West Bengal: नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी का दांव, शिक्षिका संचिता पर जताया भरोसा
संचिता प्रधानी दे नंदीग्राम के बोयाल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। शिक्षक भर्ती मामले में 26 हजार नियुक्तियां रद किए जाने के फैसले की चपेट में वह भी आई थीं और उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा नौकरी मिल गई।

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधानी दे को उम्मीदवार बनाकर उन अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें ममता बनर्जी के खुद चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा थी। पेशे से शिक्षिका संचिता को उम्मीदवार बनाए जाने को पार्टी की रणनीति में रोजगार और शिक्षक नियुक्ति विवाद को प्रमुखता देने के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
शिक्षिका संचिता पर तृणमूल का भरोसा
संचिता प्रधानी दे नंदीग्राम के बोयाल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। शिक्षक भर्ती मामले में 26 हजार नियुक्तियां रद किए जाने के फैसले की चपेट में वह भी आई थीं और उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा नौकरी मिल गई। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से अहम है। ऐसे समय में जब शिक्षक भर्ती और रोजगार को लेकर राज्य की राजनीति में लंबे समय से बहस चल रही है, पार्टी ने एक ऐसी उम्मीदवार को मैदान में उतारा है जिसका व्यक्तिगत अनुभव इस विवाद से जुड़ा रहा है। इससे चुनाव प्रचार में रोजगार और शिक्षक अधिकारों के मुद्दे को धार मिलने की संभावना है।
लंबे समय से तृणमूल से जुड़ी हैं संचिता
संचिता वर्ष 2008 से तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी हुई हैं। वह 2018 से 2023 तक पंचायत समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं। स्थानीय राजनीति और संगठन में उनकी लंबे समय से मौजूदगी को पार्टी के लिए अतिरिक्त ताकत माना जा रहा है। संचिता उसी मतदान केंद्र की मतदाता हैं, जहां 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा से आए पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान और संगठन से पुराने जुड़ाव को भी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने से हो रहा उपचुनाव
नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव की वजह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का दो सीटों से जीतना है। 2026 के विधानसभा चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव जीता था। नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी और उन्होंने नंदीग्राम की सदस्यता छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद यह सीट रिक्त हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल राजनीतिक लड़ाइयों का केंद्र रहा है। आगामी उपचुनाव में भाजपा और तृणमूल के बीच मुकाबले पर पूरे राज्य की नजर है।
रेजीनगर से रबिउल आलम चौधरी उम्मीदवार
ममता बनर्जी गुट ने रेजीनगर विधानसभा सीट के लिए रबिउल आलम चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। दोनों सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब चुनावी गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, तृणमूल के भीतर चल रही गुटबाजी ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है। पार्टी के दूसरे गुट ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं।
ऋतब्रत गुट ने भी घोषित किए प्रत्याशी
प्रतीक को लेकर चल रहे विवाद के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट ने सोमवार शाम नंदीग्राम और रेजीनगर के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इस गुट ने नंदीग्राम से एहताशुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमान शेख को मैदान में उतारा है। इस तरह नंदीग्राम और रेजीनगर में तृणमूल के दोनों गुट आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है और वह ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ेगा।
चुनाव चिह्न पर आयोग के फैसले का इंतजार
दोनों गुटों ने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर अपना दावा जताते हुए चुनाव आयोग के सामने दस्तावेज और अपना पक्ष रखा है। आयोग ने दोनों पक्षों को 16 सितंबर को अपनी बात रखने का अवसर दिया है। वहीं नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 18 सितंबर निर्धारित है। ऐसे में चुनाव आयोग के फैसले पर दोनों गुटों के साथ-साथ भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों की भी नजर है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित उपचुनाव 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल के बीच एक और अहम चुनावी परीक्षा माना जा रहा है। नंदीग्राम में ममता गुट के उम्मीदवार के रूप में शिक्षिका संचिता की मौजूदगी और तृणमूल के भीतर दोहरे उम्मीदवारों की स्थिति ने मुकाबले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।


