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खुलासा: अमेरिका में AI बहस को प्रभावित करने के लिए चीन कर रहा 'ChatGPT' का इस्तेमाल, खुफिया रिपोर्ट में दावा

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के एक वरिष्ठ नेता की ओर से चीन पर अमेरिका की खुली राजनीतिक व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

खुलासा: अमेरिका में AI बहस को प्रभावित करने के लिए चीन कर रहा ChatGPT का इस्तेमाल, खुफिया रिपोर्ट में दावा
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वॉशिंगटन। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के एक वरिष्ठ नेता की ओर से चीन पर अमेरिका की खुली राजनीतिक व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

यह आरोप ओपनएआई के खुलासे के बाद लगाया गया है, जिसमें बताया गया है कि चीन से जुड़े कुछ लोगों ने अमेरिका में चल रही बहसों को प्रभावित करने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। इस मामले में अमेरिकी नेता का कहना है कि इन लोगों ने अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार जैसे मुद्दों पर जनमत को प्रभावित करने के लिए सामग्री तैयार की।

'हाउस सेलेक्ट कमिटी ऑन द चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी' के चेयरमैन और अमेरिकी प्रतिनिधि जॉन मूलनार ने यह आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार अमेरिका में आम लोगों के बीच हो रही वैध चर्चाओं में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही थी।

मूलनार ने कहा, "डेटा सेंटरों को लेकर जायज सवाल हैं और अमेरिकी लोगों को इनके जवाब मिलने चाहिए क्योंकि कंपनियां हमारे देश के भविष्य के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही हैं। हम खुशकिस्मत हैं कि हम एक आजाद और खुले समाज में रहते हैं जहां हम इन विषयों पर बहस कर सकते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "दुर्भाग्य से, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी हमारे खुलेपन का फायदा उठाती है और अपने 'यूनाइटेड फ्रंट' संगठनों और दूसरी संस्थाओं के जरिए अमेरिकियों को बांटने का काम करती है। उसके सरकारी मीडिया ने अंग्रेजी भाषा में ऐसे लेख छापे हैं, जिनमें साफ तौर पर डेटा सेंटर बनाने के मुद्दे पर अमेरिकियों को बांटने की कोशिश की गई है और चीन में कुछ लोग छिपे हुए तरीकों से ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं।"

ओपनएआई की जून 2026 की थ्रेट रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने चैटजीपीटी अकाउंट्स के दो समूहों पर प्रतिबंध लगा दिया। इन अकाउंट्स के बारे में आशंका थी कि उनका संचालन "चीन से शुरू हुआ था"। इन अकाउंट्स का इस्तेमाल ऐसे गुप्त प्रभाव अभियानों के लिए किया गया, जिनका उद्देश्य अमेरिकी एआई नीति और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से जुड़ी बहसों को प्रभावित करना था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले ऑपरेशन, जिसे 'डेटा सेंटर बैंडवैगन कैंपेन' नाम दिया गया था, के तहत सोशल मीडिया पर ऐसे कमेंट्स और तस्वीरें पोस्ट की गईं, जिनमें दावा किया गया कि एआई डेटा सेंटरों की वजह से आम अमेरिकियों के लिए बिजली की कीमतें बढ़ रही हैं।

ओपनएआई की ओर से कहा गया कि यह कंटेंट संभवतः नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए पोस्ट किया गया था और इसका मकसद एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बढ़ती ऊर्जा लागत के बारे में चिंताओं को बढ़ाना था।

दूसरे ऑपरेशन 'टेक एंड टैरिफ्स' के तहत ऐसे कमेंट्स और राजनीतिक कार्टून तैयार किए गए, जिनमें अमेरिकी टैरिफ की आलोचना की गई और वॉशिंगटन को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दबदबा बनाने की कोशिश करने वाले के तौर पर दिखाया गया। ओपनएआई ने कहा कि ऑपरेटर्स ने सिस्टम को खास तौर पर निर्देश दिया था कि वह सिर्फ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिखाए और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का जिक्र न करे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हीं नेटवर्क्स में से कुछ ने यह झूठा दावा भी फैलाया कि चैटजीपीटी यूजर्स का डेटा लीक हो गया है। ओपनएआई की ओर से कहा गया, "ये आरोप पूरी तरह से झूठे थे।"

कंपनी ने यह भी कहा कि इन अभियानों का ऑनलाइन प्रभाव बहुत सीमित रहा। ओपनएआई के अनुसार, सोशल मीडिया पर की गई इन कोशिशों को कोई उल्लेखनीय या प्रामाणिक सहभागिता नहीं मिली और उनकी अपनी गतिविधियों के अलावा कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला।

फिर भी, कंपनी ने चेतावनी दी कि इन अभियानों का महत्व उन नैरेटिव्स में था, जिनका परीक्षण किया जा रहा था। कंपनी की ओर से कहा कि इन कैंपेंस ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी नीतियों को आर्थिक चिंताओं और लोगों की चिंताओं से जोड़ने की कोशिश की, एआई, ऊर्जा लागत और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा पर चल रही घरेलू बहसों में विदेशी ताकतों को शामिल करने का प्रयास किया। मूलिनार ने कहा कि उनकी कमिटी डेटा सेंटर के डेवलपमेंट से जुड़े विदेशी प्रभाव की संभावित कोशिशों की जांच जारी रखेगी।

उन्होंने कहा, "मैं और मेरी कमिटी डेटा सेंटर पर हो रही बहस में चीन के संभावित बुरे असर की जांच जारी रखेंगे। मुझे उम्मीद है कि इन बहसों में शामिल सभी अमेरिकी एक-दूसरे के साथ सम्मान से पेश आएंगे।"

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला तेज हो रहा है। दोनों देश एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस्ड कंप्यूटिंग क्षमता और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहे हैं, जिन्हें आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।



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