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बेलडांगा हिंसा पर सुवेंदु अधिकारी का राज्यपाल को पत्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस को पत्र लिखकर बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) में जारी तनाव के बीच दखल देने की मांग की

बेलडांगा हिंसा पर सुवेंदु अधिकारी का राज्यपाल को पत्र
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मुर्शिदाबाद में साम्प्रदायिक तनाव, प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप

  • पत्रकारों पर हमले का मुद्दा भी उठाया विपक्षी नेता ने
  • केंद्रीय बलों की तैनाती और प्रतिबंधात्मक आदेश की मांग
  • “स्थिति नियंत्रण से बाहर”– अधिकारी ने जताई गहरी चिंता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस को पत्र लिखकर बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) में जारी तनाव के बीच दखल देने की मांग की। यह तनाव कथित रूप से झारखंड में मुर्शिदाबाद जिले के एक प्रवासी मजदूर की हत्या के विरोध में प्रदर्शन के कारण उत्पन्न हुआ।

सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार की शाम को कहा, “मैं मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में जारी साम्प्रदायिक हिंसा को लेकर गहरी चिंता और आक्रोशित हूं, जहां निर्दोष हिन्दू परिवारों के घर, दुकानें और पूजा स्थलों पर सीधे हमले हो रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि अपने पत्र में उन्होंने राज्यपाल को यह भी बताया कि बेलडांगा में तनाव को कवर कर रहे पत्रकारों, जिनमें महिला पत्रकार भी शामिल हैं, पर रिपोर्टिंग के दौरान कथित रूप से हमला किया गया।

सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को यह भी अवगत कराया कि मुर्शिदाबाद में राज्य और जिला प्रशासन हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने में निष्क्रिय रहा। उन्होंने दावा किया कि बेलडांगा में यह हिंसा शुक्रवार दोपहर से शुरू हुई और शनिवार दोपहर तक जारी रही।

उन्होंने कहा, “सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि राज्य प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय है। धारा 163 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किए गए और स्थिति नियंत्रण से बाहर जा रही है। पिछले साल मुरशिदाबाद में हुए भयंकर दंगों की याद आते ही, जहां जानें गई थीं, मैं चुपचाप नहीं बैठ सकता।”

पत्र में विपक्षी नेता ने राज्यपाल से तत्काल प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात करने का आग्रह किया ताकि बेलडांगा में शांति बहाल हो और लोगों की जान सुरक्षित रहे।

उन्होंने कहा, “कोलकाता हाई कोर्ट के 2025 के निर्देश स्पष्ट रूप से ऐसे हालात में कार्रवाई का आदेश देते हैं, और अब इसे लागू किया जाना चाहिए। मैं राज्यपाल से आग्रह करता हूं कि बिना किसी विलंब के हस्तक्षेप करें और राज्य को निर्णायक कार्रवाई करने का निर्देश दें।”


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