4 मार्च 2026 की बड़ी खबरें और न्यूज अपडेट्स
पांच दिन से जारी ईरान युद्ध का असर अब धीरे धीरे पूरी दुनिया पर दिखना शुरू हो रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह युद्ध लंबा चला तो दुनिया भर में सामान की किल्लत और महंगाई जैसी समस्याएं सामने लगेंगी

पांच दिन से जारी ईरान युद्ध का असर अब धीरे धीरे पूरी दुनिया पर दिखना शुरू हो रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह युद्ध लंबा चला तो दुनिया भर में सामान की किल्लत और महंगाई जैसी समस्याएं सामने लगेंगी.
युद्ध छेड़ने वाले ट्रंप की ताकत में लगाम कसने की कोशिश
ट्रंप की धमकी के जबाव में स्पेन के समर्थन में उतरे फ्रांस और ईयू
श्रीलंका के पास डूबा ईरानी नौसेना का युद्धपोत, 101 लोग लापता
शोध में 78% शहरी आबादी के शरीर में छिपे जहर का खुलासा
रिपोर्ट: इराक में कुर्द गुटों को हथियारबंद कर सकते हैं ट्रंप
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के सबसे बड़े अड्डे पर मिसाइल हमला
ईरान युद्ध: भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
ईरान हमले पर इस्राएल वाले बयान से पीछे हटे रूबियो
ईरान युद्ध लंबा चला तो दुनिया की हालत खस्ता होने का डर
ईरान युद्ध ने खाड़ी के देशों से आने वाली पेट्रोलियम सप्लाई को बाधित कर दिया है. लेकिन बात सिर्फ पेट्रोल, डीजल या तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) तक ही सीमित नहीं है. भारत से दुनिया भर में सप्लाई होने वाली दवाओं, एशियाई देशों से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों व रासायनिक खाद का बड़ा हिस्सा भी खाड़ी के रास्ते ही यूरोप और पूरे अमेरिकी महाद्वीप तक पहुंचता है.
कतर और ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडार हैं, लेकिन दोनों देशों में फिलहाल उत्पादन ठप है. सिरकीज यूनिवर्सिटी में सप्लाई चेन प्रैक्टिस के प्रोफेसर पैट्रिक पेनफील्ड कहते हैं, "यह वैश्विक सप्लाई चेन में एक बड़ा असर डालने लगा है. अगर संघर्ष आगे बढ़ता रहा, तो आपको कुछ चीजों की किल्लत और कुछ मामलों में बहुत ज्यादा महंगाई देखने को मिलेगी."
शिपिंग डाटा को ट्रैक करने वाली संस्था क्लार्कसन्स रिसर्च के मुताबिक, करीब 3,200 जहाज या वैश्विक जहाजरानी परिवहन का चार फीसदी टन हिस्सा, फारस की खाड़ी के कारण फंसा है. इनमें से 1,231 जहाज सिर्फ खाड़ी के भीतर ऑपरेट करते हैं. करीब 500 जहाज खाड़ी के बाहर के बंदरगाहों में इंतजार कर रहे हैं.
ईरान के पास स्थित होरमुज जलडमरूमध्य, दुनिया भर में एल्यूमिनियम की सप्लाई के लिए भी अहम है. इंटरनेशनल एल्यूमिनियम इंस्टीट्यूट (IAI) के मुताबिक, बहरीन, कतर, सऊदी अरब और यूएईए की धातु कंपनियां, हर साल 50 लाख टन से ज्यादा एल्यूमिनियम होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही सप्लाई करती हैं. यह दुनिया की कुल एल्यूमिनियम सप्लाई का करीब 8 फीसदी हिस्सा है.
एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला, स्वेज नहर जलमार्ग अगर काम न आए तो जहाजों को दक्षिण अफ्रीका होते हुए V आकार वाला समुद्री रूट लेना होगा. इससे यूरोप और एशिया के बीच यात्रा कम से कम दो हफ्ते लंबी भी होगी और खर्चीली भी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी नौसेना होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की हिफाजत करेगी. वहीं ईरान का कहना है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को कभी भी निशाना बनाया जा सकता है.
