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इटली के रक्षा मंत्री बोले-रक्षा खर्च पर नहीं कोई टकराव, सहयोग और सुरक्षा पर जोर

इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने रविवार को अंकारा में होने वाले नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) समिट को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा क‍ि अंकारा शिखर सम्मेलन को इस तरह तैयार किया गया है कि सब कुछ ठीक से चले, सभी वादों का पालन हो और हर देश यह दिखाए कि उसने अपना हिस्सा पूरा किया है

इटली के रक्षा मंत्री बोले-रक्षा खर्च पर नहीं कोई टकराव, सहयोग और सुरक्षा पर जोर
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रोम। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने रविवार को अंकारा में होने वाले नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) समिट को लेकर उम्मीद जताते हुए कहा क‍ि अंकारा शिखर सम्मेलन को इस तरह तैयार किया गया है कि सब कुछ ठीक से चले, सभी वादों का पालन हो और हर देश यह दिखाए कि उसने अपना हिस्सा पूरा किया है। उन्होंने वीडियो के जरिए 'पेंटेलेरिया मेडिटेरेनियो डी'ऑटोर' कार्यक्रम में यह बात कही।

अमेरिका के साथ संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि “अमेरिका के साथ असली रिश्ते बहुत अच्छे हैं, जैसे एक साल पहले या पांच साल पहले थे।” उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत लगातार संस्थागत स्तर पर चलती रहती है।

इटैलियन न्यूज एजेंसी एडनक्रोनोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के बारे में उन्होंने कहा, “ट्रंप की अपनी राजनीति करने की शैली है, जिसमें वह सहयोगी देशों पर दबाव डालते हैं।” यह उनका तरीका है जिससे सहयोगी प्रतिक्रिया दें।

रक्षा खर्च के मुद्दे पर क्रोसेटो ने कहा कि रक्षा खर्च और सामाजिक खर्चों में कोई टकराव नहीं है। उन्होंने कहा क‍ि मैंने कभी नहीं सोचा कि रक्षा खर्च स्वास्थ्य, संस्कृति और कल्याण के विकल्प के रूप में होना चाहिए। बिना रक्षा के न सुरक्षा है और न ही सामाजिक खर्च संभव है। उन्होंने गठबंधनों के महत्व पर भी जोर दिया।

अंतरराष्ट्रीय हालात पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से तकनीक, कच्चे माल, रेयर अर्थ्स और ऊर्जा को लेकर होगी।

उन्होंने कहा कि इस स्थिति में इटली, जर्मनी और जापान ऐसे देश हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित हुए थे और जिनके संविधान युद्ध रोकने के लिए बनाए गए थे। इसलिए ये देश दूसरे देशों की तरह सीधे युद्ध की घोषणा नहीं कर सकते, बल्कि उन्हें गठबंधनों या अंतरराष्ट्रीय मंजूरी के तहत काम करना पड़ता है।

अमेरिकी ठिकानों से इटली में उड़ानों को लेकर हुए विवादों पर मंत्री ने कहा कि ये ऐसे विवाद थे जिन्हें टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि जहां जरूरी था, वहां इस सरकार ने ‘ना’ भी कहा है।

उनके अनुसार, ऐसे मुद्दे कभी-कभी अमेरिका के साथ रिश्तों में गलत संदेश दे सकते हैं और द्विपक्षीय संबंधों को मदद नहीं करते।


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