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अमेरिका में जनगणना प्रस्ताव पर ट्रंप प्रशासन को घेरेंगे भारतीय-अमेरिकी सांसद

अमेरिका में जनगणना से जुड़े प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पांच भारतीय-अमेरिकी सांसदों समेत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 150 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने प्रशासन से उस प्रस्तावित नियम को वापस लेने की मांग की है, जिसके तहत कुछ गैर-अमेरिकी नागरिकों को उन जनसंख्या आंकड़ों से बाहर रखा जाएगा, जिनके आधार पर कांग्रेस में राज्यों की सीटें निर्धारित होती हैं।

अमेरिका में जनगणना प्रस्ताव पर ट्रंप प्रशासन को घेरेंगे भारतीय-अमेरिकी सांसद
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वाशिंगटन। अमेरिका में जनगणना से जुड़े प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पांच भारतीय-अमेरिकी सांसदों समेत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 150 से अधिक डेमोक्रेटिक सांसदों ने प्रशासन से उस प्रस्तावित नियम को वापस लेने की मांग की है, जिसके तहत कुछ गैर-अमेरिकी नागरिकों को उन जनसंख्या आंकड़ों से बाहर रखा जाएगा, जिनके आधार पर कांग्रेस में राज्यों की सीटें निर्धारित होती हैं।

भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, सुहास सुब्रमण्यम और श्री थानेदार ने इस संबंध में सार्वजनिक टिप्पणी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। 'कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस' ने इसकी जानकारी दी।

इस अभियान का नेतृत्व प्रतिनिधि सभा की निगरानी एवं सरकारी सुधार समिति में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सदस्य रॉबर्ट गार्सिया ने किया। उनके साथ एशियन पैसिफिक अमेरिकन, हिस्पैनिक, ब्लैक और इक्वैलिटी कॉकस के अध्यक्ष भी शामिल रहे।

गार्सिया ने कहा, ''हम कांग्रेस और अदालतों में इस नियम का विरोध करेंगे।''

सांसदों का तर्क है कि प्रस्ताव अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की भावना और प्रावधानों के खिलाफ है। इस संशोधन के तहत राज्यों में प्रतिनिधित्व वहां की कुल आबादी के आधार पर निर्धारित किया जाता है। सांसदों ने कहा कि जनसांख्यिकीय आंकड़ों से जुड़े सवालों पर प्रतिबंध लगाने से मतदान अधिकारों और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं भी कमजोर होंगी।

एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस की अध्यक्ष ग्रेस मेंग ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से अल्पसंख्यक समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उनके लिए उपलब्ध संसाधन प्रभावित हो सकते हैं। इससे विभिन्न समुदायों के बीच असमानताओं की पहचान करने के लिए जरूरी आंकड़े भी कमजोर पड़ेंगे।

अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के प्रस्ताव के तहत स्थायी निवासियों यानी ग्रीन कार्ड धारकों को उन जनसंख्या आंकड़ों में शामिल रखा जाएगा, जिनके आधार पर कांग्रेस में सीटों का बंटवारा होता है। हालांकि, बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों और ग्रीन कार्ड से कम स्थायी कानूनी दर्जा रखने वाले गैर-अमेरिकी नागरिकों को इससे बाहर करने का प्रस्ताव है। इनमें अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोग भी शामिल हैं।

प्रस्ताव में जनगणना प्रश्नावली से नस्ल, जातीयता और सैक्सुअल ओरिएंटेशन से जुड़े सवालों को भी हटाने की बात कही गई है। हालांकि, यह प्रतिबंध अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे और उन अन्य सर्वेक्षणों पर लागू नहीं होगा, जिनका उद्देश्य कुल आबादी की गणना करना नहीं है।

जनगणना ब्यूरो का तर्क है कि कांग्रेस में प्रतिनिधित्व के लिए यह तय करने में अमेरिका में स्थायी निवास और देश के प्रति निष्ठा को आधार बनाया जाना चाहिए कि किन लोगों को संबंधित जनसंख्या आंकड़ों में शामिल किया जाए। एजेंसी लोगों की कानूनी स्थिति निर्धारित करने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल पर विचार कर रही है। साथ ही, जनगणना फॉर्म में कानूनी स्थिति से जुड़ा सवाल जोड़ने को लेकर भी जनता से सुझाव मांगे गए हैं।

दूसरी ओर, इलिनॉय की रिपब्लिकन सांसद मैरी मिलर ने शुक्रवार को इस प्रस्ताव के समर्थन में एक अलग पत्र जारी किया। उन्होंने ट्रंप प्रशासन से इससे भी आगे बढ़ते हुए सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों, यहां तक कि ग्रीन कार्ड धारकों को भी कांग्रेस में सीटों के बंटवारे के लिए इस्तेमाल होने वाली आबादी से बाहर रखने की मांग की।

मिलर के समूह ने अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे में भी जनसांख्यिकीय सवालों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, जो जनगणना ब्यूरो के मौजूदा प्रस्ताव से आगे की बात है। उनका तर्क है कि कांग्रेस में प्रतिनिधित्व का निर्धारण केवल अमेरिकी नागरिकों के आधार पर होना चाहिए।

इस बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स ने शुक्रवार को प्रकाशित अपनी टिप्पणी में प्रस्ताव पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया और राज्यों के साथ परामर्श के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। संगठन ने कहा कि जनगणना के आंकड़े चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे के अनुमान तथा प्रशासनिक रिकॉर्ड जनगणना की विस्तृत गणना का पर्याप्त विकल्प नहीं हो सकते।

संगठन ने आगाह किया कि राज्यों से परामर्श किए बिना आंकड़ों के संग्रह की व्यवस्था में बदलाव करने से उनके चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण संबंधी कानूनों का पालन करना जटिल हो सकता है। उसके अनुसार, अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे आम तौर पर व्यक्तिगत जनगणना ब्लॉक के बजाय बड़े भौगोलिक क्षेत्रों के आंकड़े उपलब्ध कराता है। ऐसे में राज्यों को चुनावी नक्शे तैयार करने के लिए जरूरी छोटे क्षेत्रों के आंकड़े जुटाने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

जनगणना ब्यूरो ने यह प्रस्ताव 10 सितंबर को प्रकाशित किया था। इसके बाद 5 अक्टूबर को जारी सूचना के जरिए जनता से टिप्पणियां प्राप्त करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर से बढ़ाकर 2 नवंबर कर दी गई।

अमेरिका में हर 10 साल में जनगणना होती है। इसके आधार पर प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों का 50 राज्यों के बीच आबादी के अनुपात में बंटवारा किया जाता है।


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