती है. हालांकि, अन्य लोग इसे एक समस्या मानते हैं, क्योंकि इससे राजनीतिक दखल की आशंका पैदा होती है.

जर्मनी में केंद्र और सभी 16 राज्यों के गृह मंत्रालयों के पास व्यक्तिगत मामलों में सरकारी वकीलों को निर्देश देने का अधिकार है. उदाहरण के लिए, अगर किसी खुफिया एजेंसी ने कोई सबूत दिया है, तो गृह मंत्रालय सरकारी वकील को निर्देश दे सकता है कि वह उस तथ्य को अदालती मामले से बाहर रखे, क्योंकि उसे उजागर करने से एजेंसी का काम प्रभावित हो सकता है.

जर्मनी के पूर्वी राज्यों में क्यों सफल हो रही है एएफडी

जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ‘फेरफासुंग्सशुत्स' गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है. यह लंबे समय से एएफडी के निशाने पर रही है, क्योंकि पार्टी के सदस्य इसे राजनीति से प्रेरित मानते हैं. इस एजेंसी की जिम्मेदारी देश में चरमपंथी प्रवृत्तियों पर नजर रखने की है. इसी तरह, जर्मनी के न्याय मंत्रालय यह फैसला ले सकते हैं कि सरकारी वकील किसी खास कानून की व्याख्या कैसे करेंगे या जांच को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा.

ऐसा ही एक निर्देश 2015 में जारी किया गया था, जब तत्कालीन संघीय न्याय मंत्री हाइको मास ने संघीय अभियोजक को उस रिपोर्ट को वापस लेने के लिए कहा था जिसमें पाया गया था कि एक मामले में सरकारी गोपनीयता उजागर हुई थी. मास ने इस बात से इनकार कर दिया था कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश दिया था और इसके बाद हुए विवाद में संघीय अभियोजक हेराल्ड रेंज को बर्खास्त कर दिया गया था.

फिलहाल, मंत्रालयों के निर्देशों की जांच करने का कोई तरीका नहीं है, जिसे कुछ लोग समस्या मानते हैं. बर्लिन की राज्य अभियोजक मार्गरेट कॉपर्स भी इस मुद्दे पर कड़ी राय जाहिर करती हैं और वह इसे गंभीर खतरा मानती हैं. कॉपर्स के एक प्रवक्ता ने डीडब्ल्यू को ईमेल के जरिए बताया, "जब कानून का राजनीतिक दुरुपयोग होता है, तो कानून का शासन खतरे में पड़ जाता है. अगर हम उन यूरोपीय देशों पर नजर डालें जो अलग-अलग समय पर सत्तावादी-लोकलुभावन शासन के अधीन रहे हैं और जहां कानून के शासन के ढांचे को कमजोर किया गया, तो यह पता चलता है कि यह कोई काल्पनिक खतरा नहीं है.”

जब पोलैंड में धुर-दक्षिणपंथी ‘लॉ एंड जस्टिस' (पीआईएस) पार्टी सत्ता में आई, तो उसने संवैधानिक अदालत में अपने जज नियुक्त करने की कोशिश करके संवैधानिक संकट पैदा कर दिया था. हंगरी में विक्टर ओरबान सरकार ने भी न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी.

कौन क्या निर्देश दे रहा है, इसे पारदर्शी बनाया जाए

डीआरबी और कॉपर्स, दोनों को यही लगता है कि मंत्रालयों का निर्देश देने वाला यह हक बहुत पहले ही खत्म कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन कानूनी क्षेत्र के बाकी लोग इस बात पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं.

हैम्बर्ग में रहने वाली क्रिमिनल लॉयर ग्यूल पिनार ने कहा, "मैं इस डर को समझ सकती हूं कि अगर गलत लोगों के हाथ में ऐसी ताकत आ जाए, तो इससे कार्यपालिका के लिए खतरा पैदा हो सकता है.” पिनार ने 2020 में जर्मन संसद ‘बुंडेस्टाग' में इस मुद्दे पर विशेषज्ञ के तौर पर अपनी बात रखी थी.

पिनार का कहना है कि सुधार जरूरी है और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मंत्रालयों के निर्देशों का कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं होता है. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "जिन लोगों पर आपराधिक कार्यवाही होती है, उन्हें पता ही नहीं होता कि सरकारी वकीलों की ओर से उठाए गए कुछ कदम सरकार, संघीय अभियोजकों या गृह मंत्रालय के किसी निर्देश के नतीजे हैं.”

पिनार ने कहा कि अगर निर्देशों को लिखित रूप में दर्ज किया जाए, तो वकीलों के लिए यह जांचना संभव होगा कि वे कानूनी रूप से सही थे या उन्होंने अपने अधिकारों का उल्लंघन किया था. उन्होंने कहा, "जो कुछ हो रहा है, उसकी जांच करने के लिए हमें नए तंत्र या तरीके अपनाने होंगे.”

बतौर पिनार, "लेकिन इसका समाधान यह नहीं है कि सरकारी वकीलों को पूरी तरह स्वतंत्र बना दिया जाए. न्यायपालिका में शायद ही किसी को इस बात पर शक हो कि निर्देश जारी करने का अधिकार लोकतंत्र के सिद्धांत से आता है.” हालांकि, उन्होंने आगे यह भी कहा कि कई लोग, खासकर जज और सरकारी वकील, एक स्वतंत्र सरकारी अभियोजन सेवा की वकालत करते हैं.

मौजूदा केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. ‘लीगल ट्रिब्यून ऑनलाइन' को दिए एक बयान में, संघीय न्याय मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा कानूनों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं: मंत्रालयों को ‘गैर-कानूनी' निर्देश जारी करने और वकीलों को ऐसे निर्देशों का पालन करने से मना किया गया है.

मंत्रालय के मुताबिक, असल में वकीलों को कार्यकारी शाखा के तहत रखना जरूरी है, क्योंकि इससे वे ज्यादा जवाबदेह होते हैं और उन पर संसद की निगरानी रहती है.

यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट से जुड़ी समस्या

जर्मनी के सरकारी वकीलों की यह अनोखी स्थिति पहले भी यूरोपीय स्तर पर सामने आ चुकी है: 2019 में, यूरोपीय न्यायालय ने चेतावनी दी थी कि राजनीतिक प्रभाव के कारण यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि जर्मनी के सरकारी वकील उतने स्वतंत्र नहीं थे. नियम के मुताबिक, यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट सरकारी वकीलों की ओर से जारी किए जाने चाहिए, लेकिन जर्मनी में सिर्फ जज ही इन्हें जारी कर सकते हैं.

पिनार ने कहा कि सरकारी वकीलों को गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनुमति देना "हमारी कानून व्यवस्था के हिसाब से सही नहीं है.” उन्होंने कहा, "सच तो यह है कि जर्मन सिस्टम लोगों की आजादी की बेहतर सुरक्षा करता है. जर्मनी में, किसी की आजादी छीनने का फैसला हमेशा जज के हाथ में होता है. मुझे लगता है कि यह बेहतर होगा कि अन्य देश अपनी प्रणालियों को हमारे मुताबिक ढालें, ताकि आजादी के बारे में फैसला कार्यपालिका ले सकती हो, लेकिन वह किसी जज की निगरानी या उसके अधिकार क्षेत्र में हो.”


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