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ईरान शांति वार्ता: कतर और पाकिस्तान की भूमिका पर अमेरिका में उठे सवाल, सीनेटरों ने जताई चिंता

अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के दो सीनेटरों ने ईरान के साथ युद्धविराम बातचीत में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाए

ईरान शांति वार्ता: कतर और पाकिस्तान की भूमिका पर अमेरिका में उठे सवाल, सीनेटरों ने जताई चिंता
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वॉशिंगटन। अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के दो सीनेटरों ने ईरान के साथ युद्धविराम बातचीत में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दोनों देशों पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

सीनेटर रिक स्कॉट ने कतर और पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया और कहा कि हाल की घटनाओं से यह साफ हो गया है कि 'असल में हमारे दोस्त कौन हैं।'

फ्लोरिडा के सीनेटर स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "अब तक सबको समझ आ जाना चाहिए कि हमारे असली दोस्त कौन हैं। कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है। इस समय वे एक सही और स्थायी शांति हासिल करने से ज्यादा ईरान के दशकों पुराने आतंकवादी अभियान को बढ़ावा देने में लगे हुए दिख रहे हैं।"

उन्होंने कहा, " अभी भी एक ऐसे समझौते की गुंजाइश है जिससे सभी को फ़ायदा हो। हालाँकि, सभी को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि इस प्रक्रिया से ईरान के परमाणु हथियार बनाने की संभावना ज़ीरो है।"

वहीं, मोंटाना से रिपब्लिकन सीनेटर टिम शीही ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने अल-कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को छिपाया था। उन्होंने कतर पर आतंकवादी संगठनों के लिए पैसे के लेन-देन में मदद करने का आरोप लगाया।

फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स' में बातचीत के दौरान शीही ने कहा कि बातचीत की मेज पर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यूएई और इजरायल के साथ पूरी तरह खड़ा रहना चाहिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थ बनने से परेशानी है, तो शीही ने कहा, "हां, मुझे समस्या है। कतर और पाकिस्तान की इसमें भूमिका हो सकती है, लेकिन अगर वे बातचीत की मेज पर होंगे, तो यूएई, सऊदी अरब और इजरायल को भी वहां होना चाहिए। क्योंकि कतर पर दशकों से आतंकवादी संगठनों के लिए पैसे की व्यवस्था करने के आरोप लगते रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हमारे खिलाफ विद्रोही संगठनों को मदद दी और बिन लादेन को छिपाया। इसलिए यह मान लेना कि वे निष्पक्ष मध्यस्थ होंगे, सही नहीं लगता।"

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को यूएई और इजरायल का बिना किसी शर्त समर्थन करना चाहिए, क्योंकि क्षेत्र में जो भी स्थिति बनेगी, वे अमेरिका के महत्वपूर्ण सहयोगी रहेंगे। दोनों अमेरिकी सीनेटरों के ये बयान ऐसे समय आए हैं, जब कतर और पाकिस्तान ने स्विट्जरलैंड में हुई अमेरिका-ईरान बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।

सोमवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई हालिया बातचीत में समझौते को लागू करने के तरीकों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने तकनीकी और विशेषज्ञ स्तर की बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है ताकि युद्ध खत्म करने वाले समझौते को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल युद्ध खत्म करने से जुड़े समझौते के प्रावधानों को लागू करने पर चर्चा करने के बाद लौट रहा है।


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