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कतर में बनी सहमति: अमेरिका-ईरान अब नहीं करेंगे हमले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद अब दोनों देशों ने हमले रोकने पर सहमति जताई है

कतर में बनी सहमति: अमेरिका-ईरान अब नहीं करेंगे हमले
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तनाव से शांति की ओर: दोहा मीटिंग में तय हुआ युद्धविराम

  • कार्गो जहाज से शुरू हुआ टकराव: अब बातचीत तक सैन्य रोक
  • होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ी चुनौती: जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर फोकस
  • स्थान बदला, एजेंडा सीमित: स्विट्जरलैंड से कतर शिफ्ट हुई बैठक

कतर। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद अब दोनों देशों ने हमले रोकने पर सहमति जताई है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को दोहा (कतर) में उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें हालिया संघर्ष और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

कार्गो जहाज से शुरू हुआ टकराव

तनाव तब बढ़ा जब ईरानी बलों ने एक कार्गो जहाज को निशाना बनाया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान की सैन्य साइट्स और ड्रोन ठिकानों पर कार्रवाई की। ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगियों के ठिकानों पर हमले का दावा किया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी।

बातचीत तक सैन्य रोक

सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है। बैठक का एजेंडा सीमित कर केवल होर्मुज से जुड़े विवादों पर केंद्रित किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी।

स्थान बदला, एजेंडा सीमित

पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के हिस्से के रूप में प्रस्तावित थी, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद स्थान बदलकर कतर कर दिया गया। अमेरिकी टेक्निकल टीम के प्रमुख निक स्टीवर्ट के भी इसमें शामिल होने की संभावना है, हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।

सबसे बड़ी चुनौती: होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समझौते को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। समझौते के तहत ईरान ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया था, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति दी थी। भविष्य में ऐसे टकराव से बचने के लिए दोनों देशों ने स्विट्जरलैंड में हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमति जताई थी, हालांकि यह अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।


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