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भाजपा के 1,500 करोड़ रुपए के केमिकल पार्क प्रस्ताव के साथ सिंगूर फिर चर्चा में

पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने राज्य में लगभग 1,500 करोड़ रुपए की लागत से एक खास केमिकल पार्क बनाने का प्रस्ताव रखा है

भाजपा के 1,500 करोड़ रुपए के केमिकल पार्क प्रस्ताव के साथ सिंगूर फिर चर्चा में
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने राज्य में लगभग 1,500 करोड़ रुपए की लागत से एक खास केमिकल पार्क बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव हाल ही में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को सौंपा गया था।

भट्टाचार्य ने अपने प्रस्ताव में प्रस्तावित केमिकल पार्क प्रोजेक्ट के लिए हुगली जिले के सिंगूर को सबसे उपयुक्त जगहों में से एक बताया।

सिंगूर ने 2007 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था, जब पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान टाटा मोटर्स के 'नैनो' प्रोजेक्ट के लिए खेती की जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की अगुवाई की थी।

लंबे समय तक चले और अक्सर हिंसक रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच टाटा ग्रुप ने आखिरकार इस प्रोजेक्ट से हटने का फैसला किया। तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा ने सिंगूर से नैनो प्लांट हटाने की घोषणा की, जिससे राज्य के सबसे विवादित औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में से एक का अंत हो गया।

भट्टाचार्य ने प्रस्तावित केमिकल पार्क के लिए तीन और संभावित जगहों की पहचान की है। ये जगहें हैं- पूर्वी मिदनापुर जिले में हल्दिया, बांकुरा जिले में रघुनाथपुर और पश्चिम बर्दवान जिले में दुर्गापुर।

सीएम अधिकारी को भेजे गए प्रस्ताव में भट्टाचार्य ने बताया था कि केंद्रीय कैबिनेट ने इस साल 24 जुलाई को 'भव्य रसायन योजना' को मंजूरी दी थी। यह 3,030 करोड़ रुपए की केंद्रीय योजना है, जिसके तहत देश भर में तीन खास केमिकल पार्क बनाए जाएंगे। इसके लिए कम से कम 2,000 एकड़ की जमीन ऐसी चाहिए होगी, जो एक ही जगह पर हो और जिस पर कोई कानूनी विवाद या अड़चन न हो। साथ ही, राज्य को कम से कम 500 करोड़ रुपए का योगदान देना होगा, जिसके बदले केंद्र सरकार हर पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपए तक की ग्रांट देगी।

उनके अनुसार, इस घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल को राष्ट्रीय स्तर का केमिकल हब बनाने का एक दुर्लभ अवसर मिला है। इसमें राज्य के बुनियादी ढांचे में कुल मिलाकर 1,500 करोड़ रुपए या उससे अधिक का निवेश होने का अनुमान है, और बाद के चरण में इस प्रोजेक्ट के लिए निजी पूंजी भी आकर्षित की जा सकती है।

भट्टाचार्य के अनुसार, प्रस्तावित प्रोजेक्ट से कंस्ट्रक्शन, प्लांट ऑपरेशन, लॉजिस्टिक्स और सहायक एमएसएमई में सीधे रोजगार पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे कृषि, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे डाउनस्ट्रीम सेक्टर में भी जबरदस्त मल्टीप्लायर असर देखने को मिलेगा। साथ ही, एंकर निवेशकों को आकर्षित करने और नेशनल केमिकल वैल्यू चेन में पश्चिम बंगाल की स्थिति को मजबूत करने के लिए सीईटीपी, टीएसडीएफ, यूटिलिटीज और पाइपलाइन जैसी टिकाऊ 'प्लग-एंड-प्ले' इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित की जाएगी।

मुख्यमंत्री को दिए अपने प्रस्ताव में भट्टाचार्य ने कहा, "यह इस बात का संकेत है कि पश्चिम बंगाल बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश के लिए तैयार है, और यह ऐसे समय में हो रहा है, जब दूसरे राज्य भी तेजी से अपनी दावेदारी पेश करने की कोशिश करेंगे।"

भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री को यह भी सुझाव दिया था कि वे राज्य के वाणिज्य और उद्योग विभाग और पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम की अगुवाई में एक अंतर-विभागीय टास्क फोर्स बनाएं। यह टास्क फोर्स पश्चिम बंगाल का 'चैलेंज रूट' सबमिशन तैयार करेगी। साथ ही, उन्होंने डब्ल्यूबीआईडीसी को जमीन के मालिकाना हक, उस पर किसी तरह के कानूनी विवाद या बोझ और बुनियादी ढांचे की तैयारी से जुड़ा अपडेटेड डॉक्युमेंट तैयार करने का निर्देश देने का भी सुझाव दिया था।

भाजपा सांसद ने यह भी सुझाव दिया था कि अधिकारी औपचारिक गाइडलाइंस जारी होने से पहले ही केंद्रीय रसायन और पेट्रोकेमिकल मंत्रालय के साथ सक्रिय रूप से बातचीत करें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि पश्चिम बंगाल तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहे। साथ ही, पश्चिम बंगाल वित्त विभाग से सलाह-मशविरा करके आने वाली बजट प्रक्रिया में राज्य का बराबर का योगदान भी तय किया जा सके।


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