जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जर्मन शहर ने उठाए कदम
पश्चिमी यूरोप में इस साल जून और जुलाई का महीना इतिहास में सबसे गर्म दर्ज किया गया है. सूखा पड़ने से लेकर तूफान आने तक, मौसम का मिजाज अब यूं ही रहने की आशंका है

पश्चिमी यूरोप में इस साल जून और जुलाई का महीना इतिहास में सबसे गर्म दर्ज किया गया है. सूखा पड़ने से लेकर तूफान आने तक, मौसम का मिजाज अब यूं ही रहने की आशंका है. जर्मनी के कील शहर ने इनसे जूझने का रास्ता दिखाया है.
अक्टूबर 2023 में, बाल्टिक सागर के तट पर 150 से ज्यादा वर्षों की सबसे शक्तिशाली तूफानी लहरें आईं. इसकी वजह से उत्तरी जर्मनी के श्लेसविग-होलश्टाइन राज्य और दक्षिणी डेनमार्क के कुछ इलाकों में तटबंध टूट गए, समुद्री चट्टानें गिर गईं और मरीना (नावों के लिए बने बंदरगाह) बुरी तरह तबाह हो गए.
इस विनाशकारी लहर ने श्लेसविग-होलश्टाइन की राजधानी और बंदरगाह शहर कील में 2.68 मीटर तटीय चट्टान को बहा दिया. यह पिछले दो दशकों में हर साल होने वाले नुकसान के औसत से चार गुना ज्यादा था.
इंसानों की वजह से हो रहा जलवायु परिवर्तन तूफान जैसे चरम मौसम को और भी खतरनाक बना रहा है. कील जैसे तटीय शहरों में, इसके नतीजों को नजरअंदाज करना अब नामुमकिन है.
जर्मनी की सूखती नदियों का समाधान क्या होगा
शहर के जलवायु अनुकूलन (क्लाइमेट अडैप्शन) विभाग की प्रमुख मार्टिना बॉम ने कहा, "कील शहर में जलवायु परिवर्तन का असर कोई काल्पनिक बात नहीं है. कम से कम 2023 के समुद्री तूफान के बाद से हम सभी को यह अच्छी तरह एहसास हो गया है कि इसका हम पर, हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर और हमारे आसपास के पर्यावरणपर कितना गहरा असर पड़ सकता है.”
इन असर की वजह से कील शहर को अपने डिजाइन और कामकाज के तरीके पर फिर से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इस शहर ने 2019 में ही जलवायु आपातकाल की घोषणा कर दी थी. तब से यह शहर बदलते मौसम के हालात के हिसाब से ढलने में सबसे आगे रहा है. शहर को मौसम की चरम स्थितियों से निपटने लायक बनाने में मदद करने के लिए 2025 में बॉम का विभाग बनाया गया. इन उपायों को और तेज करने के लिए फरवरी 2026 में एक अडैप्टेशन प्लान अपनाया गया.
क्या जलवायु के अनुकूल बनने का मतलब जलवायु परिवर्तन से लड़ना छोड़ देना है?
शहर के अधिकारियों, जैसे कि बॉम के मुताबिक, जलवायु के हिसाब से खुद को ढालने का मतलब यह नहीं है कि धरती को गर्म करने वाले जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन में कटौती करना छोड़ दिया जाए. जलवायु की सुरक्षा करना ही बचाव का पहला जरिया बना हुआ है, क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने से भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है.
बॉम ने डीडब्ल्यू को बताया, "काफी लंबे समय तक जलवायु अनुकूलन के मुद्दे से आधिकारिक तौर पर जुड़ने में हिचकिचाहट बनी रही. शुरुआत में मुझे भी इसे लेकर थोड़ा अजीब लग रहा था, क्योंकि ऐसा महसूस होता था मानो इससे जलवायु संरक्षण के प्रयासों पर से ध्यान या दबाव कम हो जाएगा.”
हालांकि, कील शहर में जलवायु अनुकूलन की तरफ बढ़ा यह कदम दुनिया भर के दूसरे शहरों में हो रही चीजों को दिखाता है और उनकी कहानी बयां करता है. चाहे वह अमेरिका का सांता क्रूज हो या फिलीपींस की क्वेजोन सिटी. वजह यह है कि सरकारें अब उन भीषण गर्मी, भारी बारिश और तेज तूफानी लहरों के असर से निपटने के लिए तेजी से तैयारियां कर रही हैं, जिनका असर पहले से ही हम पर पड़ रहा है.
