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भारत-कनाडा के रिश्ते पूरी मजबूती के साथ ‘वापस पटरी पर’

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा है कि भारत और कनाडा के संबंध अब बेहद अच्छे हो गए हैं और पूरी तरह सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं

भारत-कनाडा के रिश्ते पूरी मजबूती के साथ ‘वापस पटरी पर’
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वॉशिंगटन। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा है कि भारत और कनाडा के संबंध अब बेहद अच्छे हो गए हैं और पूरी तरह सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर बातचीत कुछ ही हफ्तों में शुरू हो सकती है और इसे जल्दी पूरा किया जा सकता है।

फाइनेंशियल पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में पटनायक ने कहा, “रिश्ते की मौजूदा हालत बहुत अच्छी है। मेरा मतलब है, पिछले दो सालों के हमारे पिछले इतिहास को देखते हुए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता था।” उन्होंने बताया कि जी7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की कनानास्किस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद रिश्ते और मजबूत हुए।

उन्होंने हाई कमिश्नरों की नियुक्ति और “मंत्रियों के लेवल पर कई दौरों” की ओर इशारा किया, जिसमें विदेश, व्यापार और ऊर्जा मंत्री, साथ ही संसदीय और क्षेत्रीय डेलिगेशन शामिल थे।

उन्होंने कहा, “बहुत सारी मीटिंग्स हुई हैं, ये सब उस समय की भरपाई करने की कोशिश है जो हमने पहले खो दिया है।” उन्होंने कहा कि बातचीत में नेशनल सिक्योरिटी और लॉ एनफोर्समेंट से लेकर माइनिंग, एनर्जी, एजुकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे एरिया शामिल हुए हैं।

पटनायक ने रिश्ते को ठवापस पटरी पर ही नहीं, बल्कि बहुत मजबूती से आगे बढ़ रहा है” बताया और कहा कि जल्द ही एक हाई-लेवल कनाडाई दौरे की उम्मीद है जो “वास्तव में इस बात पर मुहर लगाएगा कि रिश्ते अब तक इतने आगे आ गए हैं।”

सीईपीए समझौते पर उन्होंने कहा कि इसे अंतिम रूप देना कठिन नहीं होना चाहिए। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया था। कनाडा की संसद को 90 दिन की सूचना दी जा चुकी है और उम्मीद है कि फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में बातचीत शुरू हो जाएगी।

पटनायक ने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में अब भारत की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों और समूहों के साथ व्यापार समझौते किए हैं।

उन्होंने ईएफटीए, यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड स्टेट्स, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और यूएई के साथ भारत की हालिया ट्रेड डील्स पर ज़ोर देते हुए कहा, “हम कई ऐसी बातों पर आगे बढ़े हैं जिन पर पहले हम अड़े रहते थे।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और कनाडा दोनों लोकतांत्रिक देश हैं, जहां कानून का शासन, प्रेस की स्वतंत्रता और बाजार आधारित अर्थव्यवस्था है। दोनों देशों के हित कई मंचों पर एक जैसे हैं और वे संयुक्त राष्ट्र, जी-7 और जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ काम करते हैं। व्यापक आर्थिक साझेदारी का मकसद है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश आसान हो।

उन्होंने कहा कि यह समझौता ऐसे है जैसे दो पक्ष आपसी समस्याओं को सुलझाकर साथ मिलकर आगे बढ़ने का रास्ता तय करें। इसके साथ ही संसदीय आदान-प्रदान और समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच संपर्क भी मजबूत किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, “पिछले दो सालों की छोटी-मोटी दिक्कतों के बावजूद, हमारे लोगों के बीच के रिश्तों पर ज़रा भी असर नहीं पड़ा। ट्रेड बढ़ा। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन ने अच्छा काम किया। एकेडमिक इंस्टीट्यूशन ने अच्छा काम किया। यूनिवर्सिटी, स्टूडेंट, रिसर्च, इनोवेशन, कुछ भी नहीं रुका।”

भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से शिक्षा, व्यापार और प्रवासी भारतीय समुदाय के मजबूत संबंध रहे हैं। कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। हाल के वर्षों में सुरक्षा से जुड़े आरोपों के कारण तनाव बढ़ा था, लेकिन अब दोनों सरकारें रिश्तों को स्थिर और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


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