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इजरायली सेना प्रमुख और वरिष्ठ अफसरों की यूएई में युद्ध के दौरान हुईं गुप्त बैठकें : इजरायली सरकारी मीडिया

इजरायली सेना के प्रमुख इयाल जमीर और दूसरे सीनियर अफसरों ने ईरान के साथ हाल ही में हुए युद्ध के दौरान चुपके से यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) का दौरा किया

इजरायली सेना प्रमुख और वरिष्ठ अफसरों की यूएई में युद्ध के दौरान हुईं गुप्त बैठकें : इजरायली सरकारी मीडिया
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जेरूसलम। इजरायली सेना के प्रमुख इयाल जमीर और दूसरे सीनियर अफसरों ने ईरान के साथ हाल ही में हुए युद्ध के दौरान चुपके से यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) का दौरा किया। यह जानकारी शुक्रवार को इजरायल के सरकारी कान टीवी न्यूज ने दी।

चैनल के अनुसार, इस यात्रा के दौरान जमीर ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और कुछ वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की।

हालांक‍ि, चैनल ने यह नहीं बताया कि यह यात्रा किस तारीख को हुई। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था और आठ अप्रैल को संघर्षविराम के साथ खत्म हुआ था।

बुधवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया था कि उन्होंने भी इस युद्ध के दौरान यूएई का गुप्त दौरा किया और वहां राष्ट्रपति से मुलाकात की। लेकिन, यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेतन्याहू के देश में आने की बात सही नहीं है।

इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया और घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख डेविड जि‍नी ने भी इसी दौरान यूएई का गुप्त दौरा किया था।

कान टीवी ने यह भी कहा कि ये सभी यात्राएं इजरायल और यूएई के बीच बढ़ते संबंधों की ओर इशारा करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में यूएई, इजरायल का एक अहम क्षेत्रीय साझेदार बन गया है, खासकर उन सामान्यीकरण समझौतों के बाद जिन्हें अब्राहम समझौते के तहत किया गया था। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, पर्यटन और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है, हालांकि क्षेत्र में कभी-कभी तनाव भी बना रहता है।

हालांकि, नेतन्याहू की कथित गुप्त यात्रा यह संकेत देती है कि बातचीत अब सिर्फ सामान्य कूटनीतिक संबंधों से आगे बढ़ चुकी हो सकती है।

क्षेत्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इन बैठकों में सुरक्षा समन्वय, क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक साझेदारी और पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक हालात जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई होगी।

इजरायल के राजनीतिक विश्लेषकों ने इस घटनाक्रम को हाल के महीनों में नेतन्याहू द्वारा उठाए गए सबसे संवेदनशील कूटनीतिक कदमों में से एक बताया है।


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