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घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को बना रहे मजबूत, कर सुधारों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में लचीलापन और लगातार सुधारों के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है

घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था को बना रहे मजबूत, कर सुधारों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
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वाशिंगटन। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं के निर्यात में लचीलापन और लगातार सुधारों के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही है। सेवा क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं और निवेश में बढ़ोतरी इस वृद्धि को समर्थन दे रही हैं। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं और बेहतर बुनियादी ढांचा उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायक साबित हुए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि निजी उपभोग अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अहम आधार बना हुआ है। कम महंगाई, कर प्रणाली में सुधार और उपभोक्ता भरोसे में बढ़ोतरी के चलते खुदरा मांग स्थिर बनी हुई है। 2025 के अंत तक उपभोक्ता विश्वास महामारी के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

घरेलू मांग ने वस्तुओं के निर्यात में आई कमजोरी की भरपाई करने में मदद की है। टैरिफ संबंधी व्यवधानों से प्रभावित होकर माल की शिपमेंट में मामूली वृद्धि हुई, लेकिन सेवाओं का निर्यात मजबूत बना रहा और हाल के महीनों में इसमें लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

सूचना प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक सेवाओं के विस्तार से न केवल निर्यात आय बढ़ी है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के नेतृत्व में 2023 से 2025 के बीच विनिर्माण में सालाना 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौतों से भारत के व्यापारिक परिदृश्य में और सुधार की उम्मीद है। इन समझौतों के लागू होने पर अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क में कमी आएगी और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इन सुधारों का सकारात्मक असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। कम कीमतों और आय में वृद्धि के जरिए उपभोग में विस्तार होने की संभावना है।

आर्थिक स्थिरता भी भारत की मजबूती का एक प्रमुख कारण रही है। खाद्य कीमतों में कमी के चलते 2025 के दौरान महंगाई दर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के भीतर बनी रही। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती से उपभोग और निवेश को बढ़ावा मिला है।

वित्तीय क्षेत्र भी स्थिर बना हुआ है, जहां बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत है और ऋण उपलब्धता में सुधार हुआ है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है।

विश्व बैंक ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास, कर सुधारों और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने जैसे संरचनात्मक सुधारों ने भारत की उत्पादकता और निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों जैसे बाहरी जोखिम बने रहने के बावजूद भारत की मजबूत घरेलू बुनियाद और सुधार की दिशा इसे विकास को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है।

हाल के वर्षों में भारत ने विकास पूर्वानुमानों से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, जो इसकी दृढ़ता और स्थिर नीतिगत समर्थन को दर्शाता है। दीर्घकाल में, निरंतर सुधार और निवेश इसकी आर्थिक प्रगति को और मजबूत कर सकते हैं।


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