जलवायु परिवर्तन का संकट झेलने लगा यूरोप
बॉम ने कहा, "इसका मतलब यह नहीं है कि जलवायु की सुरक्षा और उससे निपटने के उपाय हमेशा एक-दूसरे के अनुकूल हों या एक-दूसरे से मेल खाते हों. उदाहरण के लिए, घरों, डे-केयर या बुजुर्गों के देखभाल केंद्रों में काफी ज्यादा बिजली खर्च करने वाले एयर-कंडीशनर लगाना भीषण गर्मी के दौरान कमजोर लोगों की जान तो बचाता है, लेकिन इससे बिजली की खपत बढ़ जाती है, जो कि जलवायु संरक्षण के लक्ष्यों के विपरीत होगा.”
उन्होंने आगे कहा, "भले ही हम अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करें, लेकिन हमारी मांग हमेशा अक्षय ऊर्जा के स्रोतों से पूरी नहीं हो पाती है. इसलिए, हम जितनी भी अतिरिक्त ऊर्जा का इस्तेमाल करेंगे, उससे आखिरकार जलवायु को नुकसान पहुंचाने वाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन ही होगा.”
शहरों को नए सिरे से डिजाइन करना
कभी-कभी एयर-कंडीशनर की जरूरत पड़ेगी, लेकिन कील शहर ऐसे समाधानों पर काम कर रहा है जो शहर को कुदरती तरीके से ठंडा रखें. शहर इमारतों की दीवारों पर पेड़-पौधे लगा रहा है, ठंडी हवा को शहर के बीचों-बीच पहुंचाने के लिए पार्क को नए सिरे से डिजाइन कर रहा है, और निवासियों के लिए अनुकूलन परियोजनाओं से जुड़े परमिट, जानकारी और अनुदान हासिल करना आसान बना रहा है.
यह शहर इस बात का भी परीक्षण कर रहा है कि भविष्य के मौसम और परिस्थितियों में पेड़ों की कौन सी प्रजातियां जीवित रह सकती हैं. एक दशक पहले, कील ने 20 अलग-अलग प्रजातियों के 5-5 पौधे लगाए थे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें से कौन सी प्रजातियां भीषण गर्मी, सूखे और पास के बाल्टिक सागर से आने वाली नमक युक्त हवाओं को सबसे अच्छी तरह झेल सकती हैं.
पेड़ छाया देते हैं, सड़कों का तापमान लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस तक कम करते हैं, और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं, लेकिन जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन हो रहा है, हर प्रजाति का पेड़ इसमें फल-फूल नहीं पाएगा.
शहर के हरित क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार विभाग में कार्यरत निकोल होल्ज ने कहा, "जलवायु के हिसाब से कोई एक पेड़ हर जगह फिट नहीं बैठता. अलग-अलग जगहों और स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग प्रजातियों के पेड़ों की जरूरत होती है.”
इस शोध के लिए धैर्य की जरूरत है. उसी विभाग की प्रमुख पेट्रा होल्टैपल ने कहा, "असली नतीजे मिलने में लगभग 20 से 30 साल लगेंगे.”
रहन-सहन में बदलाव करने की जरूरत
बॉम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के हिसाब से ढलने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में भी बदलाव करने होंगे. उदाहरण के लिए, हो सकता है कि बच्चे अब दोपहर 3 बजे फुटबॉल ना खेल पाएं, क्योंकि तब बहुत गर्मी होती है.
हालांकि, कील शहर धीरे-धीरे गर्म हो रहा है, फिर भी भीषण गर्मी के मामले में इसके हालात दक्षिणी या मध्य यूरोप के ज्यादा गर्म शहरों की तुलना में बेहतर रहने की उम्मीद है. इसके बावजूद, यह शहर समुद्री तूफानों की तेज लहरों और भारी बारिश के प्रति बेहद संवेदनशील है. इस वजह से अतिरिक्त पानी को जमा करने के लिए, यहां और अधिक पानी जमा करने वाली जगहों की आवश्यकता है. शहर भारी बारिश के दौरान बरसाती पानी को जमा करने के लिए पार्क के तालाब को गहरा कर रहा है. साथ ही, दूसरे उपायों पर भी काम कर रहा है.