चीन की खुफिया एजेंसी की मदद के आरोप में ब्रिटेन में तीन गिरफ्तार
ब्रिटेन की पुलिस ने चीन की खुफिया एजेंसी की मदद करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. बुधवार को लंदन में 39 वर्षीय एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया, जबकि वेल्स में 68 और 43 वर्ष के दो अन्य संदिग्धों को पकड़ा गया. तीनों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 2023 के तहत गिरफ्तार किया गया है, जिसके जरिए जासूसी से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जा सकता है.
पुलिस ने गिरफ्तारियों के बाद लंदन, वेल्स और स्कॉटलैंड में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया. अधिकारियों ने बताया कि ये तलाशी उन स्थानों पर की गईं, जहां संदिग्ध या तो रहते थे या उनसे जुड़े हुए थे. जांच का नेतृत्व काउंटर-टेररिज्म यूनिट कर रही है, जो मामले की संभावित विदेशी हस्तक्षेप की दिशा में पड़ताल कर रही है.
काउंटर-टेररिज्म पुलिसिंग लंदन की कमांडर हेलेन फ्लानगन ने एक बयान में कहा कि मामला गंभीर है, लेकिन जनता के लिए किसी फौरन खतरे का कोई संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि जांच जारी है और अभी किसी और जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. तीनों संदिग्ध फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं.
ट्रंप की धमकी के जबाव में स्पेन के समर्थन में उतरे फ्रांस और ईयू
फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों का कहना है कि वह स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. ईरान युद्ध के लिए अमेरिका और इस्राएल की कड़े शब्दों में निंदा करने वाले सांचेज को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की चेतावनी का शिकार होना पड़ा है. सांचेज ने अमेरिका को स्पेन के नौसैनिक और वायुसैनिक अड्डे ईरान के खिलाफ इस्तेमाल भी नहीं करने दिए.
इसके बाद ट्रंप ने कहा कि वे स्पेन से नाखुश हैं. ईरान पर हमलों को लापरवाह और गैरकानूनी बताने वाले सांचेज को ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा, "तो हम स्पेन के साथ सारा कारोबार तोड़ सकते हैं. हम स्पेन के साथ कुछ भी नहीं करना चाहते हैं."
ट्रंप की इस धमकी के बाद गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, "राष्ट्रपति ने अभी थोड़ी देर पहले ही प्रधानमंत्री सांचेज से बात की है और हाल ही में स्पेन को दी गई आर्थिक दादागिरी की धमकी के जवाब में फ्रांस के यूरोपीय बंधुत्व को व्यक्त किया."
गुरुवार को यूरोपीय आयोग के प्रेसीडेंट अंटोनियो कोस्टा ने भी एक्स पर लिखा, "ईयू हमेशा इस बात को पक्का करेगा कि उसके सदस्य देश के हित पूरी तरह सुरक्षित रहें."
स्पेन यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है. ईरान युद्ध पर अमेरिका और इस्राएल के विरुद्ध यूरोपीय संघ में अब तक सबसे कड़ी प्रतिक्रिया मैड्रिड ने ही दी है.
ईरान युद्ध के बीच ट्रंप के साथ संवाद को लेकर स्पेन ने जर्मनी के रुख की भी आलोचना की है. मंगलवार को वॉशिंगटन में जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के मसले पर जर्मनी के रुख से खुश हैं. इसी दौरान उन्होंने स्पेन को चेतावनी भी दी. स्पेन के विदेश मंत्री होजे मानुएल अल्बारेस ने कहा कि जर्मन चांसलर ट्रंप के सामने यूरोपीय एकता का प्रदर्शन करने में नाकाम रहे.
एनआईए ने कहा पहलगाम हमले में इस्तेमाल गोप्रो चीन में "एक्टिवेट" हुआ था
जम्मू स्थित एक एनआईए अदालत ने दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल हुए हमले की जांच को आगे बढ़ाते हुए चीन की सक्षम न्यायिक प्राधिकरण को लेटर रोगेटरी (अनुरोध पत्र) जारी किया है. अदालत का यह कदम एनआईए के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल संदीप चौधरी की उस अर्जी के बाद आया, जिसे उन्होंने बीएनएसएस की धारा 112 के तहत दायर किया था. यह धारा भारतीय अदालतों को विदेश में मौजूद संभावित सबूतों के संबंध में विदेशी प्राधिकारियों को अनुरोध भेजने का अधिकार देती है.
