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ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की जिद के बीच पुतिन ने लगाई इसकी कीमत, बोले- 'यह रूस की चिंता का विषय नहीं'

ग्रीनलैंड को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बात साफ कर दी है कि ग्रीनलैंड यूएस का होगा

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की जिद के बीच पुतिन ने लगाई इसकी कीमत, बोले- यह रूस की चिंता का विषय नहीं
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नई दिल्ली। ग्रीनलैंड को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बात साफ कर दी है कि ग्रीनलैंड यूएस का होगा। हालांकि, डेनमार्क को इस बात से ऐतराज है। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप के सेल्फ-गवर्निंग आर्कटिक आइलैंड को खरीदने के प्लान पर प्रतिक्रिया जाहिर की है। पुतिन ने कहा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ एक कॉलोनी जैसा बर्ताव किया है। एक तरफ जहां ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर मोलभाव करने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर पुतिन ने इसकी नई कीमत लगा दी है।

क्रेमलिन में बुधवार को रूस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के साथ मीटिंग के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, "डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ एक कॉलोनी जैसा बर्ताव किया है, और अगर बेरहमी से न कहा जाए तो काफी सख्ती से बर्ताव किया है।"

पुतिन ने एक बात साफ कर दी कि ग्रीनलैंड को लेकर जो भी बवाल चल रहा है, उससे रूस का कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेने वाले बयान के बाद से इस बात की खूब चर्चा हो रही थी कि महाशक्तियों के बीच इसे लेकर टकराव हो सकता है, लेकिन एक बात यह भी है कि रूस और चीन ने कभी भी सामने आकर ग्रीनलैंड पर कोई खास टिप्पणी नहीं की। यही कारण है कि अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे में रूस के राष्ट्रपति की तरफ से पहली बार ग्रीनलैंड को लेकर बयान सामने आया है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “यह निश्चित रूप से हमारी चिंता का विषय नहीं है। मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 1867 में रूस से अलास्का और 1916 में डेनमार्क से कैरिबियन इलाका खरीदा था, जिसे आज यूएस वर्जिन आइलैंड्स के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रीनलैंड की कीमत 1 बिलियन डॉलर तक हो सकती है और अमेरिका इसे खरीदने की ताकत रखता है। इससे इतर मीडिया से बातचीत के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बात से इनकार किया कि मॉस्को का ग्रीनलैंड के मामलों में दखल देने का कोई योजना है।

दूसरी ओर, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने दावोस में दोहराया कि कोपेनहेगन अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की इजाजत नहीं देगा। डेनमार्क ने 18वीं सदी में ग्रीनलैंड को कॉलोनी बनाया था और 1979 में उसे अपना देश बनाने की इजाजत दी थी। अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड में सैनिक भेजे थे और उत्तर-पश्चिमी तट पर एक एयरबेस बनाए हुए है।


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