ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का विस्तार, भारत की चार कंपनियां भी निशाने पर
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। इस बार भारत भी इसकी चपेट में आ गया है। ट्रंप प्रशासन ने चार भारतीय कंपनियों और तीन नागरिकों पर कार्रवाई की है

120 मिलियन डॉलर के आयात पर सवाल
- ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ से 60 संस्थाएं प्रभावित
- भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ सकता है असर
वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। इस बार भारत भी इसकी चपेट में आ गया है। ट्रंप प्रशासन ने चार भारतीय कंपनियों और तीन नागरिकों पर कार्रवाई की है।
कंपनियों पर आरोप
अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत की पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी पर ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खेप भारत लाने में मदद करने का आरोप लगाया। इसके भागीदार इंद्रिसमिया अशरफमिया शेख और हरिश रामचंद्र रंगी को भी प्रतिबंधित किया गया।
अन्य कंपनियां हैं:
- सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड – फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच 69 मिलियन डॉलर का आयात।
- पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड – जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच 25 मिलियन डॉलर का आयात। इसके डायरेक्टर प्रशांत गर्ग पर भी कार्रवाई।
- प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड – मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच 25 मिलियन डॉलर का आयात।
कुल मिलाकर करीब 120 मिलियन डॉलर के आयात पर सवाल उठाए गए हैं।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह अभियान ईरान की बची हुई वित्तीय लाइफलाइन काटने के लिए है। तेल, पेट्रोकेमिकल, शिपिंग, बैंकिंग, सोना, विमानन और डिजिटल एसेट्स को निशाना बनाया जा रहा है। इस दौर में करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
भारत पर असर
भारत ने हाल के वर्षों में ईरान के साथ व्यापार कम किया है, लेकिन चाबहार पोर्ट, चावल, चाय और दवाओं का निर्यात अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए प्रतिबंधों से दुबई आधारित व्यापार और वित्तीय लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं, जिससे भुगतान और शिपिंग में दिक्कतें बढ़ेंगी।
एशिया नीति विशेषज्ञ इवान फेगेनबाम ने कहा कि इन प्रतिबंधों से अमेरिकी-भारत संबंधों पर असर पड़ सकता है, जो पहले से ही टैरिफ और रूस से जुड़े मुद्दों के कारण तनावपूर्ण हैं।


