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तृणमूल के नाम-चिह्न पर संकट, ममता और ऋतब्रत गुटों ने आयोग को भेजे नए विकल्प; अब किसे मिलेगा ‘जोड़ा फूल’ का विकल्प?

तृणमूल कांग्रेस का ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह पार्टी की राजनीतिक पहचान से लंबे समय से जुड़ा रहा है। दिए गए विवरण के मुताबिक, इस प्रतीक को ममता बनर्जी ने करीब 28 साल पहले तैयार किया था। आयोग द्वारा इसे फ्रीज किए जाने के बाद इसके इस्तेमाल पर फिलहाल रोक है।

तृणमूल के नाम-चिह्न पर संकट, ममता और ऋतब्रत गुटों ने आयोग को भेजे नए विकल्प; अब किसे मिलेगा ‘जोड़ा फूल’ का विकल्प?
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी संगठनात्मक विवाद अब चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम तक पहुंच गया है। भारत निर्वाचन आयोग के कड़े अंतरिम आदेश के बाद पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी धड़ों ने आयोग के सामने वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्हों की सूची पेश कर दी है। आयोग ने दोनों पक्षों को निर्धारित समय सीमा के भीतर तीन-तीन वैकल्पिक नाम और मुक्त चुनाव चिन्हों की प्राथमिकता बताने का निर्देश दिया था। अब अगला फैसला आयोग को करना है।

दोनों गुटों से मांगे गए थे तीन विकल्प

आयोग के निर्देश के मुताबिक दोनों पक्षों को पंजीकृत मुक्त चुनाव चिन्हों में से अपनी पसंद बतानी थी। इसका उद्देश्य आगामी विधानसभा उप-चुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित करना है। आयोग ने इसके लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे तक का समय तय किया था। इस निर्देश के बाद दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी पसंद आयोग के सामने रख दी। हालांकि, अंतिम नाम और चुनाव चिन्ह का आवंटन आयोग के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

ममता गुट ने रखे तीन नाम

‘कालीघाट-तृणमूल’ के तौर पर सामने आए ममता बनर्जी समर्थक गुट ने ईमेल के माध्यम से तीन वैकल्पिक नाम प्रस्तावित किए हैं। इनमें ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’, ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ममता’ और ‘तृणमूल ममता कांग्रेस’ शामिल हैं। चुनाव चिन्हों के मामले में इस गुट ने ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और ‘बल्ला’ जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी है। साथ ही गुट ने पार्टी के पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल’ को फ्रीज किए जाने के आयोग के फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई है।

ऋतब्रत गुट ने चुने ये विकल्प

दूसरी ओर, ‘ऋतब्रत-तृणमूल’ गुट ने दो वैकल्पिक नाम आयोग को भेजे हैं। इनमें ‘राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस’ शामिल हैं। चुनाव चिन्हों की बात करें तो इस गुट ने मुक्त प्रतीकों की सूची से ‘ब्लैकबोर्ड’, ‘लिफाफा’ और ‘टार्च’ को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। अब आयोग इन प्रस्तावों पर विचार करने के बाद दोनों पक्षों के लिए चुनावी पहचान तय करेगा।

‘जोड़ा फूल’ को फ्रीज करने का फैसला

विवाद की सबसे अहम कड़ी तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल’ को लेकर है। आयोग के अंतरिम आदेश के बाद पार्टी के नाम और इस चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। इसका मतलब है कि विवाद के समाधान तक दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट इस नाम और प्रतीक का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह फैसला आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उप-चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों पक्षों के लिए अब अलग चुनावी पहचान की जरूरत पैदा हो गई है।

28 साल पहले तैयार हुआ था चुनाव चिन्ह

तृणमूल कांग्रेस का ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह पार्टी की राजनीतिक पहचान से लंबे समय से जुड़ा रहा है। दिए गए विवरण के मुताबिक, इस प्रतीक को ममता बनर्जी ने करीब 28 साल पहले तैयार किया था। आयोग द्वारा इसे फ्रीज किए जाने के बाद इसके इस्तेमाल पर फिलहाल रोक है। चुनाव चिन्ह किसी राजनीतिक दल की चुनावी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में उसके इस्तेमाल पर रोक का असर दोनों गुटों की आगामी चुनावी गतिविधियों पर पड़ सकता है।

फैसले पर आमने-सामने दोनों पक्ष

आयोग के अंतरिम आदेश पर दोनों गुटों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रही हैं। तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने आयोग के फैसले पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘गैर-कानूनी’ बताया है। दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट ने आयोग के कदम का स्वागत किया है और इसे अपने पक्ष के लिए महत्वपूर्ण बताया है। अब निगाहें आयोग के अगले आदेश पर हैं। दोनों गुटों द्वारा वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्हों की प्राथमिकता सौंपे जाने के बाद यह तय होना बाकी है कि उप-चुनाव में उन्हें किस नाम और प्रतीक के साथ मैदान में उतरने की अनुमति मिलती है। विवाद के अंतिम समाधान और पार्टी के मूल नाम-चिह्न पर आगे क्या निर्णय होता है, यह भी आयोग की आगामी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।


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