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ईरान के खिलाफ कार्रवाई अपने लक्ष्य की ओर, भविष्य के नेतृत्व पर नजर : अमेरिका

व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश में हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं

ईरान के खिलाफ कार्रवाई अपने लक्ष्य की ओर, भविष्य के नेतृत्व पर नजर : अमेरिका
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वाशिंगटन। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश में हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं और ईरान में भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी विचार कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके लक्ष्य अगले कुछ हफ्तों में पूरे हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस अभियान के लक्ष्य हासिल करने में करीब चार से छह सप्ताह लग सकते हैं और अमेरिका उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

लेविट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचाया है, खासकर उसकी नौसेना को।

उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब तक ईरान के 30 से ज्यादा जहाज और नौसैनिक पोत डुबो दिए गए हैं, जिसके बाद उसकी नौसेना युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं रही है।

व्हाइट हाउस के मुताबिक इस अभियान का एक बड़ा उद्देश्य ईरान की उन बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे को खत्म करना भी है, जो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों के लिए खतरा बन सकती थीं। लेविट ने कहा कि इस दिशा में भी अमेरिका ने बड़ी सफलता हासिल की है।

उन्होंने बताया कि अभियान शुरू होने के छह दिन के भीतर ही ईरान की ओर से किए जाने वाले जवाबी बैलिस्टिक मिसाइल हमले करीब 90 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। प्रेस सचिव ने यह भी कहा कि ईरान के समर्थन वाले समूहों की तरफ से भी कोई बड़ा जवाबी हमला नहीं हुआ है। उनके अनुसार पिछले छह दिनों में हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठनों ने भी लगभग कोई बड़ा प्रतिरोध नहीं दिखाया है।

लेविट ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को होने वाले खतरे को खत्म करना है। ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर भी लेविट ने सफाई दी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का मतलब यह है कि जब अमेरिकी सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में ट्रंप यह तय कर लेंगे कि ईरान अब अमेरिका के लिए खतरा नहीं रहा और इस अभियान के सभी लक्ष्य पूरे हो चुके हैं, तब ईरान ऐसी स्थिति में होगा जिसे बिना शर्त आत्मसमर्पण कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा, “प्रेसिडेंट का मतलब यह है कि जब वह यूएस आर्म्ड फोर्सेज के कमांडर इन चीफ के तौर पर यह तय कर लेंगे कि ईरान अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के लिए खतरा नहीं रह गया है और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लक्ष्य पूरी तरह से पूरे हो गए हैं, तो ईरान असल में बिना शर्त सरेंडर की स्थिति में होगा।”

लेविट ने यह भी संकेत दिया कि ईरान की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था काफी कमजोर हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि अब वहां ऐसे बहुत कम लोग बचे हैं जो सरकार का प्रतिनिधित्व कर सकें, क्योंकि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर पुराने शासन के 50 से अधिक नेताओं का पूरी तरह से सफाया कर दिया है। ईरान के राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर लेविट ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां वहां संभावित नेतृत्व के विकल्पों का आकलन कर रही हैं।

हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। साथ ही, रूस द्वारा ईरान को खुफिया मदद दिए जाने की खबरों को भी उन्होंने ज्यादा महत्व नहीं दिया।


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