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अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी पर घमासान, कई डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने उठाई जीएओ जांच की मांग

अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर विवाद के बीच शीर्ष डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं

अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी पर घमासान, कई डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने उठाई जीएओ जांच की मांग
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वाशिंगटन। अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर विवाद के बीच शीर्ष डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकारी जवाबदेही कार्यालय (जीएओ) से जांच कराने की मांग की है। दावा है कि ट्रंप प्रशासन के कदमों ने अमेरिका की इमिग्रेशन सिस्टम को बाधित कर दिया है।

एडम शिफ और एलेक्स पैडिला के नेतृत्व में सीनेटरों के एक ग्रुप ने पत्र लिखे हैं। इनमें कहा गया है कि प्रशासन ने वीजा प्रक्रिया पर रोक, पहले से मंजूर ग्रीन कार्ड और नागरिकता मामलों की दोबारा जांच जैसे कदम उठाए हैं, जिससे प्रवासियों, नियोक्ताओं और परिवारों में व्यापक अनिश्चितता पैदा हो गई है।

सीनेटरों ने लिखा, "हमें इस बात की चिंता है कि ये बदलाव अमेरिका में इमिग्रेशन के लिए बनी वैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास हैं, न कि हमारे इमिग्रेशन सिस्टम की पारदर्शिता को बेहतर बनाने का कोई वैध प्रयास।"

डेमोक्रेट नेताओं के अनुसार, प्रशासन ने दर्जनों देशों के आवेदकों के लिए इमिग्रेशन लाभों की प्रक्रिया रोक दी है, वीजा जारी करने पर व्यापक स्तर पर विराम लगाया है और शरणार्थी व शरण देने के रास्तों को सीमित कर दिया है।

इसके साथ ही, अधिकारियों ने पिछले प्रशासन के तहत पहले से मंजूर मामलों की फिर से जांच करने का प्रस्ताव रखा है, जिनमें स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) और नागरिकता प्राप्त कर चुके लोग भी शामिल हैं। अपने पत्र में, सीनेटरों ने चेतावनी दी कि फिर से इस तरह की समीक्षा बिना स्पष्ट आधार के लोगों को निशाना बना सकती है।

पत्र में कहा गया, "हमें आशंका है कि ये दोबारा समीक्षा प्रक्रियाएं प्रवासियों और नागरिकता प्राप्त लोगों को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने का बहाना बन सकती हैं।"

सांसदों ने सरकार के आंतरिक फैसलों की ओर भी इशारा किया, जिसमें ऐसे निर्देश शामिल हैं जो अधिकारियों को कुछ ऐसे शरणार्थियों को हिरासत में लेने और उनसे फिर से पूछताछ करने की अनुमति देते हैं। खासकर वे लोग जो लंबे समय से अमेरिका में रह रहे हैं, लेकिन अभी स्थायी निवास का दर्जा नहीं मिला है।

सीनेटरों ने जीएओ से यह भी जांच करने को कहा है कि कितने लोग इन कदमों से प्रभावित हुए, किन मानकों के आधार पर मामलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है, क्या इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हुआ है, और इसका कुल खर्च व प्रभाव क्या है।

सांसदों ने इस बात पर भी स्पष्टता की मांग की कि क्या दोबारा समीक्षाओं के परिणाम पहले के फैसलों से अलग रहे हैं और प्रभावित लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान हैं।

सीनेटरों ने लिखा, "आम जनता को अभी भी इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है कि यूएससीआईएस और विदेश विभाग अपने सामान्य निर्णय-निर्धारण कार्यों को फिर से शुरू करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।"

सांसदों के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने कांग्रेस को इन बदलावों के दायरे या उनके पीछे के तर्क के बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

इन पत्रों पर सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी के कई वरिष्ठ डेमोक्रेट्स ने हस्ताक्षर किए थे, जिनमें डिक डर्बिन, क्रिस कून्स, एमी क्लोबुचर, कोरी बुककर और अन्य शामिल थे।


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