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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण अधूरा, सीईओ ने मांगा अतिरिक्त समय

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सुनवाई की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण अधूरा, सीईओ ने मांगा अतिरिक्त समय
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15–20 विधानसभा क्षेत्रों में लंबित सुनवाई, आयोग को भेजा पत्र

  • चार लाख से अधिक नाम हटाने के लिए चिह्नित, अंतिम सूची पर संशय
  • 14 फरवरी को तय प्रकाशन तारीख टल सकती है, चुनावी तैयारी पर असर
  • असमंजस में मतदाता सूची, चुनाव आयोग की टीम करेगी जमीनी समीक्षा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सुनवाई की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। शनिवार को आखिरी दिन भी कम से कम 15 से 20 विधानसभा क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

श्री अग्रवाल ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को लिखे पत्र में कहा कि तय समय में लंबित सुनवाई पूरी करना मुमकिन नहीं होगा और प्रभावित क्षेत्रों में यह काम पूरा करने के लिए और दिन देने का आग्रह किया।

हालांकि आज दोपहर तक सीईओ के कार्यालय में विस्तार के लिए कोई औपचारिक मंजूरी नहीं पहुंची थी।

ये विधासभा क्षेत्र ज़्यादातर तीन चुनावी ज़िलों में फैले हुए हैं जिनमें अल्पसंख्यक वाले मालदा, तटीय दक्षिणी 24 परगना और कोलकाता (उत्तर) है।

अधिकारियों ने कहा कि इन इलाकों के जिला चुनाव अधिकारी पहले ही अतिरिक्त समय मांगने के लिए औपचारिक सुझाव जमा कर चुके हैं और सीईओ के सामने अपना आग्रह रख चुके हैं।

सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतिम अनुशंषा पूरे दिन चलने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।

इससे पहले, सीईओ कार्यालय ने जिला मजिस्ट्रेट से उन इलाकों की चुनाव क्षेत्र के हिसाब से जानकारी देने को कहा था जहाँ सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है।

श्री अग्रवाल ने आज सुबह ज़िलों से जवाब मिलने के बाद ने नई दिल्ली में आायोग से औपचारिक तौर पर संपर्क किया।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई पिछले साल 27 दिसंबर को शुरू हुई थी और शुरू में धीमी गति से आगे बढ़ी।

इस बीच, मतदाता एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए चिह्नित किये गये हैं। बार-बार नोटिस के बावजूद अधिकारियों के समक्ष शुक्रवार शाम तक उपस्थित न होने पर चार लाख से अधिक नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाने के लिए चिह्नित हो चुके हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इनमें से लगभग 50,000 'अनमैप्ड' मतदाता श्रेणी में आते हैं। यह लोग 2002 की मतदाता सूची से स्वयं या वंश आधारित मैपिंग के जरिए कोई सत्यापन योग्य संबंध स्थापित नहीं कर सके। इसके अलावा, करीब 3.5 लाख मामलों में 'तार्किक विसंगतियां' पायी गयीं, जहां वंश-आधारित मैपिंग के दौरान पारिवारिक लिंक डेटा में असंगतियां सामने आईं। यह पूरी कवायद दिसंबर में मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद शुरू हुई थी, जब मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट पाये गये मतदाताओं के 58.2 लाख नाम हटाए गये थे।

अधिकारियों ने कहा कि कितने नाम हटाए गए हैं, यह अंतिम प्रकाशन होने के बाद पता चलेगा।

श्री अग्रवाल ने कहा कि सुनवाई खत्म होने के बाद, अंतिम मतदाता सूची तैयार करने में लगभग एक हफ़्ते का समय लगेगा।

ईसीआई ने पहले अंतिम सूची के प्रकाशन के लिए 14 फ़रवरी की तारीख तय की थी, लेकिन अगर सुनवाई का समय बढ़ाया जाता है तो तारीख बदलनी पड़ेगी।

अंतिम सूची जारी होने के बाद चुनाव आयोग की एक पूरी टीम के ज़मीनी हालात की समीक्षा करने के लिए पश्चिम बंगाल आने की उम्मीद है। इसके बाद विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने की संभावना है।


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