यूरोप: कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें
फ्रांस, इटली, स्पेन और अल्बानिया समेत यूरोप के कई देशों में बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं.

फ्रांस, इटली, स्पेन और अल्बानिया समेत यूरोप के कई देशों में लोग सड़कों पर हैं. बीते हफ्तों में हुए प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं. प्रदर्शनकारियों में बड़ा तबका युवाओं का है.
यूरोप के कई देशों में शनिवार, 24 अक्टूबर को बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए. लोग जीवनयापन के बढ़ते खर्च, कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. फ्रांस, इटली, स्पेन और अल्बानिया में लोगों और पुलिस के बीच झड़पों की खबरें भी आई हैं. पेरिस, मिलान और बार्सिलोना शहरों में स्थानीय पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है. बीते सप्ताहांत, फ्रांस के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिनमें कई दुकानों और लग्जरी स्टोरों को लूटा भी गया था. इस हफ्ते हो रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर कई यूरोपीय शहरों में दुकानदारों और स्टोर मालिकों ने मजबूत बोर्ड या लोहे की जालियों से अपने स्टोरों को सुरक्षित रखने की कोशिश की है.
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फ्रांस में हिंसा में कमी, गिरफ्तारियां बढ़ीं
शनिवार को फ्रांस के कई शहरों में लोग स्कूलों की फंडिंग बढ़ाने और बढ़ती महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे. पेरिस का मार्च शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ, लेकिन पूर्वी पेरिस में प्रदर्शन के आखिरी पड़ाव के पास नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर सामान और पटाखे फेंके. जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के बादल छोड़े, तेज आवाज वाले ग्रेनेड दागे और वॉटर कैनन से पानी की बौछार की.
सरकार ने कहा है कि ताजा घटनाक्रम में पुलिस ने करीब 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया है. पिछले हफ्ते हुए प्रदर्शनों में करीब 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. गृह मंत्री लॉरां नुनेज ने कहा कि70,000 पुलिसकर्मियों, जिन्हें हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद गाड़ियों समेत अन्य तरीकों से मदद दी गई, ने पिछले वीकेंड हुई बड़े पैमाने की लूटपाट और दुकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं को दोहराने से रोकने में मदद की. गृह मंत्रालय ने देशभर में प्रदर्शनकारियों की संख्या चार से साढ़े पांच लाख तक बताई. वहीं शनिवार के कुछ प्रदर्शनों को आयोजित करने में मदद करने वाली सीजीटी यूनियन ने यह संख्या करीब आठ लाख आंकी.
अगले साल मई में फ्रांस के मतदाता राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों का उत्तराधिकारी चुनेंगे, ऐसे में ये प्रदर्शन उनके कार्यकाल के आखिरी महीनों में एक नई चुनौती बनकर सामने आए हैं. धुर-दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी ने उनकी सरकार पर जनता की सुरक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया और लोगों से कहा कि वे अपना गुस्सा उसकी उम्मीदवार मरीन ले पेन के समर्थन में वोट में बदलें. वामपंथी खेमे में राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार जाँ-लुक मेलाँशों ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है.
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इटली: प्रदर्शनकारियों में बहुत से युवा नाबालिग
शनिवार को हजारों युवाओं ने मिलान, रोम और तुरिन समेत इटली के कई शहरों की सड़कों पर मार्च किया. इस बार प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस और सैनिकों को तैनात किया था, ताकि पिछले हफ्ते प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक झड़पों और लूटपाट को दोबारा होने से रोका जा सके. प्रशासन अपनी कोशिशों में काफी हद तक सफल रहा. ये प्रदर्शन शिक्षा और भ्रष्टाचार से लेकर युद्ध-विरोधी आंदोलनों, पेंशन और आवासीय संकट जैसे कई मुद्दों को लेकर हो रहे हैं. मिलान में कई दुकानों और खासकर ओमेगा, टिफनी और गुची जैसे लग्जरी स्टोरों ने अपनी सामने की खिड़कियों पर बोर्ड लगा दिए. एप्पल ने भी अपना स्टोर बंद कर दिया, जो प्रदर्शन पूरा हो जाने के बाद भी बंद ही रहा.
करीब 30 धुर-दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं का एक समूह, जिसकी पहचान इंटर मिलान फुटबॉल क्लब से जुड़े हुड़दंगियों के तौर पर की गई, कुछ देर के लिए सामने आया और प्रवासी-विरोधी और मुस्लिम-विरोधी नारे लगाने लगा, लेकिन पुलिस ने उसे एक किनारे कर दिया. मिलान पुलिस का कहना है कि पिछले हफ्ते की हिंसा और लूटपाट में कम उम्र के करीब 2,000 युवा प्रदर्शनकारी शामिल थे, जिनमें कई "नैचुरलाइज्ड, दूसरी पीढ़ी के इतालवी” थे, साथ ही विदेशी नागरिक भी थे. उन प्रदर्शनों के बाद दो दिनों में पुलिस ने 45 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 34 नाबालिग थे.
