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भारत इंडो-पैसिफिक नीति में अहम साझेदार, जल्द होंगी कई नई घोषणाएं: मार्को रुबियो

अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि नई दिल्ली के साथ संबंध हिंद-प्रशांत के लिए वाशिंगटन के नजरिए का आधार बना हुआ है

भारत इंडो-पैसिफिक नीति में अहम साझेदार, जल्द होंगी कई नई घोषणाएं: मार्को रुबियो
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नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने शनिवार को कहा कि नई दिल्ली के साथ संबंध हिंद-प्रशांत के लिए वाशिंगटन के नजरिए का आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में दोनों देश रिश्तों के विकास और मजबूती को लेकर कुछ रोमांचक और नई घोषणाएं करेंगे।

नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के सपोर्ट एनेक्स भवन के उद्घाटन से पहले सभा को संबोधित करते हुए मार्को रुबियो ने इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “यह भारत और अमेरिका के बीच इस महत्वपूर्ण रिश्ते के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। दोनों देशों के बीच संबंध इंडो-पैसिफिक को लेकर हमारी रणनीति की आधारशिला हैं।”

रुबियो ने याद किया कि जनवरी 2025 में अमेरिकी विदेश सचिव पद की शपथ लेने के बाद उनकी पहली बड़ी बैठक वॉशिंगटन डीसी में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी, जिसमें भारत भी शामिल था। क्वाड बैठक के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर और रुबियो की मुलाकात भी हुई थी। यह न केवल रुबियो, बल्कि दूसरे कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन की भी पहली प्रमुख विदेश नीति बैठक थी।

रुबियो ने कहा, “बहुत से लोग यह नहीं जानते कि शपथ लेने के तुरंत बाद मैं विदेश विभाग पहुंचा और मेरी पहली आधिकारिक बैठक क्वाड की थी। हमने इसे दोबारा जारी रखने का फैसला किया और इस बार इसे यहां आयोजित किया। हम ऐसा सिर्फ क्वाड ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता के कारण नहीं कर रहे, बल्कि इसलिए भी कि यह अमेरिका की इंडो-पैसिफिक नीति में भारत की अहम भूमिका का ठोस संकेत है।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध भी भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत कर रहे हैं।

रुबियो ने कहा, “दोनों नेताओं के बीच संबंध पहले कार्यकाल से ही मजबूत रहे हैं, जब राष्ट्रपति ट्रंप को भारत आने का अवसर मिला था। यह रिश्ता अब दूसरे कार्यकाल में भी जारी है और दोनों नेताओं के बीच गहरा जुड़ाव साफ दिखाई देता है। ये दोनों गंभीर नेता हैं, जो केवल अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी कई ऐसे क्षेत्रों में गहरी हुई है, जो अक्सर सुर्खियों में नहीं आते, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण और स्थायी हैं।

रुबियो ने बताया, “व्यापारिक संबंधों का विस्तार हुआ है और भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य अभ्यासों के जरिए सुरक्षा साझेदारी भी मजबूत हुई है। इसके अलावा एक व्यवस्थित और सुरक्षित कांसुलर व्यवस्था इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए जरूरी है। इसी उद्देश्य से हम ‘अमेरिका फर्स्ट’ वीजा शेड्यूलिंग टूल शुरू कर रहे हैं, जो व्यापारिक पेशेवरों को प्राथमिकता देगा।”

अपने संबोधन के अंत में रुबियो ने भारत-अमेरिका साझेदारी को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से है।

रुबियो ने कहा, "यही वजह है कि मैं इस दौरे पर उन संबंधों को फिर से सुनिश्चित करने, उन्हें और मजबूत करने आया हूं। हमें लगता है कि आने वाले महीनों में हम दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास और मजबूती के बारे में और भी रोमांचक और नई घोषणाएं करेंगे।"


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