जर्मनी: श्रम मंत्री के इस्तीफे से सरकार में उथल-पुथल
जर्मनी में गठबंधन सरकार बढ़ते राजनीतिक तनाव और चुनावी झटकों से जूझ रही है. चांसलर मैर्त्स ने बदलाव और बिजली कर में कटौती का वादा किया है.

जर्मनी में श्रम मंत्री और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की सह-अध्यक्ष बेर्बेल बास के अचानक इस्तीफे के बाद चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की गठबंधन सरकार में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
सप्ताह की शुरुआत बड़े घटनाक्रम के साथ हुई. सोमवार सुबह बेर्बेल बास ने श्रम मंत्री और वाम-मध्यपंथी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी एसपीडी की सह-अध्यक्ष के पद से इस्तीफे का ऐलान किया. उन्होंने पार्टी सदस्यों को भेजे संदेश में लिखा, "मेरी सौतेली बेटी की मौत के बाद मुझे एहसास हुआ कि अपने दुख से उबरने के लिए मुझे समय चाहिए.”
हालांकि उन्होंने इस्तीफे के पीछे कुछ और कारण भी बताए, "मेरे खिलाफ सार्वजनिक रूप से किए जा रहे हैं, जिनमें दुर्भाग्य से हमारे गठबंधन सहयोगी के कुछ लोगों के हमले भी शामिल हैं.” पिछले कुछ दिनों में बास पर दबाव काफी बढ़ गया था. केंद्र की गठबंधन सरकार श्रम मंत्रालय से कई अहम विधायी प्रस्तावों का बेसब्री से इंतजार कर रही है.
जुलाई में गर्मियों की छुट्टियों से पहले ही एक आयोग जर्मनी की वैधानिक पेंशन व्यवस्था में सुधार के लिए विस्तृत प्रस्ताव पेश कर चुका था. गठबंधन में शामिल एसपीडी और मध्य-दक्षिणपंथी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन तथा क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीडीयू/सीएसयू) चाहते थे कि इन प्रस्तावों को जल्द से जल्द कानून का रूप दिया जाए. हालांकि, अब तक इनके अंतिम मसौदे पेश नहीं किए गए हैं.
बास के इस्तीफे की मांग पहले से उठ रही थी
सितंबर में सीडीयू/सीएसयू संसदीय दल के छोटे और मझोले उद्यमों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह के प्रमुख क्रिश्चियान फॉन श्टेटेन ने बास के बारे में कहा था, "मंत्री अब इस पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं. वह महीनों से उन सुधारों को रोक रही हैं, जिनकी हमारे देश को सख्त जरूरत है.”
अक्टूबर की शुरुआत में सीडीयू की अर्थव्यवस्था मंत्री काथरीना राइष ने भी ऐसी ही आलोचना की. उन्होंने मांग की कि पेंशन सुधार को साल के अंत तक मंजूरी दी जाए. राइष ने कहा कि बास को विधेयक "तुरंत” पेश करना चाहिए. हालांकि, उस समय यह पता था कि उनकी कैबिनेट सहयोगी निजी जीवन में बेहद कठिन दौर से गुजर रही थीं. सितंबर के आखिर में बेर्बेल बास की सौतेली बेटी का निधन हो गया था.
एसपीडी के सह-अध्यक्ष, वित्त मंत्री और उप-चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने सोमवार को इन आलोचनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बास के खिलाफ राजनीतिक हमलों को "शर्मनाक” बताया.
एसपीडी के नेताओं की बैठक के बाद बर्लिन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "इससे राजनीतिक विमर्श दूषित होता है. हमारी राजनीतिक संस्कृति को बचाए रखने के हित में मैं उम्मीद करता हूं कि हर कोई थोड़ा पीछे हटकर विचार करेगा कि पिछले कुछ हफ्तों में वास्तव में क्या हुआ है.”
उन्होंने सभी मध्यमार्गी नेताओं से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि "हम एक-दूसरे पर हमला करके राजनीति में अच्छे लोगों को खत्म ना कर दें.” ऐसे आरोपों का महत्व उस समय और बढ़ जाता है, जब गठबंधन सरकार पहले से ही गहरे संकट में घिरी हुई है.
इसके अलावा,एसपीडी के शीर्ष नेतृत्व में भी अब एक पद खाली हो गया है. बास के बिना क्लिंगबाइल अकेले ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे. सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नए नेताओं का चुनाव करने के लिए दिसंबर या जनवरी में पार्टी सम्मेलन होगा.
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि क्लिंगबाइल दोबारा पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे या नहीं. पिछली बार दोबारा अध्यक्ष चुने जाने के दौरान उन्हें बेहद कम समर्थन मिला था.
नए श्रम मंत्री की नियुक्ति
आलेक्जांडर श्वाइत्सर को बेर्बेल बास की जगह जर्मनी का नया श्रम मंत्री बनाया गया है. राइनलैंड-पैलेटिनेट राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्वाइत्सर इससे पहले वहां श्रम और सामाजिक मामलों के मंत्री रह चुके हैं.
चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने भरोसा जताया कि श्वाइत्सर का अनुभव "संघीय सरकार के भीतर बेहतर सहयोग” सुनिश्चित करेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि लंबित विधायी प्रस्तावों को "अब जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी और उन्हें संसद में पेश किया जा सकेगा.”
चांसलर ने बास की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी उनके साथ निजी मामलों पर चर्चा नहीं की थी. मैर्त्स के मुताबिक, उन्होंने बास को स्पष्ट रूप से सलाह दी थी कि वह अपने दुख से उबरने के लिए जितना समय चाहें, लें.
मैर्त्स ने बदलाव का वादा किया
गठबंधन में शामिल दोनों दलों के बीच अविश्वास काफी बढ़ गया है. एसपीडी के सांसदों का कहना है कि राजनीतिक माहौल लगातार जहरीला होता जा रहा है.
पिछले कई महीनों से सीडीयू और एसपीडी कम जनसमर्थन, निराशाजनक चुनावी नतीजों और सुधारों से जुड़े अहम मुद्दों पर आपसी विवादों से जूझ रहे हैं. बिजली कर में बदलाव, चीनी पर टैक्स लगाने, पेंशन सुधार और श्रम बाजार में बदलाव की योजनाओं समेत शायद ही कोई ऐसा प्रस्ताव रहा है, जिस पर सार्वजनिक विवाद ना हुआ हो.
इसके अलावा, चांसलर की पार्टी सीडीयू भी संकट का सामना कर रही है. सितंबर में पूर्वी जर्मनी के मेक्लेनबुर्ग-फोपर्मान राज्य में पार्टी को ऐतिहासिक चुनावी हार का सामना करना पड़ा. इतिहास में पहली बार वह किसी राज्य की संसद में अपनी प्रतिनिधित्व की जगह भी खो बैठी. रविवार और सोमवार को पार्टी नेतृत्व ने आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए बंद कमरे में बैठक की.
इस बैठक के बाद चार पन्नों का एक दस्तावेज जारी किया गया, जिसमें प्राथमिकताओं में बदलाव के संकेत मिले. इसमें सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा जोर दिया गया. किफायती आवास, बिजली की कम कीमतें, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और नागरिकों के जीवनभर के योगदान के प्रति अधिक सम्मान जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया. इसे इस आलोचना के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है कि सीडीयू आर्थिक और नियामक मुद्दों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान दे रही थी.
चांसलर ने माना कि मतदाताओं को लगता है कि राजनेता उनकी मुश्किलों और सामाजिक स्थिति कमजोर होने की आशंकाओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. मैर्त्स ने कहा, "हमें इस गिरावट से उबरना होगा और भरोसे के संकट से बाहर निकलना होगा.” उन्होंने आगे कहा, "आप सिर्फ एक सप्ताहांत में किसी पार्टी को पूरी तरह नए सिरे से नहीं बना सकते, लेकिन हम दिखाना चाहते हैं कि हम बदलाव के लिए तैयार हैं और चुनावी नतीजों को देखते हुए हमें ऐसा करना ही होगा.”
वर्तमान गठबंधन का विकल्प नहीं
चांसलर ने सभी के लिए बिजली कर कम करने का ऐलान भी किया. यह वादा उन्होंने 2025 के आम चुनाव से पहले किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं किया था.
बंद कमरे में हुई बैठक के दस्तावेज के जरिए सीडीयू ने एसपीडी को भी संकेत दिया है. पार्टी ज्यादा दक्षिणपंथ की ओर जाने के बजाय अपने पारंपरिक सामाजिक मूल्यों पर जोर दे रही है. यह ऐसा रुख है, जिसे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच भी समर्थन मिल सकता है.
चांसलर ने मौजूदा गठबंधन सरकार को जारी रखने की अपनी मंशा पर जोर देते हुए कहा, "किसी व्यक्ति के बदलाव से गठबंधन समझौते की बुनियाद पर सवाल नहीं उठेंगे.” इसके बाद उन्होंने यूक्रेन की हालिया यात्रा के दौरान कही गई अपनी बात दोहराई. उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय रहने और फैसले लेने में सक्षम बने रहने के लिए इस समय एक स्थिर संघीय सरकार की जरूरत है.”
सीडीयू/ सीएसयू और एसपीडी, दोनों जानते हैं कि समय से पहले चुनाव कराने का सबसे ज्यादा फायदा धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) को मिल सकता है. वह पहले से ही देशभर के जनमत सर्वेक्षणों में सबसे आगे चल रही है. इसलिए, गहरे मतभेदों के बावजूद क्लिंगबाइल और मैर्त्स फिलहाल अपने गठबंधन का कोई विकल्प नहीं देख रहे हैं.