बॉम ने बताया, "एक विचार ‘मल्टी-यूज डिजाइन' का है. इसका मतलब है कि भविष्य में फुटबॉल का मैदान आसपास के इलाके से थोड़ा नीचा बनाया जा सकता है. भारी बारिश के समय, पानी को वहां मोड़ दिया जाएगा, जिससे वह धीरे-धीरे जमीन के भीतर रिसेगा या भाप बनकर उड़ जाएगा.”
वह आगे बताती हैं, "इसका नुकसान यह है कि साल में 60 दिनों तक इस मैदान का इस्तेमाल नहीं हो पाएगा, निवासियों को इसे स्वीकार करना होगा.” उन्होंने जलवायु अनुकूलन के इन उपायों पर बड़े स्तर पर सार्वजनिक बहस की जरूरत पर भी जोर दिया.
जो लोग जलवायु के बारे में नहीं सोचते, उन तक कैसे पहुंचें?
स्थानीय लोगों को इन समझौतों (नुकसान और फायदे) और इससे जुड़े जोखिमों को समझाने का काम अन्नाफ्राइड स्टर्मर का है. स्टर्मर इसके लिए जानकारी देने वाले कार्यक्रम आयोजित करती हैं, वैज्ञानिकों के साथ लोगों को बाहर ले जाती हैं और आस-पड़ोस के मेलों में जाकर ऐसे लोगों से मिलती हैं जो शायद जलवायु से जुड़े मुद्दों में दिलचस्पी ना लेते हों.
जून में दुनिया के सबसे बड़े सालाना सेलिंग इवेंट ‘कील वीक' में, स्टर्मर ने एक नक्शा दिखाया जिसमें बहुत ज्यादा बारिश से शहर में बाढ़ के खतरे को दिखाया गया था.
बतौर स्टर्मर, "लोगों को अक्सर यह बात काफी दिलचस्प लगती है, क्योंकि पहली नजर में ऐसा नहीं लगता कि इसका जलवायु परिवर्तन से कोई सीधा ताल्लुक है. इसके बजाय, उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया ऐसी होती है, ‘अगर इतनी तेज बारिश हुई, तो मेरा घर तो भारी मुसीबत में पड़ सकता है' या मेरे घर का पिछला हिस्सा तो पानी में डूब जाएगा.”
स्टर्मर ने अक्सर देखा है कि जलवायु परिवर्तन के सैद्धांतिक मुद्दों की तुलना में जलवायु अनुकूलन यानी बचाव के व्यावहारिक तरीकों पर बात करना ज्यादा आसान होता है, क्योंकि इसे लोग आसानी से समझ सकते हैं और यह सीधे उनके सामने नजर आता है.
स्टर्मर ने डीडब्ल्यू को बताया, "सीओ2 उत्सर्जन कम करने के बारे में बात करने की तुलना में, भारी बारिश से निपटने के लिए बेहतर सीवर सिस्टम की जरूरत या अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे लगाने के बारे में बात करना आसान है.”
हाल ही में रिकॉर्ड तोड़ गर्म लहरों ने अनुकूलन से जुड़ी बातचीत को और भी जरूरी बना दिया है. उन्होंने कहा, "लोगों ने महसूस किया कि पहले इतनी गर्मी नहीं पड़ती थी. लोग अब बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बाहर काम करने वालों की सुरक्षा की जरूरत को ज्यादा समझने लगे हैं.”
जलवायु अनुकूलन कोई ‘वैकल्पिक' चीज नहीं है
भले ही जलवायु अनुकूलन की जरूरत को लेकर आम जनता में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन पैसे की तंगी झेल रहे कील शहर के लिए फंड जुटाना अभी भी एक बड़ी समस्या है. जब तक जलवायु संबंधी कदमों को अनिवार्य ना मानकर ऐच्छिक समझा जाएगा, तब तक बजट कम होते ही इन कामों पर गाज गिरना या रुकावट आना तय है.
बॉम ने कहा, "मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि जलवायु अनुकूलन और जलवायु संबंधी कदम उठाना कोई ऐच्छिक या वैकल्पिक जिम्मेदारी है. मैं खुद से बार-बार यही पूछती हूं कि आखिर हमारे पास विकल्प क्या हैं? आखिरकार, यह बात बार-बार साबित हो चुकी है कि जलवायु अनुकूलन और जलवायु संकट को कम करने में निवेश करना अंततः फायदेमंद ही साबित होगा.”


