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एएफडी सत्ता में आ गई तो प्रवासियों को कैसे बचाएगा जर्मनी

प्रवासी विरोधी पार्टी एएफडी जर्मनी के एक राज्य में पहली बार सत्ता संभालने के करीब है. ऐसे में प्रवासी समुदायों ने सरकार

एएफडी सत्ता में आ गई तो प्रवासियों को कैसे बचाएगा जर्मनी
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प्रवासी विरोधी पार्टी एएफडी जर्मनी के एक राज्य में पहली बार सत्ता संभालने के करीब है. ऐसे में प्रवासी समुदायों ने सरकार से पूछा है कि उनकी रक्षा के लिए सरकार के पास ठोस उपाय क्या हैं?

जर्मनी के प्रवासी समुदायों को एएफडी के बढ़ते प्रभाव से चिंता हो रही है. हाल ही में हुए प्रांतीय चुनावों में पार्टी एक राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है और पूर्ण बहुमत से महज थोड़ी दूर है. सैक्सनी अनहाल्ट में इस बात के प्रबल आसार हैं कि धुर दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी यानी एएफडी सत्ता में आएगी.

जर्मनी में मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों ने एएफडी के साथ सहयोग करने से मना कर दिया है. एएफडी फिलहाल छोटी लोकलुभावन बीएसडब्ल्यू के साथ सरकार बनाने के लिए गठबंधन पर बातचीत कर रही है. दोनों के बीच गठबंधन से दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी में पहली बार कोई धुर दक्षिणपंथी पार्टी राज्य की सत्ता संभालेगी.

प्रवासियों को निकाले जाने का डर

एएफडी ने सत्ता में आने पर सैक्सनी अनहाल्ट में बड़े पैमाने पर प्रवासियों को डिपोर्ट करने का वादा किया है. हालांकि इस तरह के अभियान चलाने में कई तरह की कानूनी अड़चने हैं. जर्मनी के 16 संघीय राज्यों में शिक्षा और सुरक्षा समेत तमाम मुद्दों पर सत्ता का विकेंद्रीकरण काफी ज्यादा है. बावजूद इसके प्रवासन से जुड़ी नीतियों पर फैसला संघीय सरकार लेती है.

सोमवार को प्रवासी समुदायों की ओर से प्रकाशित एक पत्र में चेतावनी दी गई कि मुसलमान, यहूदी और एलजीबीटीक्यू समेत सभी समुदायों ने एएफडी की चुनावी जीत के बाद उनके लिए "ठुकराए जाने और नफरत की भावना में जिस तरह का इजाफा हुआ है वह लंबे समय से नहीं देखा गया था." इन प्रवासी समुदायों में तुर्क प्रवासियों से जुड़े संगठन भी शामिल हैं.

सैक्सनी अनहाल्ट में बढ़ी नफरतीं घटनाएं

सैक्सनी अनहाल्ट में प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एलएएमएसए (लांडेसनेत्सवर्क माइग्रांटेन ऑर्गनात्सियोनेन सैक्सनी अनहाल्ट) का कहना है कि इस साल नस्लभेदी हमलों की 85 घटनाएं अब तक दर्ज हो चुकी हैं. यह 2025 में पूरे साल में हुई घटनाओं से भी ज्यादा हैं. पत्र में इन घटनाओं का जिक्र है.

इस तरह के दूसरे संगठनों के कर्मचारियों ने नफरती और धमकी भरे पत्र मिलने की जानकारी दी है. इसके साथ ही उन्हें मौखिक रूप से फोन पर और सड़कों पर भी दुर्व्यवहार झेलना पड़ रहा है. पत्र पर दस्तखत करने वालों ने चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स और जर्मन संघीय राज्यों के नेताओं से एक आयोग बनाने की मांग की है. ये लोग चाहते हैं कि यह आयोग सैक्सनी अनहाल्ट में एएफडी की सरकार से अल्पसंख्यकों को होने वाले खतरों की पहचान करे और उनसे बचने का उपाय सुझाए.

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उन्होने यह भी मांग की है कि नस्लभेदी हमलों का शिकार होने की आशंका पर शरण मांगने वाले लोगों को दूसरे राज्यों में जाने की अनुमति दी जाए. जर्मनी के प्रवासी कानूनों के मुताबिक आवेदक को उसी राज्य में रहना पड़ता है जहां उसने शरण के लिए आवेदन दिया है.

इसके साथ ही पत्र लिखने वाले यह भी चाहते हैं कि संघीय सरकार एक सुरक्षा कोष बनाया जाए. वे लोग इस कोष से समाजसेवा, संगठनों, सलाह केंद्रों और स्थानीय समुदायों की पहलों को नस्लभेद से खतरा होने पर उनकी मदद करना चाहते हैं.

प्रवासियों का विरोध और स्वागत

धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी जर्मनी में प्रवासियों का विरोध करती है. उसका मानना है कि बाहरी लोगों के आने से संसाधनों पर दबाव बढ़ राह है और जर्मन लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. एएफडी यूरोपीय संघ का भी विरोध करती है और सत्ता में आने पर संघ से बाहर निकलने की बात कहती रही है.

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दूसरी तरफ जर्मनी में जनसंख्या में बढ़ोत्तरी नहीं होने से कामकाजी लोगों की संख्या घटती जा रही है. ऐसे में बहुत से कामों के लिए उनकी प्रवासियों पर निर्भरता बढ़ रही है. सरकार कई उपायों से प्रवासियों को लुभाने की कोशिश में है. हाल ही में सरकार ने 2024 और उसके बाद जर्मनी आने वाले प्रवासियों को अपने बुजुर्ग मां बाप को साथ लाने की छूट देने का नियम बनाया है. हालांकि इसके लिए उन्हें अलग से आवेदन करना होगा और हर मामले पर अलग से विचार किया जाएगा.

एएफडी फिलहाल देश भर में लोकप्रियता के मामले में पहले नंबर पर चल रही है. हालांकि पार्टी केंद्र की सत्ता में जल्दी ही आ सकेगी इसके आसार कम हैं. जर्मनी में दशकों से गठबंधन की सरकार है और मुख्यधारा की पार्टियां एएफडी के साथ सहयोग करने को राजी नहीं है.


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