'एक आतंकवादी देश मुझसे यह पूछ रहा है?', विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तानी पत्रकार की बोलती की बंद
'एक आतंकवादी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है?', इसी अंदाज में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तानी पत्रकार की बोलती बंद कर दी।

न्यूयॉर्क। 'एक आतंकवादी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है?', इसी अंदाज में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तानी पत्रकार की बोलती बंद कर दी।
दरअसल, शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार अचानक घुस आया और भारत को लेकर हंगामा करने लगा। इस पर जयशंकर ने मुस्कुराते हुए करारा जवाब दिया।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यांती के साथ शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा पर 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' की लॉन्चिंग को लेकर हो रही थी।
इन टिप्पणियों का सामना करते हुए एस जयशंकर ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यवधान डालने वाले को करारा जवाब दिया।
जब रिपोर्टर चिल्लाता रहा, तो भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा, "आपने उन्हें साफ-साफ सुन लिया।"
गुरुवार को एक भारतीय मीडिया रिपोर्टर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उस समय सवाल किया, जब वह महासभा के प्रवेश द्वार से गुजर रहे थे। पत्रकार ने पूछा, "प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?" और "आप लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमा कब चलाएंगे?"
विदेश मंत्री जयशंकर के विपरीत शरीफ ने जवाब देने में असमर्थ होकर नजरें फेरते हुए अपनी चाल तेज कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में, शरीफ को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचते हुए देखा गया, जब रिपोर्टर ने पूछा, "प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?" शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया।
जब वह यूएन परिसर से बाहर निकले तो यह मुद्दा फिर उठा। रिपोर्टर ने पूछा, "आप लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद पर मुकदमा कब चलाएंगे?" शरीफ ने एक बार फिर सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया और पत्रकारों के सामने से बिना कुछ बोले निकल गए।
हाफिज सईद पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन एलईटी का संस्थापक और भारत के सबसे वांछित वैश्विक आतंकवादियों में से एक है। वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध वैश्विक आतंकवादी है, जिस पर अमेरिकी सरकार ने 1 करोड़ डॉलर का इनाम रखा है।
इससे पहले बुधवार को भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला था और इस्लामाबाद से कहा था कि वह क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को पालने या सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने के बजाय अपनी संघर्षरत, बेलआउट पर निर्भर अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे।
यूएन मानवाधिकार परिषद में, भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान के ध्यान भटकाने के प्रयासों पर पलटवार करते हुए कहा कि आक्रामक तेवर उसकी संघर्षरत अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकते। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नागरिकों के हिंसक दमन का हवाला दिया, जहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को घातक बल से दबाया गया, जबकि अधिकारियों ने आवश्यक भोजन, ईंधन और दवा तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले शुक्रवार को ही परिषद को बताया गया था कि पीओके में जून से अब तक दर्जनों नागरिकों की जान गई है, इस्लामाबाद-रावलपिंडी में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है और लोगों तक खाना-दवा तक नहीं पहुंचने दी जा रही है। जब ये तथ्य सामने रखे गए तो पाकिस्तान ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर का बहाना बना दिया।


