अमेरिका-ईरान जंग पर ब्रेकथ्रू, MoU साइन लेकिन ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से जारी जंग को रोकने के लिए दोनों देशों ने एक अहम समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं

जिनेवा में ऐतिहासिक सेरेमनी: इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग से दुनिया दंग
- तेल बाजार में हलचल: होर्मुज की खाड़ी खुलते ही कीमतों में उछाल
- ट्रंप का सख्त अल्टीमेटम: "ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेगा"
- ओमान की विवादित भूमिका: बातचीत के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई
अमेरिका। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से जारी जंग को रोकने के लिए दोनों देशों ने एक अहम समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं। इस समझौते को MoU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) कहा जा रहा है, जिसे संकट का सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने इस डील पर नया सस्पेंस खड़ा कर दिया है।
समझौते की अहम बातें
- इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से MoU पर साइन किए।
- जिनेवा सेरेमनी: औपचारिक साइनिंग सेरेमनी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होगी।
- फ्रेमवर्क समझौता: यह कोई पूरी शांति संधि नहीं है, बल्कि एक ढांचा है जो आगे की बातचीत की दिशा तय करेगा।
- न्यूक्लियर प्रोग्राम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिलहाल कोई समाधान नहीं निकला है, इस पर आगे अलग से बातचीत होगी।
होर्मुज की खाड़ी पर असर
जंग के दौरान होर्मुज की खाड़ी से जहाजों का आना-जाना लगभग बंद हो गया था, जिससे तेल की कीमतें और बाजार अस्थिर हो गए थे। अब समझौते के बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार तक यह पूरी तरह खुल जाएगा।
ट्रंप का सख्त रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को तब तक किसी तरह की प्रतिबंध राहत नहीं मिलेगी जब तक वह समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता। समझौते का पूरा पाठ शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा।
ओमान की भूमिका और विवाद
बातचीत से पहले ओमान ने मध्यस्थता की थी, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वे ओमान की भूमिका से खुश नहीं थे। इससे साफ होता है कि बातचीत आसान नहीं रही।
अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान के विदेशों में जब्त किए गए पैसे छोड़ सकता है और कुछ आर्थिक पाबंदियां हटा सकता है। लेकिन यह तभी होगा जब ईरान "सत्यापन-योग्य और अपरिवर्तनीय कदम" उठाएगा।


