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ईरान-अमेरिका समझौते पर इजरायल की नाराजगी, सुरक्षा जोखिमों को लेकर विवाद

इजरायल के नेता अमेर‍िका और ईरान के बीच हुए समझौते के पक्ष में नहीं द‍िख रहे हैं। इजरायली नेताओं ने ईरान के साथ अमेरि‍का के समझौते की कड़ी आलोचना की है

ईरान-अमेरिका समझौते पर इजरायल की नाराजगी, सुरक्षा जोखिमों को लेकर विवाद
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वॉशिंगटन। इजरायल के नेता अमेर‍िका और ईरान के बीच हुए समझौते के पक्ष में नहीं द‍िख रहे हैं। इजरायली नेताओं ने ईरान के साथ अमेरि‍का के समझौते की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह समझौता सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों को पूरी तरह हल नहीं करता, जबकि वॉशिंगटन इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहा है।

यह आलोचना ऐसे समय में सामने आई है, जब समझौते की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और दुनिया के नेता इस हफ्ते फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में इसके असर पर चर्चा करने की तैयारी कर रहे हैं।

द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इस समझौते को लेकर इजरायल के लगभग सभी राजनीतिक दलों में चिंता है। अधिकारियों को डर है कि इससे ईरान की सरकार और उसके परमाणु कार्यक्रम का कुछ हिस्सा जस का तस बना रह सकता है।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों की खास चिंता यह है कि समझौते में कई विवादित मुद्दों पर फैसला आगे के लिए टाल दिया गया है। इनमें ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार का भविष्य और उसके परमाणु कार्यक्रम पर लंबे समय तक लागू रहने वाली पाबंदियां शामिल हैं।

इस मुद्दे ने ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच नए मतभेद भी सामने ला दिए हैं। दोनों नेताओं के बीच अब तक काफी करीबी संबंध रहे हैं।

द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू को 'काफी मुश्किल व्यक्ति' बताया और कहा कि कुछ मौकों पर इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को और जटिल बना दिया था।

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, कुछ इजरायली नेताओं ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने ईरान से मजबूत और स्पष्ट गारंटी लिए बिना ही समझौते की दिशा में बहुत तेजी दिखाई। कुछ नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ईरान भविष्य में अपने वादों का पालन करेगा या नहीं। उन्होंने ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखने की मांग की।

न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की सैन्य कार्रवाई और नौसैनिक नाकाबंदी की वजह से ही ईरान दोबारा बातचीत की मेज पर आया। उनका दावा था कि इस समझौते से क्षेत्र की सुरक्षा बेहतर होगी।


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