जर्मनी ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा पहला कमर्शियल रॉकेट 'स्पेक्ट्रम'
18 महीने पहले मिली नाकामी के बाद, जर्मनी की स्टार्टअप कंपनी ईजार एयरोस्पेस ने अपना 'स्पेक्ट्रम' रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा दिया है

18 महीने पहले मिली नाकामी के बाद, जर्मनी की स्टार्टअप कंपनी ईजार एयरोस्पेस ने अपना 'स्पेक्ट्रम' रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा दिया है.
जर्मनी के बवेरिया राज्य की स्टार्टअप कंपनी 'ईजार एयरोस्पेस' ने इतिहास रच दिया है. रविवार को कंपनी ने बताया कि नॉर्वे के आर्कटिक 'एंडोया स्पेसपोर्ट' से उनके 'स्पेक्ट्रम' रॉकेट ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी. मानवरहित इस रॉकेट का कक्षा में पहुंचना यूरोप के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि यूरोप के कई देश तेजी से बढ़ते सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में अपनी जगह बनाने की होड़ में हैं.
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ईजार के को-फाउंडर और सीईओ डानिएल मेत्सलर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "इस वक्त पूरी इंडस्ट्री में लॉन्चिंग की क्षमता का न होना ही सबसे बड़ी रुकावट है." उन्होंने यह भी साफ किया कि कंपनी के पास फंडिंग की कोई कमी नहीं है और फिलहाल उनका आईपीओ लाने का कोई इरादा नहीं है.
क्या है 'स्पेक्ट्रम' रॉकेट और इसका मिशन?
स्पेक्ट्रम रॉकेट को खास तौर पर छोटे और मीडियम साइज के पेलोड अंतरिक्ष में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. कंपनी के अनुसार, इस मिशन के दौरान रॉकेट अपने साथ पांच छोटे उपग्रह लेकर गया है. इनके अलावा इसमें एक तकनीकी प्रयोग भी शामिल है, जिसका उद्देश्य उड़ान के दौरान नई अंतरिक्ष तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण करना है.
ईजार का कहना है कि यह लॉन्च रॉकेट की क्षमता परखने और पेलोड के साथ उसकी पहली उड़ान जांचने, दोनों ही मकसदों से किया गया. बता दें कि 18 महीने पहले, इसी लॉन्च साइट से कंपनी का पहला रॉकेट उड़ान भरने के तुरंत बाद क्रैश होकर समुद्र में गिर गया था.
यूरोप के लिए क्यों है अहम ?
इस कामयाबी से यूरोप को सैटेलाइट लॉन्च के लिए दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यूरोपीय संघ (ईयू) के रक्षा और अंतरिक्ष कमिश्नर आंद्रियुस कुबिलुस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अंतरिक्ष तक यूरोप की अपनी स्वतंत्र पहुंच को अभी एक बड़ा सहारा मिला है."
नॉर्वे की उद्योग और वाणिज्य मंत्री सेसिली मायरसेथ ने भी इस कदम की तारीफ करते हुए कहा, "हम अब एंडोया से सैटेलाइट लॉन्च कर सकते हैं, यह बात आज के इस उथल पुथल वाले समय में नॉर्वे और यूरोप की सुरक्षा को और मजबूत करती है."
दरअसल, यूरोप लंबे समय से अंतरिक्ष में अपनी स्वायत्तता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने भी इस साल मार्च में ईजार की लॉन्च साइट का दौरा किया था. अपनी खुद की लॉन्चिंग क्षमता होना यूरोप के लिए ऐसे समय में और भी अहम हो जाता है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में वैश्विक व्यवस्थाएं बदल रही हैं.
फिलहाल दुनिया के सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में इलॉन मस्क की कंपनी 'स्पेसएक्स' और फ्रेंच 'आरियानग्रुप' जैसे बड़े नामों का दबदबा है. स्पेसएक्स अमेरिका से उड़ान भरता है, जबकि एयरबस और सफरान का जॉइंट वेंचर 'आरियानग्रुप' दक्षिण अमेरिका के फ्रेंच गुयाना स्थित स्पेसपोर्ट का इस्तेमाल करता है. यूरोप में नॉर्वे के अलावा स्वीडन और ब्रिटेन भी इस दौड़ में हैं, जो स्पेस मार्केट में अपनी दावेदारी पक्की करना चाहते हैं.
अब ईजार एयरोस्पेस का इरादा अपना काम तेजी से बढ़ाने का है. कंपनी का कहना है कि उसके पांच और रॉकेट अभी बन रहे हैं और लंबी अवधि में उनका लक्ष्य हर साल करीब 40 लॉन्च का है. इसके अलावा, कंपनी पूर्वी कनाडा के नोवा स्कॉटिया में अपनी दूसरी लॉन्च साइट भी बना रही है, जो 2028 तक पूरी तरह से तैयार हो सकती है.
इस काम को रफ्तार देने के लिए कंपनी को पिछले हफ्ते ही यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) से करीब 20 करोड़ यूरो (23.2 करोड़ डॉलर) का फंड भी मिला है, जिससे नए रॉकेट बनाने और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलेगी.


