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यूएनएससी में सुधार के लिए आईबीएसए का अल्टीमेटम, भारत-ब्राजील को स्थायी सीट देने की मांग

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार 14वें भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय आयोग की बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र यूएनजीए81 के मौके पर हुई। बैठक में दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस 4 बड़े मुद्दों पर रहा।

यूएनएससी में सुधार के लिए आईबीएसए का अल्टीमेटम, भारत-ब्राजील को स्थायी सीट देने की मांग
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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार 14वें भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय आयोग की बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र यूएनजीए81 के मौके पर हुई। बैठक में दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य फोकस 4 बड़े मुद्दों पर रहा।

यूएनएससी सुधार पर सख्त रुख: तीनों देशों ने सुरक्षा परिषद सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) में लगातार गतिरोध पर गहरी चिंता जताई। मंत्रियों ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकता के हिसाब से सुरक्षा परिषद को बदलना जरूरी है। इसके लिए यूएनजीए81 के दौरान ही औपचारिक, पाठ-आधारित (टेक्स्ट आधारित) वार्ता एक तय समय-सीमा के अंदर शुरू करने की मांग की। साथ ही कहा कि सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता के कारण संयुक्त राष्ट्र के कामकाज को पंगु नहीं होने देना चाहिए, इसलिए महासभा के अधिकारों को मजबूत किया जाए। अफ्रीका को सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व और भारत-ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी खुला समर्थन किया गया।

क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत की पहल को समर्थन: आईबीएसए ने जी20 के तहत भारत द्वारा प्रस्तावित महत्वपूर्ण खनिज परिपत्र पहल का औपचारिक समर्थन किया। इसका मकसद रीसाइक्लिंग, अर्बन माइनिंग और सेकंड-लाइफ बैटरी जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना है ताकि ऊर्जा ट्रांजिशन और सप्लाई चेन मजबूत हो। मंत्रियों ने माना कि विकासशील खनिज उत्पादक देशों में निवेश की कमी और लोकल प्रोसेसिंग न होने की बड़ी चुनौती है, इसलिए खनिज संपन्न देशों में ही वैल्यू रिटेंशन बढ़ाने पर जोर दिया गया।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: मंत्रियों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में नागरिकों की जघन्य हत्या की कड़ी निंदा की। दोहरे मापदंड को खारिज करते हुए अल-कायदा, ISIS/दाइश, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत सभी यूएन-सूचीबद्ध आतंकी संगठनों और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) को जल्द अपनाने का आह्वान किया।

कुल मिलाकर यह बैठक ग्लोबल साउथ की एकजुटता, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और साउथ-साउथ सहयोग को नई गति देने के संकल्प के रूप में देखी जा रही है।

बहुपक्षवाद और साउथ-साउथ सहयोग को मजबूती: तीनों मंत्रियों ने नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था, डब्ल्यूटीओ सुधार, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) और जलवायु न्याय पर जोर दिया। आईबीएसए फंड के जरिए विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन और क्षमता निर्माण की परियोजनाओं को जारी रखने पर सहमति बनी। साथ ही ग्लोबल साउथ की आवाज को जी20, यूएन और अन्य वैश्विक मंचों पर और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।


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