एनआईए ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सामग्री जब्त की गई है, जो हमले की साजिश और उसे अंजाम से जुड़ी हुई है. इनमें एक महत्वपूर्ण उपकरण गोप्रो कैमरा है. एजेंसी का दावा है कि आतंकी मॉड्यूल की प्री-रैकॉनिसेंस गतिविधियों, आने-जाने की लोकेशन और ऑपरेशनल तैयारियों से यह जुड़ा है. एजेंसी का कहना है कि इस कैमरे की सप्लाई चेन और अंतिम उपयोगकर्ता की जानकारी जांच के लिए बेहद अहम है.
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय गाइड की मौत हो गई थी. एनआईए इस हमले को अंजाम देने वाले मॉड्यूल और उनके विदेशी लिंक का पता लगाने में जुटी है. चीन को भेजा गया यह लेटर रोगेटरी इसी उद्देश्य से जारी किया गया है, ताकि हमले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पुष्टि हो सके.
युद्ध छेड़ने वाले ट्रंप की ताकत में लगाम कसने की कोशिश
अमेरिकी सांसद बुधवार को एक अहम वोटिंग में हिस्सा लेने जा रहे हैं. इस प्रक्रिया के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति की युद्ध छेड़ने की शक्तियों पर मतदान होगा. "वॉर वोट" यानी युद्ध मतदान कहे जा रहे इस प्रस्ताव का मकसद, ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों को रोकना है. साथ ही आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी को आवश्यक बनाना है.
विपक्षी दल, डेमोक्रैट्स के इस प्रस्ताव को डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों का समर्थन भी मिला है. प्रस्ताव का समर्थन करने वाले नेताओं का कहना है कि, अमेरिकी संविधान के तहत, युद्ध का एलान करने की शक्ति सिर्फ संसद के हाथ में वापस आनी चाहिए.
प्रस्ताव के लीड स्पॉन्सर और वर्जीनिया के डेमोक्रैटिक सांसद टिम कैन ने कहा, "मुझे लगता है कि इस मसले पर कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के हर सदस्य को रिकॉर्ड पर रखना जरूरी है. अगर वॉर वोट पर 'हां' या 'ना' मत डालने का साहस आप में नहीं है तो, हमारे बेटों और बेटियों को जान जोखिम में डालकर युद्ध में भेजने का दुस्साहस आपने कैसे किया?"
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को जरा सा बहुमत है. रिपब्लिकन सांसद अब तक राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों में कटौती को टालते आए हैं. सीनेट के बाद गुरुवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इसी मुद्दे पर वोटिंग हो सकती है.
चार साल बाद जर्मनी में डीजल के दाम में तेज उछाल
जर्मनी में लंबे समय बाद डीजल का दाम दो यूरो प्रति लीटर के पार पहुंचा है. जर्मनी की ऑटोमोबाइल एसोसिएशन, ADAC के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से बुधवार सुबह पूरे जर्मनी में डीजल का औसत दाम 2 यूरो प्रति लीटर के पार चला गया.
पांच दिन से जारी ईरान युद्धकी वजह से खाड़ी के देशों से आने वाली तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो चुकी है. ईरान का कहना है होरमुज जलडमरूमध्य पूरी तरह उसके नियंत्रण में हैं और वह इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई कर सकता है. दुनिया को अपनी ऊर्जा जरूरतों की करीब 20 फीसदी सप्लाई इसी रास्ते से मिलती है.
जर्मनी करीब 30 देशों से कच्चा तेल आयात करता है. यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा जरूरतों का सबसे बड़ा हिस्सा, अमेरिका, लीबिया, कजाखस्तान और ब्रिटेन से खरीदती है. सड़क परिवहन और माल ढुलाई के लिए डीजल बेहद अहम ईंधन है. डीजल का दाम बढ़ने से कई क्षेत्रों में महंगाई बढ़ने के आसार पैदा होने लगते हैं. इससे पहले नवंबर 2022 में जर्मनी में डीजल दो यूरो प्रति लीटर के पार गया था.
श्रीलंका के पास डूबा ईरानी नौसेना का युद्धपोत, 101 लोग लापता
श्रीलंका के तट के पास ईरानी जहाज पर हुए एक पनडुब्बी हमले के बाद कम से कम 101 लापता हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बुधवार को यह जानकारी श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने दी. अभी यह साफ नहीं है कि ईरानी नौसेना के इस जहाज पर हमला किसने किया.
