ईरान-अमेरिका तनाव: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ खत्म, लेकिन शांति दूर
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ समाप्त हो चुका है

- होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया हमले, कार्गो जहाज निशाना बना; मिसाइल या ड्रोन से हमला स्पष्ट नहीं।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का ऐलान किया।
- करीब 23 हजार नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंसे, स्थिति गंभीर।
- रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ: अमेरिका शांतिपूर्ण तरीके से जहाज निकालना चाहता है, लेकिन कार्रवाई के लिए तैयार।
- संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर हमलों का आरोप लगाया, ईरान ने इनकार किया।
- युद्धविराम जारी है, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को घोषणा की कि ईरान के खिलाफ चलाया गया सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह अभियान अपने सभी लक्ष्यों को पूरा करने के बाद खत्म किया गया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि संघर्षविराम की स्थिति अभी भी नाजुक है और शांति की राह लंबी है।
रुबियो ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका अब “रक्षात्मक” रुख अपनाएगा। उनका कहना था कि अमेरिका किसी नए युद्ध की स्थिति नहीं चाहता, बल्कि प्राथमिकता होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले व्यापारिक मार्ग को फिर से खोलने की है। यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, लेकिन हालिया टकरावों के चलते यहां आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
होर्मुज में तनाव बरकरार
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हाल ही में एक कार्गो जहाज पर हमला हुआ है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमला मिसाइल से हुआ या ड्रोन से। अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत जहाजों को सुरक्षा देने का दावा किया था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ घंटे पहले ही इस ऑपरेशन को स्थगित कर दिया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण तरीके से जहाजों को बाहर निकालना चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए तैयार है। अब तक केवल दो जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाए हैं, जबकि कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
रुबियो ने बताया कि करीब 23 हजार नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनकी स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह जलडमरूमध्य को बंद रखकर वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव की उम्मीद
अमेरिका को उम्मीद है कि चीन ईरान पर दबाव बनाएगा ताकि वह जलडमरूमध्य को खोले। रुबियो ने कहा कि इस संकट से चीन की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि उसका व्यापार इस मार्ग पर निर्भर है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई देश मदद करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त सैन्य क्षमता नहीं है। ऐसे में जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा अमेरिका पर ही है।
संघर्षविराम फिलहाल जारी है, लेकिन हालात पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर हमलों का आरोप लगाया है, जबकि ईरान ने इन आरोपों से इनकार किया है। कुल मिलाकर, युद्ध भले ही धीमा पड़ा हो, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है और शांति की राह कठिन दिख रही है।


