Top
Begin typing your search above and press return to search.

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने एकजुटता पर उठाए सवाल, बोले- जरूरत पड़ने पर किसी ने साथ नहीं दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ⁠उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के कई सहयोगी देशों ने ईरान में अमेरिका के सैन्य अभियान के दौरान साथ देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाटो में जिम्मेदारियों का बोझ बराबर नहीं बंटता।

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने एकजुटता पर उठाए सवाल, बोले- जरूरत पड़ने पर किसी ने साथ नहीं दिया
X

अंकारा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ⁠उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के कई सहयोगी देशों ने ईरान में अमेरिका के सैन्य अभियान के दौरान साथ देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाटो में जिम्मेदारियों का बोझ बराबर नहीं बंटता।

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक से पहले, अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने कई दशकों तक अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए भारी निवेश किया है, लेकिन इसके बावजूद कई यूरोपीय देशों के रवैये से उन्हें निराशा हुई।

नाटो और यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम किए जाने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, "देखते हैं। मैं नाटो से बहुत निराश हुआ।"

उन्होंने कहा, "सच कहूं तो अगर यह सम्मेलन तुर्की में नहीं होता, जहां मेरे दोस्त एक मजबूत और प्रभावशाली नेता हैं, तो हो सकता है कि मैं यहां आता ही नहीं।"

ट्रंप ने कहा कि ईरान में हुए सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका को अपने सहयोगी देशों से लगभग कोई मदद नहीं मिली। हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया, क्योंकि हमने ईरान में कार्रवाई की। हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं थी। मैंने तो उनसे मदद मांगी भी नहीं थी, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने कह दिया कि वे हमारे साथ नहीं होंगे।

ट्रंप का कहना था कि अमेरिका ने यूरोपीय देशों, कनाडा और दूसरे सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए नाटो पर खरबों डॉलर खर्च किए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जरूरत पड़ी तो वही देश अमेरिका की मदद के लिए आगे क्यों नहीं आए।

ट्रंप ने खास तौर पर यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) का जिक्र करते हुए कहा कि वहां से भी अमेरिका की उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला। इस घटना से उनके मन में लंबे समय से उठ रहे सवाल और मजबूत हो गए कि अगर कभी अमेरिका किसी सैन्य संकट में फंस जाए तो क्या नाटो के सहयोगी देश वास्तव में उसके साथ खड़े होंगे?

उन्होंने कहा क‍ि मैं हमेशा से कहता आया हूं कि हम उनकी मदद करते हैं, लेकिन मुझे भरोसा नहीं था कि वे हमारी मदद करेंगे। इटली ने मना कर दिया, जर्मनी ने मना कर दिया और फ्रांस ने भी मना कर दिया। कोई बात नहीं, लेकिन फिर सवाल यह है कि हम उन पर सैकड़ों अरब डॉलर क्यों खर्च कर रहे हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर वे हमारे साथ नहीं हैं? हम हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं।

हालांकि, आलोचना के बावजूद ट्रंप ने नाटो में तुर्की की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति एर्दोगन के नेतृत्व की वजह से ही उन्होंने अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल होने का फैसला किया।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it