आईआरआईएस डेना, करीब 94 मीटर लंबा युद्धपोत था. मिसाइल और हेलीपैड से लैस यह युद्धपोत 2010 से ईरानी नौसेना का हिस्सा था. रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के वक्त जहाज पर 180 नौसैनिक तैनात थे.
बुधवार को श्रीलंकाई नौसेना के प्रवक्ता ने पहले 101 लोगों के लापता होने की रिपोर्टों को गलत बताया. लेकिन इसके बाद नौसेना के सूत्र ने रॉयटर्स से कहा, "इस वक्त हम जानते हैं कि 79 लोगों को रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से एक की हालत गंभीर है. और माना जा रहा है कि बाकी 101 लोग लापता हैं और जहाज डूब चुका है."
श्रीलंका के विदेश मंत्री ने भी संसद को बताया कि जहाज से आपातकालीन संदेश मिलने के बाद सुबह करीब छह बजे राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया. विदेश मंत्री विजेता हेरात ने इस हमले के खिलाफ कार्रवाई करने का एलान भी किया. श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई है.
ब्रिटेन ने बंद किया चार देशों के लिए स्टूडेंट वीजा
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने चार देशों के नागरिकों के लिए स्टूडेंट वीजा पर "इमरजेंसी ब्रेक" लगाने का एलान किया है. मंगलवार को गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान के नागरिकों को अब यह वीजा नहीं दिया जाएगा. ब्रिटिश सरकार के मुताबिक, इन देशों के नागरिक छात्र के रूप में ब्रिटेन आते हैं और आगमन के बाद शरण का आवेदन करते हैं.
अफगानिस्तान के लिए "स्किल्ड वर्क वीजा" भी निलंबित कर दिया गया है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, वीजा संबंधी ये सख्ती कानूनी तरीके से ब्रिटेन में दाखिल होकर शरण मांगने वाले के खिलाफ कार्रवाई के तहत की जा रही है.
2021 से अब तक करीब ऐसे 1,35,000 मामले आए हैं, जिनमें लोग कानूनी रूप से वीजा लेकर ब्रिटेन में दाखिल हुए और फिर शरण का अधिकार मांगने लगे. गृह विभाग के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच ऐसा करने वालों में अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान के नागरिकों की संख्या में करीब 470 फीसदी बढ़त दर्ज की गई.
अमेरिका और इस्राएल पर फिर बरसे स्पेन के प्रधानमंत्री सांचेज
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने देश को संबोधित करते हुए ईरान पर अमेरिका और इस्राएली हमलों की फिर से कड़ी निंदा की है. टेलीविजन संबोधन में सांचेज ने कहा, "मानवता की बड़ी त्रासदी ऐसे ही शुरू होती है....आप करोड़ों लोगों की जिंदगी के साथ मौत का खेल नहीं खेल सकते."
स्पैनिश प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया अपनी समस्याएं संघर्षों और बमों से नहीं सुलझा सकती है, "स्पेन सरकार का रुख चार शब्दों में समेटा जा सकता है: नो टू द वॉर."
यह दूसरा मौका है जब स्पेन के प्रधानमंत्री ने खुले शब्दों में ईरान पर इस्राएली और अमेरिकी हमलों की निंदा की है. सांचेज इन हमलों को लापरवाह और गैरकानूनी बता चुके हैं. सांचेज ने तेहरान पर हमलों के लिए अपने नौसैनिक और वायुसैनिक अड्डे देने से भी इनकार किया था.
असल में सांचेज के कड़े रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्पेन के साथ कारोबारी संबंध काटने की धमकी दी. टेलीविजन पर देश को संबोधित करते हुए सांचेज ने इसी धमकी का जवाब दिया.
यूरोपीय संघ का सदस्य स्पेन, नाटो का सदस्य भी है. यूरोपीय संघ में स्पेन, ईरान पर हमले की इतने कड़े शब्दों में निंदा करने वाला अकेला देश है.
इस्राएली F-35 ने गिराया ईरान का विमान, ईरान ने दागे 40 रॉकेट
इस्राएली सेना ने बुधवार, 4 मार्च घोषणा की कि उसने ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमलों की शुरुआत की है. आईडीएफ ने अपने टेलीग्राम चैनल पर बताया कि ये हमले ईरान के "लॉन्च साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचे" को निशाना बना रहे हैं.
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, राजधानी तेहरान में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं. इस्राएली सूत्रों ने दावा किया है कि शनिवार को शुरू हुए युद्ध के बाद यह दसवां बड़ा हमला है.
