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इजरायल में राजनीतिक उठापटक थमी: गादी आइसेनकोट के नेतृत्व में नई सरकार का रास्ता साफ

120 सदस्यीय इजरायली संसद 'नीसेट' में सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 61 सांसदों के बहुमत की आवश्यकता होती है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और समर्थन पत्रों के आदान-प्रदान के बाद गादी आइसेनकोट के पाले में कुल 67 सांसदों का समर्थन आ गया है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है।

इजरायल में राजनीतिक उठापटक थमी: गादी आइसेनकोट के नेतृत्व में नई सरकार का रास्ता साफ
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यरुशलम: इजरायल की राजनीति में पिछले एक हफ्ते से जारी भारी उहापोह और अनिश्चितता के बाद आखिरकार गुरुवार देर शाम नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। मध्यमार्गी गठबंधन के नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट (Gadi Eisenkot) को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल हो गया है। इस राजनीतिक फेरबदल के साथ ही देश में सबसे लंबे समय तक यानी लगभग 19 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू का सत्ता से बाहर होना तय हो गया है।

आइसेनकोट को 67 सांसदों का मजबूत समर्थन

120 सदस्यीय इजरायली संसद 'नीसेट' में सरकार बनाने के लिए न्यूनतम 61 सांसदों के बहुमत की आवश्यकता होती है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और समर्थन पत्रों के आदान-प्रदान के बाद गादी आइसेनकोट के पाले में कुल 67 सांसदों का समर्थन आ गया है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है।

चुनाव परिणाम: 27 अक्टूबर को हुए आम चुनावों में आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन के 48 प्रत्याशी विजयी हुए थे।

अरब पार्टियों का समर्थन: गुरुवार को 11 सांसदों वाले अरब पार्टियों के गठबंधन 'ज्वाइंट लिस्ट' के नेताओं ने राष्ट्रपति आइजक हरजोग (Isaac Herzog) से मुलाकात कर गादी आइसेनकोट को समर्थन देने का आधिकारिक पत्र सौंप दिया।

राएम पार्टी की भूमिका: इसके अलावा, 8 सांसदों वाली अरब पार्टी 'राएम' पहले ही प्रधानमंत्री पद के लिए आइसेनकोट को समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है। इन दोनों अरब गठबंधनों के समर्थन से आइसेनकोट का आंकड़ा 67 तक पहुंच गया है।

नेतन्याहू का सत्ता से बाहर होना

इजरायल की राजनीति में दशकों तक दबदबा रखने वाले बेंजामिन नेतन्याहू इस बार नई सरकार के गठन के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा जुटाने में बुरी तरह असफल रहे।

कम सीटें और समर्थन का अभाव: 27 अक्टूबर के चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिली थीं, लेकिन चुनाव के बाद किसी भी अन्य दल ने उन्हें समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया।

गठबंधन में फूट: राजनीतिक संकट उस समय और गहरा गया जब गुरुवार को नेतन्याहू के गठबंधन में शामिल सात सांसदों वाली पार्टी 'यूनाइटेड टोरा जूडिज्म' (UTZ) ने गठबंधन से अलग होने और संसद में स्वतंत्र रूप से बैठने की घोषणा कर दी।

घटकर हुए 46 सांसद: यूटीजेड के अलग होने के बाद अब नेतन्याहू के पास केवल 46 सांसद ही बचे हैं, जिसके चलते उनके पास सत्ता में बने रहने का कोई मौका नहीं बचा है।

समझौते की शर्तें और वैकल्पिक सरकार की नीतियां

गुरुवार को ज्वाइंट लिस्ट के वरिष्ठ नेता अहमद तीबी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य किसी भी कीमत पर नेतन्याहू सरकार को सत्ता से हटाना है। इसके बाद ज्वाइंट लिस्ट के नेताओं ने गादी आइसेनकोट के साथ लंबी बैठक की और एक वैकल्पिक सरकार की नीतियों और साझा एजेंडे पर सहमति बनाई।

आइसेनकोट की प्रमुख शर्तें और नीतियां

यहूदी राष्ट्र और लोकतंत्र: इजरायल को आधिकारिक रूप से एक यहूदी राष्ट्र मानते हुए पूरी तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत देश का संचालन किया जाएगा।

हमास के खिलाफ सख्त रुख: फिलिस्तीनी संगठन हमास को एक खतरनाक आतंकी संगठन मानते हुए उसकी पूरी सैन्य शक्ति को नेस्तनाबूद किया जाएगा।

सैनिक भर्ती नियमों में बदलाव: देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेना में सभी नागरिकों की भर्ती के नियमों में उचित संशोधन किए जाएंगे।

नागरिक अधिकार: देश के गठन के समय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए जो आचार संहिता तय की गई थी, उसका पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाएगा।

इन तमाम राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन से जुड़ी शर्तों पर सहमति बनने के बाद ही अरब पार्टियों के नेताओं ने राष्ट्रपति आवास जाकर राष्ट्रपति आइजक हरजोग को समर्थन पत्र सौंपा।

आगे की राह

उल्लेखनीय है कि 'ज्वाइंट लिस्ट' में मुख्य रूप से तीन प्रमुख अरब पार्टियां हदाश, ताल और बलद शामिल हैं, जबकि राएम पार्टी ने इस बार अलग होकर चुनाव लड़ा था। इसके बावजूद, देशहित और राजनीतिक स्थिरता के मुद्दे पर इन सभी दलों का एक मंच पर आना इजरायल के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ है। राष्ट्रपति आइजक हरजोग अब औपचारिक रूप से गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिससे देश में एक नई स्थिर सरकार के गठन का रास्ता प्रशस्त हो गया है।


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