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जर्मनी के 34 शहरों में सड़कों पर उतरे जेनजी

जर्मनी के 34 शहरों में शनिवार को जेनजी सड़कों पर निकले. वे व्यापक राजनीतिक अधिकार और ज्यादा आशावादी भविष्य मांग रहे हैं.

जर्मनी के 34 शहरों में सड़कों पर उतरे जेनजी
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जर्मनी के 34 शहरों में शनिवार को जेनजी सड़कों पर निकले. वे व्यापक राजनीतिक अधिकार और ज्यादा आशावादी भविष्य मांग रहे हैं. यूरोप भर में जारी प्रदर्शनों के बीच अब जर्मनी में भी युवा अपना प्रदर्शन कर रहे हैं.

जर्मनी में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कर रहे इन लोगों की कई मांगें हैं जिनमें बेहतर स्कूल और हेल्थ केयर से लेकर बढ़ती महंगाई, अनिवार्य सैन्य सेवा के प्रस्तावों और बढ़ती निगरानी का विरोध शामिल है. ये प्रदर्शनकारी जलवायु परिवर्तन को भी बड़ा मुद्दा बता रहे हैं. उनका कहना है कि धरती के बढ़ते तापमान की वजह से प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं. इसीलिए इस संकट से निपटने पर ध्यान देना होगा.

शनिवार के प्रदर्शनों का आयोजन एक सोशल मीडिया मुहिम के जरिए किया गया है जिसे 'जेनजी रेगल्ट' का नाम दिया गया है. इसका मतलब 'जेनजी सब संभाल लेंगे'. इस समूह ने मूल रूप से देश के चार अहम शहरों बर्लिन, कोलोन, फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख में प्रदर्शनों का आयोजन किया, जबकि बाकी 30 शहरों में उससे जुड़े समूह सड़कों पर उतरे.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे. फ्रांस में ऐसे प्रदर्शनों में बहुत हिंसा देखी गई थी. हालांकि सत्ताधारी सीडीयू पार्टी के नेताओं ने फ्रांस जैसे हालात की आशंका जताई, जबकि कई विपक्षी सांसद जेनजी प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं.

ग्रीन पार्टी के संसदीय दल की नेता कैथरीन द्रोएगे ने समाचार एजेंसी डीपीए से कहा, "युवाओं का गुस्सा जायज है क्योंकि संघीय सरकार उनकी इच्छाओं को गंभीरता से नहीं ले रही है." वहीं वामपंथी पार्टी के नेता लुईजी पांतीसानो ने कहा कि यह प्रदर्शन के लिए बिल्कुल सही समय है क्योंकि सरकार नर्सिंग केयर और पेंशन सिस्टम में सुधारों की तैयारी कर रही है, जिसे उन्होंने "सामाजिक क्रूरता बताया."

वहीं प्रदर्शन के आयोजकों ने मीडिया पर आरोप लगाया है कि वह हिंसा का डर फैला रहा है और उनकी मांगों से ध्यान भटका रहा है.


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