फ्रांस में दंगाइयों से वसूला जाएगा नुकसान का पैसा, सरकारी सहायता से भी होगी भरपाई
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और दंगों के दौरान सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। इसके तहत हिंसक भीड़ में शामिल लोगों से न केवल उनके द्वारा सीधे की गई तोड़फोड़ का खर्च वसूला जा सकेगा, बल्कि उन दुकानों और प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी उन पर डाली जा सकती है, जिन्हें उन्होंने खुद नुकसान नहीं पहुंचाया हो।

पेरिस: फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और दंगों के दौरान सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। इसके तहत हिंसक भीड़ में शामिल लोगों से न केवल उनके द्वारा सीधे की गई तोड़फोड़ का खर्च वसूला जा सकेगा, बल्कि उन दुकानों और प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी उन पर डाली जा सकती है, जिन्हें उन्होंने खुद नुकसान नहीं पहुंचाया हो। इस प्रस्ताव को फ्रांस की सीनेट ने इस सप्ताह 229 के मुकाबले 105 मतों से मंजूरी दे दी। इस विधेयक का उद्देश्य हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को आर्थिक रूप से जवाबदेह बनाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाना है। प्रस्ताव के तहत हिंसा की तैयारी कर रहे किसी समूह में जानबूझकर शामिल होने वाले व्यक्ति से दूसरों की ओर से की गई तोड़फोड़ के लिए भी 10 हजार यूरो तक की राशि वसूली जा सकती है। इसके अलावा, पुलिस के भीड़ को हटने का आदेश देने के बावजूद मौके पर मौजूद रहने वाले लोगों पर भी नुकसान की भरपाई का दायित्व डाला जा सकता है।
एक अरब यूरो से अधिक का हुआ था नुकसान
फ्रांस में यह कदम जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के दो सप्ताह से भी कम समय बाद उठाया गया है। इन घटनाओं के दौरान देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के कारण एक अरब यूरो से अधिक का नुकसान हुआ। दंगों के दौरान हजारों दुकानों को निशाना बनाया गया। कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लूटपाट हुई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। आगजनी की घटनाओं में लिमोज शहर का 19वीं सदी का सिटी हॉल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इन घटनाओं ने सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ कारोबारियों और स्थानीय प्रशासन के सामने आर्थिक नुकसान की भरपाई की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
माता-पिता को भी चुकानी पड़ सकती है कीमत
प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू नाबालिगों की ओर से की गई तोड़फोड़ से जुड़ा है। फ्रांस में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा किए गए नुकसान के लिए माता-पिता पहले से जिम्मेदार हैं। नए प्रस्ताव के तहत अदालत का फैसला अंतिम होने के बाद संबंधित परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता से भी नुकसान की राशि काटी जा सकेगी। इसमें परिवारों को मिलने वाले सामाजिक भत्ते, आवास सहायता, स्कूल खुलने के समय दिए जाने वाले भत्ते और न्यूनतम आय सहायता योजना के तहत मिलने वाली रकम शामिल हो सकती है। हालांकि, प्रस्ताव में परिवारों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ राशि सुरक्षित रखने का प्रावधान भी है। इसका उद्देश्य नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने के साथ यह भी देखना है कि संबंधित परिवार पूरी तरह आर्थिक संकट में न फंस जाएं।
इटली में 40 से अधिक शहरों में प्रदर्शन
यूरोप में सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला भी जारी है। समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार, शुक्रवार को इटली में हजारों लोग अधिक वेतन, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और सैन्य खर्च में बढ़ोतरी के विरोध में सड़कों पर उतरे। देश के 40 से अधिक शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। ट्यूरिन में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों और वामपंथी कार्यकर्ताओं को पीछे हटाने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। वहीं, रोम, मिलान और जेनोआ सहित कई अन्य शहरों में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।
आर्थिक असंतोष से बढ़ रही सरकारों की चुनौती
फ्रांस और इटली में हुई घटनाएं यूरोप के सामने मौजूद आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को उजागर करती हैं। बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी मांगें लोगों के असंतोष को बढ़ा रही हैं। फ्रांस में दंगों के नुकसान की भरपाई के लिए प्रस्तावित कानून जहां हिंसा में शामिल लोगों की जवाबदेही तय करने की कोशिश है, वहीं इटली में जारी प्रदर्शन बताते हैं कि आर्थिक और नीतिगत फैसलों को लेकर जनता की नाराजगी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फ्रांस की सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक की आगे की विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके लागू होने की स्थिति में हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों और नाबालिगों के परिवारों पर आर्थिक जिम्मेदारी तय करने के नियमों में बदलाव आ सकता है।


