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LAC गश्त विवाद पर चीन की नई चाल, ग्लोबल टाइम्स का भारत पर निशाना, घरेलू राजनीति से जोड़ा

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत-चीन सीमा की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों और बनी सहमतियों का सख्ती से पालन करता है।

LAC गश्त विवाद पर चीन की नई चाल, ग्लोबल टाइम्स का भारत पर निशाना, घरेलू राजनीति से जोड़ा
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बीजिंग: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ कथित टकराव और गश्त के स्थापित तरीकों से हटने के भारतीय आरोपों पर चीन ने पलटवार किया है। चीन के सरकारी मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें घरेलू राजनीति से जोड़ने की कोशिश की है। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसकी सेना सीमा क्षेत्रों में अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य गश्त और नियंत्रण गतिविधियां करती है। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयासों के बीच दोनों देशों के बीच गश्त और सीमा प्रबंधन को लेकर मतभेद अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हालांकि, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय समझौतों और संवाद के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत-चीन सीमा की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों और बनी सहमतियों का सख्ती से पालन करता है। उनके मुताबिक, चीनी सेना सीमा क्षेत्रों में अपनी संप्रभुता और स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य गश्त और नियंत्रण गतिविधियां संचालित करती है। गुओ ने भारत से दोनों देशों के बीच बनी सहमति को लागू करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को ठोस कदम उठाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। चीन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर भारत की ओर से सवाल उठाए गए हैं। सीमा पर गश्त के तौर-तरीकों को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

भारत ने चीनी सैनिकों की गश्त पर उठाए सवाल

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली में कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीनी सैनिक स्थापित गश्ती पैटर्न से हट जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और चीन के संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। जायसवाल की यह टिप्पणी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के उस बयान के संदर्भ में आई थी, जिसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में सीमा के कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ टकराव की घटनाएं लगातार होने की बात कही थी। भारत का रुख रहा है कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक संबंधों को सामान्य बनाने की बुनियादी शर्त है। नई दिल्ली का मानना है कि सीमा पर तनाव की स्थिति में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

ग्लोबल टाइम्स ने भारत की घरेलू राजनीति पर साधा निशाना

चीन के सरकारी मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स ने सीमा विवाद पर भारत के आरोपों को लेकर एक अलग दृष्टिकोण पेश किया। अखबार ने सिंघुआ विश्वविद्यालय के नेशनल स्ट्रैटेजी इंस्टीट्यूट में रिसर्च विभाग के निदेशक कियान फेंग के हवाले से दावा किया कि भारत की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कियान ने आरोप लगाया कि सीमा पर गश्त से संबंधित मुद्दों को उठाना भारत की घरेलू राजनीति से जुड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, यह चीनी विशेषज्ञ का दावा है, किसी स्वतंत्र जांच से स्थापित तथ्य नहीं। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े विवादों को दोनों देशों के व्यापक संबंधों में सुधार की प्रक्रिया को बाधित नहीं करने देना चाहिए। उनके मुताबिक, भारत और चीन को मौजूदा सीमा प्रबंधन समझौतों का पालन करना चाहिए और दोनों पक्षों के नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए।

सैन्य और कूटनीतिक संवाद जारी रखने पर जोर

कियान फेंग ने दोनों देशों से मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य संचार व्यवस्था का इस्तेमाल जारी रखने की अपील की। उनका कहना था कि संवाद के माध्यम से गलतफहमियों को दूर करना और मतभेदों को नियंत्रित रखना जरूरी है, ताकि सीमा से जुड़ी घटनाओं का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर न पड़े। उन्होंने सुझाव दिया कि सीमा विवादों को स्थापित बातचीत तंत्र के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। इसमें दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच होने वाली वार्ता भी शामिल है।

गलवान संघर्ष के बाद संबंध सुधारने की चुनौती

भारत और चीन के संबंधों में वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़पों के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य तैनाती और सीमा प्रबंधन को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा। पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने और सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश में गश्त को लेकर सामने आए आरोप बताते हैं कि सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। फिलहाल, भारत और चीन के बीच इस विवाद पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के बीच प्रभावी संवाद, स्थापित समझौतों का पालन और जमीनी स्तर पर समन्वय महत्वपूर्ण होगा।


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