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जर्मनी में सैन्यीकरण की बहस के बीच बर्लिन की एक फैक्टरी सुर्खियों में

बर्लिन की एक फैक्ट्री के बाहर आंदोलनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि ऑटो पार्ट्स बनाने वाली यह फैक्ट्री अब हथियार बनाएगी. लेकिन मजदूर और यूनियन बंटे हुए हैं. वे शांति चाहते हैं. अलबत्ता हथियार नौकरी की गारंटी देते हैं

जर्मनी में सैन्यीकरण की बहस के बीच बर्लिन की एक फैक्टरी सुर्खियों में
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बर्लिन की एक फैक्ट्री के बाहर आंदोलनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि ऑटो पार्ट्स बनाने वाली यह फैक्ट्री अब हथियार बनाएगी. लेकिन मजदूर और यूनियन बंटे हुए हैं. वे शांति चाहते हैं. अलबत्ता हथियार नौकरी की गारंटी देते हैं.

कुछ आंदोलनकारी पिछले हफ्ते सिर्फ बिस्कुट का डिब्बा, कॉफी का थर्मस और ओट मिल्क का कार्टन लेकर मध्य बर्लिन की एक फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे और फैक्ट्री परिसर में आने‑जाने वाले मजदूरों को पैम्फलेट बांट रहे थे.

बर्लिन के पुराने श्रमिक इलाके वेडिंग में स्थित यह फैक्ट्री विवादों में घिरी है. इस साल गर्मियों से, इस फैक्ट्री के 350 में से अधिकांश मजदूरों को बड़े‑कैलिबर के गोला‑बारूद के शेल बनाने का काम दिया जाएगा. हालांकि हथियार बनाने वाली कंपनी राइनमेटाल की सहायक कंपनी पियरबर्ग ने ये बात सावधानी से साफ की है कि फैक्ट्री की साइट पर असली विस्फोटक सामग्री नहीं होगी.

हथियार बनाने का विरोध कर रहे बर्लिन अलायंस के आंद्रेयास ने कहा, "हमारा मकसद यहां के मजदूरों से बातचीत शुरू करना है.” यह लगभग 30 संगठनों का समूह है जो जर्मन उद्योग में बढ़ते सैन्यीकरण का विरोध करता है.

फैक्ट्री के बाहर वे जो पैम्फलेट बांट रहे थे, उन पर लिखा था, "हम आपके साथ खड़े हैं. हम सभी संकट, कटौतियों और बेरोजगारी के खतरे से प्रभावित हैं. लेकिन हम मानते हैं कि युद्ध उद्योग और रक्षा उत्पादन इसका समाधान नहीं है.” पैम्फलेट में मजदूरों को लोकल मीटिंग में आने का निमंत्रण भी दिया गया था, ताकि कंपनी को फिर से नागरिक उत्पादन की ओर लौटने के लिए मनाने पर चर्चा की जा सके.

नौकरियों को लेकर चिंता

प्रदर्शनकारियों की किस्मत अच्छी नहीं थी. जल्दी से गेट से गुजर कर अंदर जाने वाले कुछ मजदूरों ने पैम्फलेट लेने से मना कर दिया या कुछ दूसरों ने गेट के खुलने के समय अपनी कारों की खिड़कियां बंद रखीं और फिर अंदर चले गए.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "वाह, आप देख सकते हैं कि वे कितने नर्वस हैं.” आंद्रेयास ने कहा कि उन्हें संदेह है कि मजदूरों को आंदोलनकारियों से बात न करने के लिए कहा गया होगा, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी.

स्थानीय लोगों को भी ये बात पसंद नहीं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार राजधानी का वेडिंग इलाका हथियारों की फैक्ट्री का मुकाम होगा. यह इलाका, पारंपरिक रूप से वामपंथियों गढ़ रहा है, जो कभी "रेड वेडिंग” के नाम से जाना जाता था और 1929 के "ब्लडी मे” के दौरान पुलिस और मजदूर संगठनों के बीच टकराव का गवाह रहा है.

फैक्ट्री गेट के पास 87 वर्षीय एक महिला ने डॉयचे वेले को बताया, "मैं युद्ध की संतान हूं, मैं और मेरा भाई बेघर हो गए थे, हम सभी युद्ध के खिलाफ हैं. जहां तक मेरा सवाल है, उन्हें यहां (हथियार) नहीं बनाना चाहिए. मैं ऐसा नहीं चाहती.” उन्होंने कहा, "लेकिन दूसरी तरफ हमें खुद की रक्षा भी करनी है.”

आंद्रेयास मजदूरों की दुविधा से सहानुभूति भी रखते हैं. "मजदूरों को काम चाहिए. यह पूंजीवादी व्यवस्था की दुविधा है कि मजदूर यह नहीं तय कर पाते कि एक प्लांट में वास्तव में क्या उत्पादन होना चाहिए.” उन्होंने डॉयचे वेले को बताया, "फिर भी, योजनाएं और सुझाव बनाए जा सकते हैं, आयोजन के पास आलोचनाओं के साथ जा सकते हैं, और निश्चित रूप से, इस तरह का प्लांट गोला‑बारूद के खोल के अलावा दूसरी चीजें भी बना सकता है.”

ऐसे भी संकेत मिले कि फैक्ट्री के कुछ मजदूर इस बदलाव से खुश नहीं थे. एक कर्मचारी ने कार से घर जाते वक्त डॉयचे वेले को बताया, "मुझे यह बहुत बेकार लगता है, लेकिन मुझे परवाह नहीं है क्योंकि मैं यहां बहुत लंबे समय तक काम नहीं करूंगी. मैं रिटायर हो रही हूं.”

