विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर पुलिस विभाग में कार्यशाला आयोजित
जिन्दगी अनमोल है, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर जिला पंचायत सभागृह में पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

बेमेतरा। जिन्दगी अनमोल है, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर जिला पंचायत सभागृह में पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर, पंडित जवाहर लाल नेहरू शासकीय मेडिकल कॉलेज रायपुर मनोरोग विभाग के एचओडी डॉ.मनोज साहू, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रकाश कुमार सर्वे, एएसपी विमल कुमार बैस, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आशुतोष चतुर्वेदी, एस.डी.ओ.पी राजीव शर्मा, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ.एस.के.पाल, उपस्थित थे।
कलेक्टर ने कहा कि यदि जीवन में कोई समस्या आती है, तो हम बेचैन हो जाते है, परेशानी से कैसे सामना करेंगे। परेशानी से घिरे व्यक्ति को हर बार यह भय सताते रहता हैें, घर परिवार एक संबल का काम करता है। घर से बाहर जो नौकरी पर कार्यरत है, वे कभी कभी छोटे बच्चों की बाते सुनते है तो उनका तनाव दूर हो जाता है।
यदि कोई व्यक्ति गुमशुम एवं उदास रहता है तो उनके विचारों को साझा करिए। उदासी का कारण पुछे, अवसाद ग्रस्त व्यक्ति से प्यार से बात करें। जिन्दगी अनमोल है, इसे यूंही न गंवाए। आत्महत्या से परिवार टूटकर बिखर जाता है, अत: ऐसा घातक कदम न उठाए।
पुलिस अधीक्षक श्री ठाकुर ने कहा कि आत्महत्या के कारण को जानने का प्रयास करें कि आदमी डिप्रेशन में क्यों जा रहा है। मानसिक अवसाद के कारणों की तह में जाना आवश्यक है। उनके व्यवहार को अन्यथा न लें, परिजन, भाई, बहन, परिवार के अलावा दोस्तों का अहम रोल रहता है।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.मनोज साहू ने कहा कि केरल के बाद छत्तीसगढ़ का नम्बर आता है। इसमें 90 प्रतिशत कारण मानसिक बीमारी बताया गया है। अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को मानसिक सम्बल की जरूरत है। उनके पास बहुत तरह के प्रकरण आते रहते है। रात को सोने से पहले हमें सकारात्मक विचारों (पॉजिटिव थिंक) को शांत मन से विचार एवं चिन्तन करें। सभी के प्रति पॉजिटिव थिंक रखने से हमारे साथ भी सकारात्मक घटनाएं घटेगी। जिला पंचायत के सीईओ ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
सिविल सर्जन डॉ.पाल ने कहा कि एक व्यक्ति खीजकर, असहज व्यवहार करता है तो उसके कारण को जानना आवश्यक है। उसके व्यवहार में किसी प्रकार का परिवर्तन दिखता है तो अनदेखा न, करें बल्कि उनके अवसाद को जानने का प्रयास करें। रायपुर से आये मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. साहू द्वारा पॉवर प्वांईट प्रजेंटेशन के जरिए आत्महत्या की रोकथाम पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिन्दगी अनमोल है, विषय पर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है।