F-35 ने गिराया ईरानी विमान
इस्राएली सेना ने यह भी बताया है कि एक इस्राएली F‑35 'अदीर' लड़ाकू विमान ने तेहरान के ऊपर ईरान के Yak‑130 ट्रेनर एयरक्राफ्ट को मार गिराया है. बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब किसी लड़ाई में F‑35 ने किसी मानव-संचालित विमान को निशाना बनाया है.
आईडीएफ ने दावा किया कि ईरान ने इस्राएल पर मिसाइलें दागीं और देश की रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी गईं. तेल अवीव और आसपास के इलाकों में बुधवार सुबह एयर-सायरन बजाए गए, लेकिन अब तक किसी हताहत की खबर नहीं है. इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बयान जारी कर कहा कि उसने इस्राएल-अमेरिका के ठिकानों पर 40 से अधिक रॉकेट दागे हैं.
इस्राएली वायुसेना का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से वह 1,600 से अधिक मिशन उड़ान भर चुकी है और लगभग 300 रॉकेट लॉन्चर प्लेटफॉर्म नष्ट कर चुकी है.
दो अमेरिकी कॉन्सुलेटों के नॉन इमरजेंसी स्टाफ को पाकिस्तान छोड़ने का आदेश
अमेरिका ने कराची और लाहौर स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेटों के नॉन इमरजेंसी कर्मचारियों को पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दिया है. यह आदेश बुधवार को इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने जारी किया. दूतावास ने कहा कि "सुरक्षा जोखिमों" के कारण लाहौर और कराची कॉन्सुलेट के नॉन इमरजेंसी स्टाफ को परिवार समेत पाकिस्तान छोड़ना होगा.
एक दिन पहले सऊदी अरब, साइप्रस और ओमान के अमेरिकी मिशनों के लिए भी ऐसा ही आदेश जारी किया गया. ईरान पर इस्राएली और अमेरिकी हमले के बाद, मध्य पूर्व में बीते पांच दिन से भीषण युद्ध छिड़ा है. अमेरिका और इस्राएल जहां ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं तेहरान, सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और बहरीन पर हमले कर रहा है.
इस्राएली और अमेरिकी हमलों में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई की मौत के बाद, पाकिस्तान के लाहौर, कराची, गिलगित और स्कार्दू में बेहद उग्र प्रदर्शन हुए. कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के सामने हुए हिंसक प्रदर्शन में 10 लोग मारे गए. वहीं स्कार्दू और गिलगित में 13 लोगों की मौत हुई. दुनिया में शिया मुसलमानों की दूसरी बड़ी आबादी पाकिस्तान में रहती है.
ईरान युद्ध: भारत पर ऐसे सीधे पड़ सकता है बड़ा असर
भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने चेतावनी दी है कि ईरान में जारी युद्ध के कारण उसकी कुछ परिचालन गतिविधियां बाधित हो सकती हैं. कंपनी ने कहा कि जंगी हालात के चलते उसके जहाज सुरक्षित रूप से होरमुज जलडमरूमध्य पार नहीं कर पा रहे हैं, जिससे कतर एनर्जी के रस लाफान लोडिंग पोर्ट तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. कतर एनर्जी, जिसने इस हफ्ते एलएनजी उत्पादन भी अस्थायी रूप से रोक दिया था, भारत के लिए एक प्रमुख सप्लायर है.
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. पेट्रोनेट एलएनजी ने आगाह किया है कि यह युद्ध उसकी अर्थव्यवस्था पर "गंभीर प्रभाव" डाल सकता है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश के तेल और गैस भंडार अभी "आरामदेह" स्तर पर हैं, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर चरणबद्ध उपाय अपनाए जा सकते हैं. रिपोर्टों के अनुसार भारत के पास करीब 25 दिन का तेल भंडार और दो से तीन हफ्ते की एलएनजी उपलब्धता है, जबकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि दक्षिण एशियाई देशों विशेषकर श्रीलंका और भारत पर बढ़ती ऊर्जा कीमतों का भारी असर पड़ सकता है.
