दुनिया पर मंडराया परमाणु बम का खतरा
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद दुनिया के कई देशों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं, वहीं अब परमाणु हथियारों की धमक का अंदेशा भी होने लगा है। लेकिन ये आशंका अफगानिस्तान से नहीं, बल्कि उत्तर कोरिया से सामने आई है।

पिछले दो सालों से दुनिया को कोरोना ने परेशान कर रखा है। इसके बाद अफगानिस्तान संकट के कारण मुश्किलें और बढ़ गईं, अब करेले पर नीम चढ़े की तरह खबर आई है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियार बनाने में लगा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि ऐसा लग रहा है कि उत्तर कोरिया ने अपने यंगब्यन परमाणु रिएक्टर को फिर से शुरू कर दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस रिएक्टर में परमाणु हथियारों के लिए प्लूटोनियम तैयार किया जा रहा है। आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को उत्तर कोरिया ने 2009 में देश से बाहर कर दिया था और तब से आईएईए केवल सैटेलाइट की तस्वीरों के जरिए ही आकलन कर पा रहा है। एजेंसी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि जुलाई की शुरुआत से 'रिएक्टर में हुई लगातार गतिविधियों से' इसके फिर शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। एजेंसी का कहना है कि यंगब्यन रिएक्टर में जुलाई से कूलिंग वॉटर निकल रहा है, जिससे उसके चालू होने का पता चल रहा है। आपको बता दें कि यंगब्यन 5 मेगावॉट रिएक्टर के साथ एक न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स है जिसे उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र समझा जाता है। इस रिएक्टर में दिसंबर 2018 के बाद से इस तरह की गतिविधि के ये पहले संकेत हैं। IAEA ने चेतावनी दी है कि रिएक्टर में ताज़ा गतिविधि इस बात का संकेत देती है कि वहां रेडियोकेमिकल लेबोरेटरी में रिएक्टर ईंधन को अलग करके प्लूटोनियम निकाला जा रहा है ताकि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों में किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने इससे पहले जून में इस लेबोरेटरी को लेकर चेताया था। उत्तर कोरिया के पड़ोसी दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने कहा है कि सरकार की 'उत्तर की परमाणु और मिसाइल गतिविधियों पर अमेरिका के साथ क़रीबी नज़र है।'
गौरतलब है कि IAEA के निगरानी कर्ताओं को देश से निकालने के बाद उत्तर कोरिया लगातार परमाणु हथियार बना रहा है और उसने अपना आख़िरी परीक्षण 2017 में किया था। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के दौरान उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन ने यंगब्यन परमाणु कॉम्प्लेक्स को केंद्र में रखा था. किम जोंग उन ने इस कॉम्प्लेक्स को गिराने के बदले में अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील का प्रस्ताव रखा था, लेकिन कहा जाता है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ख़ारिज कर दिया था। इसके बाद से ही शायद अमेरिका औऱ उत्तरकोरिया के बीच वार्ता की कोशिश पटरी से उतर गई थी।
किम जोंग उन ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि वो परमाणु हथियार अब फिर विकसित करेंगे। और 'सुपर लार्ज हाइड्रोजन बम' बनाने पर काम करेंगे।
जानकारों के मुताबिक उत्तर कोरिया की नई गतिविधि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के लिए एक और सिरदर्द हो सकती है।


