अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद भारतीय शेयर बाजार उछला
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गए.

अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद भारतीय शेयर बाजार उछला
अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को जोरदार शुरुआत की. इस दौरान प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब दो प्रतिशत की बढ़त के साथ खुले और बाजार में सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली.
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,910.94 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 417.45 अंक या 1.74 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और वह 24,378.05 के स्तर पर खुला. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गए.
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रैटिक पार्टी ने जीत हासिल की है. डेमोक्रैट्स अमेरिकी संसद के दोनों सदनों- सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में बहुमत में आ गए हैं. इसे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और यह उम्मीद भी बंधी है कि इससे ईरान युद्ध जल्दी समाप्त हो सकता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की वैश्विक टैरिफ नीति और ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के फैसले ने इस साल भारतीय शेयर बाजार के खराब प्रदर्शन में योगदान दिया है. लेकिन अब विदेशी निवेशकों के भारत लौटने के संकेतों ने बाजार को हिम्मत दी है. आंकड़ों के मुताबिक, 4 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने 72 अरब रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे हैं.
ईरान की मदद करने के आरोप में अमेरिका ने भारतीय कंपनियों पर लगाए प्रतिबंध
अमेरिका के वित्त विभाग ने बुधवार को भारत और तुर्की में स्थित कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए. ये प्रतिबंध ईरान की मदद करने के आरोप में लगाए गए हैं. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह ईरानी सरकार का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा. ये प्रतिबंध ट्रंप प्रशासन के "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" का हिस्सा हैं.
अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा कि उन्होंने भारत में रहने वाले सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और दो अन्य लोगों द्वारा चलाए जा रहे "विशाल आपराधिक नेटवर्क" के खिलाफ कार्रवाई की. विभाग ने कहा कि सुनील कुमार शर्मा से जुड़ी नौ अन्य कंपनियों को भी कार्रवाई में निशाना बनाया गया.
विभाग ने अपने बयान में आरोप लगाया कि इनकी योजनाओं ने ईरानी पेट्रोलियम के ट्रांसपोर्ट में शामिल प्रतिबंधित जहाजों को फर्जी झंडे और प्रमाणपत्र उपलब्ध करवाए. फर्जी झंडे और नकली समुद्री प्रमाणपत्र जहाजों को अवैध गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति देते हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण नियमों से बच निकलते हैं.
अमेरिका ने तुर्की में स्थित फ्यूगो ग्राउंड सर्विसेज पर भी प्रतिबंध लगाया है. इस कंपनी पर ईरान के उड्डयन क्षेत्र में मदद करने का आरोप है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी सरकार तेहरान का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी.
पंजाब में पराली जलाने की 2,347 घटनाएं दर्ज की गईं: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
पंजाब में धान की कटाई के मौसम के दौरान, पराली जलाने की घटनाएं प्रशासन के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की 4 नवंबर, 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन मामलों में विभाग द्वारा 40.37 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से अब तक 23.05 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं.
न्यूज एजेंसी एएनआई ने पीपीसीबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 647 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 689 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, तरन तारन जिले में सबसे अधिक 558 पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं. इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207 और बठिंडा जिले में 167 घटनाएं दर्ज की गई हैं.
पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में धान के कुल 32.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में से 85.10 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद, पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. विभागीय आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन निरीक्षण कर रहा है, जुर्माना लगा रहा है, एफआईआर दर्ज कर रहा है और अन्य कार्रवाई कर रहा है. लेकिन खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से रोकना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी जरूरी, नहीं तो रिहाई: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की संवैधानिक समयसीमा उस पल से शुरू होगी जब उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता वास्तव में सीमित कर दी जाती है, न कि औपचारिक रूप से गिरफ्तारी दर्ज किए जाने के समय से. अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद इस अवधि को मनमाने ढंग से नहीं बढ़ा सकती.
जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(2) के संदर्भ में ‘हिरासत’ और ‘गिरफ्तारी’ के बीच कृत्रिम अंतर नहीं किया जा सकता. बेंच ने कहा कि यदि पुलिस औपचारिक गिरफ्तारी से पहले की हिरासत की अवधि को 24 घंटे की गणना से बाहर रखती है, तो यह संवैधानिक प्रावधानों की भावना के विपरीत होगा.
अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए बिना हिरासत में रखा जाता है, तो उसे रिहा किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा, “यह मानना कि 24 घंटे की अवधि केवल औपचारिक गिरफ्तारी के बाद शुरू होती है, संविधान के अनुच्छेद 22(2) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 56 के प्रावधानों के विपरीत है.”
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने कहा, पुलिस ने उन पर आरएसएस को बदनाम करने का आरोप लगाया
भारत के दो प्रमुख डिजिटल राइट्स और फ्री स्पीच ग्रुप्स ने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से उनके अकाउंट हटाने के लिए कहा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने अपने बयान में कहा है कि पुलिस ने आरोप लगाया है कि इन ग्रुप्स ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) को बदनाम किया है.
आईएफएफ ने अपने बयान में कहा कि दिल्ली पुलिस ने इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन और सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर के एक्स अकाउंटों को हटाने के लिए नोटिस भेजे हैं. डीडब्ल्यू स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं कर सका है. आरएसएस, दिल्ली पुलिस और एक्स ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया है.
आईएफएफ ने कहा है कि अगर इन नोटिसों को वापस नहीं लिया जाता तो वह अदालत में इन्हें चुनौती देंगे. वहीं, एसएफएलसी.इन ने इन अनुरोधों को गैरकानूनी और असंगत बताया है. ये दोनों ग्रुप अपने अकाउंटों पर डिजिटल अधिकारों की वकालत करते हैं और सरकारी आदेशों की वजह से विभिन्न लोगों की पोस्ट या अकाउंट हटाए जाने की जानकारी साझा करते हैं.
चांदनी चौक में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गिरी, दो लोगों की मौत
दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में गुरुवार, 4 नवंबर की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जब चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास शीश महल स्थित गली सत्तारा में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई. हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया. दमकल विभाग को सुबह करीब 9:50 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद कई दमकल गाड़ियों, क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल और इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम को मौके पर भेजा गया. अधिकारियों के अनुसार, इमारत निर्माणाधीन थी और इसके ढहने के कारणों की जांच की जा रही है.
स्थानीय निवासी मोहम्मद नईम ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए. उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोगों को लगा कि उनका घर गिर रहा है, लेकिन बाद में पता चला कि पास में बन रही इमारत ढह गई है. इस बीच आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने घटना को लेकर दिल्ली सरकार और एमसीडी पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार कराए जाने वाले सुरक्षा ऑडिट के बावजूद इमारतें गिर रही हैं और संबंधित विभागों में भ्रष्टाचार के कारण निर्माण नियमों का सही पालन नहीं हो रहा है.


