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पश्चिम बंगाल : टीएमसी नेता कुणाल घोष ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता कुणाल घोष में भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है

पश्चिम बंगाल : टीएमसी नेता कुणाल घोष ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर लगाया आरोप
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता कुणाल घोष में भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर सूची के कारण एक बार फिर मौत हुई है, जिसके लिए भारतीय चुनाव आयोग और भाजपा जिम्मेदार हैं।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के निर्देश पर चुनाव आयोग ठीक काम नहीं कर रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी इसके खिलाफ लोगों के साथ है। पार्टी सड़क पर है और अदालत में भी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में सवाल भी किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार से ममता बनर्जी धरना शुरू करने वाली हैं। भाजपा के निर्देश पर चुनाव आयोग लीगल वोटर्स को डिलीट कर रहा है।

कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बंगाल को बदनाम करने के लिए भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है। और अब साजिश के तहत असली मतदाताओं को गायब किया जा रहा है। चुनाव के लिए दीवारों पर लिखे संदेश सिर्फ तस्वीरें खींचने का एक प्रयास है, लेकिन दीवारों पर लिखे संदेश को पढ़ना तो उन्हें आता ही नहीं।

चुनावों से पहले अन्य राज्यों से आने वाले भाजपा नेताओं पर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने तंज कसा और कहा कि देखिए, ऐसा अक्सर होता है, वे राजनीतिक पर्यटक हैं, रोजाना आने-जाने वाले यात्री हैं, उनके पास पैसा है, होटल बुकिंग की क्षमता है, वे ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने 2021 में भी ऐसा ही किया था, 'अबकी बार 200 पार' के नारे के साथ, वे 77 सीटों पर खड़े हुए और अब घटकर 60 रह गए हैं। उन्होंने 2023 में पंचायत चुनाव हारे, सभी जिला परिषद सीटें हार गए।

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सीपीआईएम पर निशाना साधते हुए कहा कि सीपीआईएम की कोई नीति नहीं है, यह भाजपा की 'बी' टीम है। यहां भाजपा के वोटों का प्रतिशत वामपंथियों के बराबर है। वामपंथियों का प्रभाव कम हुआ है और भाजपा का थोड़ा बढ़ा है। तृणमूल तो कभी थी ही नहीं। ममता दीदी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस पहले दिन से ही जनता के साथ है। वामपंथियों का तो कभी अस्तित्व ही नहीं था, वे घर बैठे रहे।


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