गोला‑बारूद बनाना बड़ा कारोबार

तकनीकी दिग्गज राइनमेटॉल जर्मनी के सबसे बड़े औद्योगिक निर्माताओं में से एक है, जो मशीन इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते पैमाने पर हथियारों के निर्माण में विशेषज्ञता रखता है.

कंपनी जर्मन सेना और नाटो के दूसरे सदस्यों के लिए अलग अलग तरह के सैन्य वाहनों के निर्माण में शामिल है. इनमें इस समय विकसित किया जा रहा पैंथर टैंक भी शामिल है. कंपनी की "वेपन्स एंड म्यूनिशन्स” डिवीजन, गाड़ियों के लिए मझौले और बड़े कैलिबर के गोला‑बारूद बनाने में विशेषज्ञता रखती है, जिसमें पियरबर्ग फैक्ट्री को शामिल किया जा रहा है. राइनमेटाल के शेयरों की कीमत फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से 16 गुना बढ़ चुकी है.

डॉयचे वेले को दिए बयान में, राइनमेटाल ने कहा कि फैक्ट्री में हो रहा बदलाव "ऑटोमोबाइल क्षेत्र में गिरती बिक्री और सैन्य क्षेत्र में मांग में भारी वृद्धि” के जवाब में है. बयान में कहा गया है, "हमें खुशी है कि इस बदलाव से हम भविष्य में भी बर्लिन प्लांट के मजदूरों को सुरक्षित नौकरियां दे पाएंगे.

ट्रेड यूनियन के लिए कठिन मुद्दा

बहुत से लोगों का मानना है कि मजदूरों के पास वास्तव में कोई विकल्प नहीं है. धातु उद्योग में काम करने वाले मजदूरों के संगठन IG मेटाल बर्लिन के सदस्य क्लाउस मुराव्स्की पियरबुर्ग फैक्ट्री की वर्कर्स काउंसिल के सदस्यों को जानते हैं. उन्होंने कहा, "बिल्कुल, मजदूर जो बना रहे हैं उससे वे उत्साहित नहीं हैं. मुझे नहीं लगता कि कोई भी रक्षा उद्योग के लिए निर्माण करना पसंद करता है.”

प्रदर्शनों से सहानुभूति रखने के बावजूद मुराव्स्की ने उनमें हिस्सा नहीं लिया क्योंकि उन्हें लगता है कि प्रदर्शनकारी मजदूरों को "हयोग का दोषी” महसूस करा रहे हैं. उन्होंने कहा, "वे मजदूरों को क्या विकल्प दे रहे हैं? यह नीतिगत या नैतिक मामला नहीं, बल्कि इन मजदूरों के लिए अस्तित्व का सवाल है.”

इसी तरह पियरबुर्ग फैक्ट्री के ढेर सारे मजदूरों का प्रतिनिधित्व करने वाला ट्रेड यूनियन IG मेटाल भी बंटा हुआ है. IG मेटाल बर्लिन के प्रमुख कॉन्स्टांटिन बोरषेल्ट कहते हैं, "हमारे लिए IG मेटाल में यह आसान विषय नहीं है. हमारे चार्टर में लिखा है कि हम शांति और निरस्त्रीकरण के पक्ष में हैं, लेकिन साथ ही यह भी लिखा है कि हम स्वतंत्र लोकतांत्रिक सामाजिक व्यवस्था की रक्षा करना चाहते हैं. और सबसे पहले, हम मजदूरों का प्रतिनिधित्व करते हैं.”

बोरषेल्ट सैन्यीकरण के पक्ष में आर्थिक तर्कों से संतुष्ट नहीं हैं. "हमें भविष्य के उत्पादों में निवेश की जरूरत है, और हमारा मतलब हथियार नहीं है. ” उन्होंने कहा, "इतिहास गवाह है कि रक्षा उत्पादन हमेशा के लिए नहीं चल सकता.”

जर्मनी का बढ़ता सैन्यीकरण

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बढ़ते खतरे और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के शासन में अमेरिका से मिलने वाली सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता के कारण जर्मन सरकार कई यूरोपीय सरकारों की तरह ही बदलती भू‑राजनीतिक स्थिति के जवाब में रक्षा में निवेश बढ़ा रही है.

पिछले वर्ष मार्च में, जर्मन संसद ने रक्षा और बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए कई सौ अरब यूरो के उधार पैकेज को मंजूरी दी. तब से, सैकड़ों जर्मन फैक्ट्रियां चुपचाप सैन्य उत्पादन की ओर बढ़ रही हैं.

हथियारों के खिलाफ बर्लिन अलायंस के आंद्रेयास और उनके कुछ साथी प्रदर्शनकारी अगले हफ्ते फिर फैक्ट्री के गेट पर लौटने की योजना बना रहे हैं, ताकि मजदूरों से सीधे बात करने की एक और कोशिश की जा सके. उनका मानना है कि जर्मनी के उद्योग का सैन्यीकरण एक खतरनाक गलती है.

आंद्रेयास ने कहा "जिनके पास हथियार होते हैं, वे अधिक जोखिमभरी विदेश नीति अपनाने को तैयार रहते हैं. और हमें देखना होगा कि जर्मनी ऐसा क्यों कर रहा है. चांसलर मैर्त्स क्यों कह रहे हैं कि जर्मनी को विश्व शक्ति बनना चाहिए? बिल्कुल, इसका खामियाजा जर्मनी को भुगतना पड़ सकता है. और वो तो युद्ध होगा.”


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