शोध में 78% शहरी आबादी के शरीर में छिपे जहर का खुलासा
बेंगलुरु स्थित गट‑हेल्थ स्टार्टअप MicrobioTx द्वारा 200 शहरी भारतीयों के रक्त नमूनों के विश्लेषण में पाया गया कि 78 प्रतिशत लोग कीटनाशक अवशेषों के संपर्क में हैं. इनमें से 36 प्रतिशत में तीन या अधिक कीटनाशकों का मिश्रित असर देखा गया, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की ओर संकेत करता है. शोध में यह भी कहा गया है कि ये विषाक्त पदार्थ भोजन, प्लास्टिक इस्तेमाल, भूजल और प्रदूषण के रास्ते शरीर में प्रवेश कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक 54 प्रतिशत नमूनों में एंटीबायोटिक्स, 39 प्रतिशत में स्टेरॉयड और 38 प्रतिशत में फॉरएवर केमिकल्स पाए गए. एंटीबायोटिक्स के अनचाहे संपर्क को एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस और गट माइक्रोबायोम में गड़बड़ी से जोड़ा गया है, जबकि स्टेरॉयड, हार्मोनल असंतुलन और कैंसर जोखिम बढ़ा सकते हैं. वहीं, फॉरएवर केमिकल्स जो नॉन‑स्टिक बर्तनों, पैकेजिंग और वॉटर‑रेजिस्टेंट कपड़ों में उपयोग होते हैं, कैंसर, बांझपन, थायरॉयड समस्याओं और लीवर डैमेज जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े हुए हैं.
शोध में बताया गया कि नौ राज्यों और 14 शहरों के नमूनों में छिपे हुए रासायनिक संपर्क का उच्च स्तर सामने आया है. विशेष रूप से 17 प्रतिशत नमूनों में 10 या अधिक प्रकार के रसायन पाए गए, जो लंबे समय से चल रहे क्रॉनिक एक्सपोजर का संकेत देते हैं.
रिपोर्ट: इराक में कुर्द गुटों को हथियारबंद कर सकते हैं ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में इराक के कई शीर्ष कुर्द नेताओं से बात की है, जिनमें पट्रियॉटिक यूनियन ऑफ कुर्दिस्तान (पीयूके) के प्रमुख बाफेल तलाबानी और कुर्दिस्तान डेमोक्रैटिक पार्टी (केडीपी) के नेता मसूद बारजानी शामिल हैं. ट्रंप ने तलाबानी को ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अपने आगे के कदमों की जानकारी दी, जबकि अमेरिकी मीडिया के अनुसार उन्होंने बारजानी से भी इसी संदर्भ में चर्चा की.
क्या ईरान युद्ध तेल की कीमतों को ले जाएगा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार?
इन बातचीतों के पीछे कारणों को लेकर कई तरह की अटकलें हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप, ईरानी नेतृत्व के खिलाफ लड़ाई में इराकी कुर्दों को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं, जबकि सीएनएन और अन्य रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सीआईए कुर्द मिलिशियाओं को हथियार देने की योजना पर काम कर रही है. इराक के उत्तरी स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र की सीमाएं सीधे ईरान से लगती हैं और यहां कई ईरानी कुर्द विपक्षी समूह सक्रिय हैं, जिनका भूगोल और सैन्य अनुभव अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन रहा है.
कुर्द बल पहले भी इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में रहे हैं, और क्षेत्र में उनके पास हजारों जंग-आजमाए लड़ाके मौजूद हैं.
अयातोल्लाह अली खमेनेई का विदाई समारोह आज से
इस्राएल और अमेरिका के हमलोंमें मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातोल्लाह अली खमेनेई की आखिरी रुखसती बुधवार शाम से शुरू होगी. यह जानकारी ईरान के सरकारी मीडिया ने दी है. शिया बहुल देश ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता खमेनेई की 28 फरवरी 2026 को हवाई हमलों में मौत हो गई थी.
ईरानी मीडिया के मुताबिक, शोक भरी आखिरी विदाई तीन दिन तक चलेगी. इसके बाद ही जनाजे की यात्रा और सुपुर्द ए खाक की रस्म का एलान किया जाएगा.
86 साल के खमेनेई, करीबन पांच दशक तक ईरान के सर्वोच्च पद पर बने रहे. इस बीच ऐसी खबरें हैं कि ईरान के शीर्ष वरिष्ठ अधिकारियों ने अली खमेनेई के बेटे मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर चुना है. हालांकि आधिकारिक रूप से अयातोल्लाह अलीरेजा अराफी ही अब भी अंतरिम सर्वोच्च धार्मिक नेता हैं.