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स्पेन में आम चुनाव से पहले गहराता असंतोष
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों रिटायर्ड लोगों और अन्य नागरिकों ने शनिवार को शांतिपूर्वक मार्च किया. उनकी मांग थी कि सार्वजनिक पेंशन में दखलंदाजी न की जाए. ये प्रदर्शन अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले हुए हैं. प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सोशलिस्ट पार्टी ने रूढ़िवादी विपक्षी पॉपुलर पार्टी की आलोचना की है. सोशलिस्ट पार्टी ने कहा कि पॉपुलर पार्टी सार्वजनिक पेंशन के निजीकरण की ओर इशारा कर रही है. बीते कुछ हफ्तों से स्पेन में आवासीय संकट पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. देश में हाल के वर्षों में किराए और घरों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि कई स्पेनवासियों के लिए यह खर्च उठाना मुमकिन नहीं है.
स्पेनिश मीडिया ने शनिवार को बताया कि बार्सिलोना में सैकड़ों युवा प्रदर्शनकारियों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की और कूड़ेदानों में आग लगा दी, जिसके बाद करीब 128 लोगों को गिरफ्तार किया गया. स्पेनिश अखबार एल पाईस और कातालान ब्रॉडकास्टर बेतेवे की रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में करीब एक चौथाई नाबालिग थे. रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पर शहर के केंद्रीय हिस्से में बिना अनुमति वाले प्रदर्शन की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए वहां पहुंचे थे.
अल्बानिया में झड़पें और इमारतों में आगजनी
अल्बानिया की राजधानी तिराना में दंगा-रोधी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के बड़े समूहों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. इनमें से कुछ लोगों ने सरकारी इमारतों में आग लगा दी और पुलिस पर चीजें फेंकीं. प्रशासन ने कहा कि शनिवार को 2,500 पुलिसकर्मी सड़कों पर गश्त कर रहे थे. हाई स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र कम ट्यूशन फीस, शिक्षा में ज्यादा निवेश की मांग और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से कुछ छात्र एक बड़े सरकार-विरोधी आंदोलन में भी शामिल हो गए हैं, जो सोशलिस्ट प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहा है. अल्बानिया यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है.
पुर्तगाल में सस्ते आवास की मांग
शनिवार को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में सस्ते आवास की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पूरे शहर में मार्च किया. उन्होंने प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो की सरकार के हालिया कदमों को भी निशाना बनाया है, जिनमें सालाना किराया बढ़ोतरी की सीमा में ढील देना और किराया न चुकाने वाले किरायेदारों को बेदखल करने की प्रक्रिया आसान बनाना शामिल है. मोंटेनेग्रो इन कदमों का बचाव करते हैं और कहते हैं कि इनका मकसद किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच भरोसा मजबूत करना और रेंटल मार्केट को बढ़ावा देना है. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ये कदम संतुलित नहीं हैं और किरायेदारों को और कमजोर स्थिति में डालते हैं.
बेल्जियम में कई महीनों से हो रहे हैं प्रदर्शन
रॉयटर्स के चश्मदीदों और बेल्जियम मीडिया के मुताबिक, शनिवार को राजधानी ब्रसेल्स में बेल्जियम पुलिस और सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. ये प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में बेहतर स्थितियों की मांग कर रहे थे. चश्मदीदों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया.
बेल्जियम में हाल के महीनों में लगातार रैलियां हुई हैं, जिनमें ज्यादातर युवा प्रदर्शनकारी जुटे हैं. वे शिक्षा के लिए ज्यादा फंडिंग की मांग कर रहे थे और पुलिस पर जरूरत से ज्यादा आक्रामकता का आरोप लगा रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने रोड साइन, रेंटल स्कूटरों और साइकिलों का ढेर लगाकर उसमें आग लगाने की कोशिश की. ब्रसेल्स पुलिस ने दोपहर बाद एक बयान में कहा कि कोई बड़ी घटना नहीं हुई.
सोशल मीडिया की भूमिका पर यूरोपीय सांसदों के सवाल
इससे पहले यूरोपीय सांसदों ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को ईयू से फ्रांस समेत सदस्य देशों में प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका की तुरंत जांच करने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रसेल्स को "आखिरी उपाय” के तौर पर एक्सेस रोकने के लिए तैयार रहना चाहिए. यूरोपीय संसद के 30 से ज्यादा सदस्यों ने ईयू सांसद स्टेफनी यॉन-कोर्तां के पत्र पर साथ में हस्ताक्षर किए हैं. यह पत्र ईयू की टेक प्रमुख हेना विर्क्कुनेन को भेजा गया है. इसमें मांग की गई है कि ब्रसेल्स अपने डिजिटल कंटेंट नियमों का इस्तेमाल करके प्लेटफॉर्मों से जवाब मांगे.


