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पश्चिम बंगाल : अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला पार्टी कार्यालय पर दूसरे दिन भी बुलडोजर एक्शन जारी

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला पार्टी कार्यालय को गिराने की कार्रवाई रविवार को भी जारी रही। शनिवार दोपहर शुरू हुई यह कार्रवाई दूसरे दिन भी प्रशासन की निगरानी में चलती रही।

पश्चिम बंगाल : अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला पार्टी कार्यालय पर दूसरे दिन भी बुलडोजर एक्शन जारी
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला पार्टी कार्यालय को गिराने की कार्रवाई रविवार को भी जारी रही। शनिवार दोपहर शुरू हुई यह कार्रवाई दूसरे दिन भी प्रशासन की निगरानी में चलती रही।

यह इमारत 'सांसद अभिषेक बनर्जी का कार्यालय' के बोर्ड के साथ संचालित हो रही थी। ध्वस्तीकरण अभियान में दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग, जिला पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की संयुक्त टीम शामिल है।

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को इमारत की सुरक्षा व्यवस्था ने हैरान कर दिया। इमारत की हर मंजिल पर अत्याधुनिक डिजिटल लॉक लगाए गए थे। एक जिला पुलिस अधिकारी के अनुसार, ऐसे डिजिटल लॉक आमतौर पर महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी सांसद के जिला पार्टी कार्यालय में इतनी उन्नत सुरक्षा व्यवस्था की आखिर जरूरत क्यों पड़ी।

डिजिटल लॉक खोलना आसान नहीं था। इसके लिए राज्य अग्निशमन विभाग के विशेष कर्मचारियों की मदद ली गई, जिन्होंने लॉक को तोड़कर कमरों को खोला।

इस बीच स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि इस पार्टी कार्यालय में जिले में कथित अवैध भूमि कब्जे से जुड़े मामलों के महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिषेक बनर्जी की महत्वाकांक्षी 'सेबाश्रय' स्वास्थ्य शिविर से संबंधित फाइलें रखी गई थीं। इसी वजह से डिजिटल लॉक का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों के अनुसार, ध्वस्तीकरण के दौरान टीम को भवन के कुछ कमरों से फाइलों से भरे कई ट्रंक भी मिले, जिन्हें बाहर निकाला गया। हालांकि, राज्य पुलिस ने इन ट्रंकों में रखे दस्तावेजों की प्रकृति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने इमारत के कथित अवैध निर्माण को लेकर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को लगातार दो नोटिस भेजे थे। आरोप है कि इन नोटिसों का कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।



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